World Rapid Chess Championship 2025: अर्जुन एरिगैसी बने वर्ल्ड रैपिड में पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय

World Rapid Chess Championship 2025: भारतीय शतरंज के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप 2025 में भारत के युवा ग्रैंडमास्टर अर्जुन एरिगैसी ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। दोहा में आयोजित इस टूर्नामेंट में अर्जुन का प्रदर्शन न केवल शानदार रहा, बल्कि उन्होंने दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर देकर यह साबित कर दिया कि भारतीय शतरंज का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।

यह टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया में बेहद अहम माना जाता है, जहां दुनिया भर के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। ऐसे मंच पर लगातार बेहतरीन खेल दिखाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन अर्जुन एरिगैसी ने अपने आत्मविश्वास, धैर्य और रणनीतिक सोच से सभी का दिल जीत लिया।

दोहा में खेले गए टूर्नामेंट में अर्जुन का शानदार प्रदर्शन World Rapid Chess Championship

World Rapid Chess Championship 2025

कतर की राजधानी दोहा में आयोजित FIDE वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप में अर्जुन एरिगैसी ने शुरुआत से ही मजबूत खेल दिखाया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने कुल 13 मुकाबले खेले, जिनमें से केवल दो में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अर्जुन ने 9.5 पॉइंट्स हासिल किए, जो कि वर्ल्ड रैपिड चैंपियन मैग्नस कार्लसन से सिर्फ एक अंक कम थे।

इतने बड़े टूर्नामेंट में इतने कम अंतर से पीछे रहना भी यह दिखाता है कि अर्जुन अब विश्व स्तर पर शीर्ष खिलाड़ियों की श्रेणी में मजबूती से खड़े हो चुके हैं। कई राउंड्स में उन्होंने आक्रामक लेकिन संतुलित खेल दिखाया और अपनी चालों से विरोधियों को चौंकाया।

किन मुकाबलों में मिली हार, फिर भी रहा दबदबा

हालांकि अर्जुन एरिगैसी का टूर्नामेंट लगभग परफेक्ट रहा, लेकिन उन्हें दो मुकाबलों में हार झेलनी पड़ी। एक हार उन्हें सिल्वर मेडल विजेता व्लादिस्लाव आर्टेमिएव के खिलाफ मिली, जबकि दूसरी हार तुर्की के युवा खिलाड़ी यागिज कान एर्दोगमुस से हुई। इन हारों के बावजूद अर्जुन का आत्मविश्वास कमजोर नहीं पड़ा और उन्होंने बाकी मुकाबलों में मजबूती से वापसी की।

खास बात यह रही कि टूर्नामेंट के अंत में चार खिलाड़ी 9.5 पॉइंट्स के साथ बराबरी पर थे, लेकिन टाई-ब्रेक नियमों के चलते अर्जुन को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद, उनका प्रदर्शन किसी जीत से कम नहीं माना जा रहा है।

विश्वनाथन आनंद के बाद दूसरी बड़ी उपलब्धि

भारतीय शतरंज प्रेमियों के लिए यह पल बेहद भावुक और गर्व से भरा हुआ है। विश्वनाथन आनंद, जिन्होंने वर्षों तक भारत को शतरंज की दुनिया में पहचान दिलाई, उनके बाद अर्जुन एरिगैसी का वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप में पदक जीतना इस बात का संकेत है कि भारत में शतरंज की विरासत सुरक्षित हाथों में है।

अर्जुन की यह उपलब्धि सिर्फ एक मेडल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। आज देश के हजारों युवा शतरंज खिलाड़ी अर्जुन को देखकर यह सपना देख सकते हैं कि वे भी एक दिन विश्व मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर दी शुभकामनाएं

अर्जुन एरिगैसी की इस शानदार उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें सोशल मीडिया के जरिए बधाई दी। पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि दोहा में FIDE वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप के ओपन सेक्शन में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के लिए अर्जुन एरिगैसी पर पूरे देश को गर्व है।

प्रधानमंत्री ने अर्जुन के जज्बे, मेहनत और समर्पण की तारीफ करते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने अर्जुन को उनके भविष्य के मुकाबलों के लिए ढेरों शुभकामनाएं भी दीं। पीएम मोदी का यह संदेश साफ तौर पर दिखाता है कि देश अब खेलों में भी अपने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पूरा सम्मान और समर्थन दे रहा है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी की सराहना

