West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ी से चल रही हैं। यह चुनाव न सिर्फ राज्य की राजनीति के लिए, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस ब्लॉग में हम मुख्य खिलाड़ी, चुनावी मुद्दे, संभावित रणनीतियाँ और परिणामों का विश्लेषण करेंगे।

एक राजनीतिक पृष्ठभूमि: West Bengal Election 2026
पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व में है, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसका चेहरा हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने 294 में से 215 सीटें जीती थीं।
दूसरी ओर, भाजपा ने करीब 77 सीटें जीती थीं, और राज्य में उसका दायरा लगातार बढ़ रहा है।
तीसरी महत्वपूर्ण ताकत है वाम-सेक्युलर मोर्चा (Left Front + कांग्रेस), जिसे Sanjukta Morcha के नाम से जाना जाता है।
2026 के चुनावी मुद्दे: West Bengal Election 2026
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विकास और बेरोज़गारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2025 में दुर्गापुर में 5,400 करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया और TMC सरकार को बेरोज़गारी, उद्योग मंदी और निवेश रोके जाने का आरोप लगाया।
भाजपा इस मुद्दे को “विकसित बंगाल” (Viksit Bengal) के नारों के साथ सबसे बड़े चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। -
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था
महिलाओं की सुरक्षा, विद्यालयों व अस्पतालों में आपराधिक घटनाओं और प्रशासन की लापरवाही भाजपा द्वारा उठाए जा रहे संवेदनशील मुद्दे हैं। मोदी ने भाषणों में TMC पर “गुंडा टैक्स” और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विकास की राह में बाधा होने का कहा है। -
मतदाता सूची और मतदान की पारदर्शिता
चुनाव अधिकारी राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं, जिससे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाया जाए।
साथ ही, मतदाता नामांकन के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन खारिज किए जाने की खबरें भी हैं — करीब 10 लाख में से 2.43 लाख आवेदन खारिज हुए हैं।
यह विषय राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, ख़ासकर उन जिलों में जहाँ सीमांत आबादी ज्यादा है, जैसे मुरशिदाबाद और 24 परगना। -
धार्मिक और सांस्कृतिक ध्रुवीकरण
बंगाल की राजनीति में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की रणनीति भी गहराई से देखने को मिल रही है। भाजपा ने हिंदू एकता के संदेश को चुनावी प्रचार में शामिल किया है। > “हिंदू-हिंदू भाई-भाई, 2026 BJP Chai” जैसे नारों की चर्चा भी हुई है।
दूसरी ओर, AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन) ने भी 2026 में पूरे राज्य में चुनाव लड़ने की बात कही है, जिससे मुस्लिम वोटों की संरचना में बदलाव की संभावना बन रही है। -
चुनावी हिंसा और तनाव
पिछली स्थानीय और पंचायत चुनावों में बंगाल में राजनीतिक हिंसा देखने को मिली थी, जिसमें टीएमसी, भाजपा, कांग्रेस और वामपक्ष के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई थीं।
चुनाव के नजदीक आते ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और शांतिपूर्ण मतदान को लेकर सार्वजनिक चिंता बढ़ रही है।
खिलाड़ी और गठबंधन:
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TMC (तृणमूल कांग्रेस)
ममता बनर्जी की पार्टी शुरुआती दावेदार है। उनकी लोकप्रियता, कल्याणकारी योजनाएँ (जैसे कन्याश्री, स्वास्थसाठी आदि) और ज़मीनी जनाधार उन्हें मजबूत स्थिति में रखते हैं।
पार्टी का दावा है कि भाजपा को 50 से कम सीटें मिलेंगी। -
BJP (भारतीय जनता पार्टी)
सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी, जिसे लगता है कि राज्य में विकास और सुरक्षा के मुद्दे उसके पक्ष में जाएंगे। मोदी और शाह जैसे बड़े नेता सक्रिय हैं।
भाजपा अपनी हिंदू पहचान, विकास एजेंडा और TMC के खिलाफ भ्रष्टाचार जैसे आरोपों पर जोर दे रही है। -
Sanjukta Morcha (Left + कांग्रेस)