प्रधानमंत्री के अलावा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी अर्जुन एरिगैसी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांस्य पदक जीतकर अर्जुन विश्वनाथन आनंद के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।

मुख्यमंत्री ने अर्जुन को तेलंगाना का बेटा बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत की समृद्ध शतरंज विरासत में गौरव का एक और अध्याय जोड़ दिया है। उनका यह बयान न केवल अर्जुन के लिए सम्मानजनक था, बल्कि पूरे दक्षिण भारत के शतरंज खिलाड़ियों के लिए गर्व का विषय बन गया।

भारतीय शतरंज की बढ़ती ताकत का प्रतीक है अर्जुन की सफलता

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शतरंज ने जिस तेजी से तरक्की की है, अर्जुन एरिगैसी उसकी एक मजबूत मिसाल हैं। आज भारत के पास कई युवा ग्रैंडमास्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। अर्जुन की यह सफलता बताती है कि भारत अब सिर्फ एक-दो खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक पूरी पीढ़ी तैयार हो चुकी है।

अर्जुन का खेल संतुलन, रणनीति और समय प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण है। रैपिड फॉर्मेट में जहां फैसले तेजी से लेने होते हैं, वहां अर्जुन ने अपने अनुभव और सोच का सही इस्तेमाल किया।

कोनेरू हम्पी का भी शानदार प्रदर्शन

वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता यहीं नहीं रुकी। महिलाओं के वर्ग में भारत की स्टार शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हम्पी ने भी शानदार प्रदर्शन किया और कांस्य पदक अपने नाम किया। हालांकि वह अपने तीसरे वर्ल्ड रैपिड खिताब से चूक गईं, लेकिन उनका खेल एक बार फिर उनकी निरंतरता और अनुभव को दर्शाता है।

कोनेरू हम्पी वर्षों से भारतीय महिला शतरंज की पहचान रही हैं और हर बड़े मंच पर उन्होंने देश का नाम रोशन किया है। इस टूर्नामेंट में भी उन्होंने दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ मजबूती से मुकाबला किया।

कोनेरू हम्पी को भी मुख्यमंत्री की बधाई

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कोनेरू हम्पी को भी कांस्य पदक जीतने पर बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि चैंपियन सिर्फ नतीजों से नहीं, बल्कि बड़े मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करने के साहस से पहचाने जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ल्ड स्तर पर कांस्य पदक जीतना सच्ची उत्कृष्टता को दर्शाता है। कोनेरू हम्पी की यात्रा, उनकी निरंतरता और भारत के लिए उनका योगदान लाखों लोगों को प्रेरित करता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बना यह टूर्नामेंट

वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप 2024 भारतीय शतरंज के लिए कई मायनों में खास रही। एक तरफ अर्जुन एरिगैसी जैसे युवा खिलाड़ी ने इतिहास रचा, तो दूसरी तरफ कोनेरू हम्पी जैसी अनुभवी खिलाड़ी ने अपनी मजबूती साबित की। यह संतुलन दिखाता है कि भारतीय शतरंज में अनुभव और युवा जोश दोनों का शानदार मेल है।

आज के दौर में जब युवा खिलाड़ी क्रिकेट या अन्य खेलों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं, ऐसे में शतरंज में मिल रही ये उपलब्धियां उन्हें इस खेल की ओर भी प्रेरित करेंगी।

आने वाले समय में और ऊंचाइयों की उम्मीद

अर्जुन एरिगैसी की उम्र अभी कम है और उनके करियर की शुरुआत ही हुई है। जिस तरह का आत्मविश्वास और परिपक्वता उन्होंने वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर दिखाई है, उससे यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले वर्षों में वह भारत को और भी बड़ी उपलब्धियां दिलाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अर्जुन इसी तरह मेहनत और फोकस बनाए रखते हैं, तो वह क्लासिकल और ब्लिट्ज फॉर्मेट में भी विश्व स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं।

भारत के लिए गर्व का क्षण

वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप 2024 में अर्जुन एरिगैसी का ब्रॉन्ज मेडल जीतना सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों तक का उन्हें बधाई देना यह दिखाता है कि आज भारत अपने खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों को दिल से सराहता है।

अर्जुन एरिगैसी और कोनेरू हम्पी जैसे खिलाड़ी भारतीय शतरंज को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। आने वाले समय में देश को उनसे और भी शानदार प्रदर्शनों की उम्मीद रहेगी, और यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत अब शतरंज की दुनिया में एक मजबूत शक्ति बन चुका है।

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