वामपक्ष और कांग्रेस का गठबंधन सेतु है, जो TMC और BJP दोनों को टक्कर देने की कोशिश करेगा।
हालांकि, पिछली बार उनका स्थान सीमित रहा था, लेकिन 2026 में वे “तीसरी विकल्प” का कार्ड खेल सकते हैं। -
अन्य दल
AIMIM जैसे दल भी मैदान में हैं, विशेष रूप से मुस्लिम बहुल इलाकों में। उनकी भागीदारी ने चुनावी समीकरणों को और जटिल बना दिया है।
Interaction with Electors by EROs during distribution of Enumeration Form in West Bengal #SIR #ECI #Elections pic.twitter.com/A0v25YtXlY
— Election Commission of India (@ECISVEEP) November 14, 2025
रणनीति और उदाहरण:
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TMC की रणनीति
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ममता बनर्जी लगातार विकास के अपने मॉडल और सामाजिक कल्याण योजनाओं को हाइलाइट कर रही हैं।
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वह अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत रखने की कोशिश कर रही हैं, ताकि विपक्षी ध्रुवीकरण को तोड़ा जा सके।
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वह मतदान सूची में सुधार की प्रक्रिया को लोकतंत्र की मजबूती के रूप में प्रस्तुत कर सकती हैं।
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BJP की रणनीति
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भाजपा विकास-मुद्दे (इन्फ्रा, रोज़गार) और सिक्योरिटी (महिलाओं की सुरक्षा) को प्रमोट कर रही है।
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पार्टी सांस्कृतिक एकता और हिंदू पहचान को चुनावी हथियार बना रही है।
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साथ ही, भाजपा द्वारा केंद्रीय परियोजनाओं (जैसे 5,400 करोड़ की योजनाएं) को जनता के पास दिखाकर यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि वे सत्ता में आने पर विकास तेजी से लाएंगे।
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Sanjukta Morcha की रणनीति
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बदलते चुनावी माहौल में, वाम-कांग्रेस गठबंधन सेक्युलर और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में खुद को पेश कर रहा है।
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वे TMC और BJP दोनों के खिलाफ “तीसरा रास्ता” बनने की कोशिश कर सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ दोनों पार्टियों के बीच वोट विभाजन है।
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उनका काम चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें सीमित संसाधन और वोट-बेस के साथ मुकाबला करना है, लेकिन गठबंधन उन्हें बेहतर स्थिति दे सकता है।
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संभावित परिणाम और चुनौती:
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TMC की चौथी जीत?
यदि TMC सफल रही, तो ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बन सकती हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उनकी पार्टी मजबूत जनाधार बनाए रखने में सक्षम है। -
BJP की बड़ी छलांग?
भाजपा अगर विकास और सुरक्षा पर अपने संदेश को प्रभावी तरीके से पेश कर पाए, तो वह कुछ अतिरिक्त सीटें हासिल कर सकती है। लेकिन पूर्ण सत्ता के लिए उसे 148 सीटों की अधिकतम जरूरत होगी, जो एक बड़ी चुनौती है। -
तीसरे मोर्चे की भूमिका
Sanjukta Morcha अगर पर्याप्त सीटें जीत लेती है, तो वह बैलेंस-शिफ्टर साबित हो सकती है। हालांकि, यह तभी संभव होगा जब वे रणनीतिक रूप से उन निर्वाचन क्षेत्रों पर ध्यान दें जहाँ TMC और BJP दोनों कमजोर हैं। -
चुनावी निष्पक्षता
मतदाता सूची में ग़लतियाँ, नामांकन खारिजी और मतदान की पारदर्शिता जैसे मुद्दे चुनाव में तनाव बढ़ा सकते हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) इस समस्या को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। -
संभावित हिंसा
पश्चिम बंगाल में चुनाव के समय राजनीतिक हिंसा का इतिहास रहा है, और 2026 में भी यह एक जोखिम बना हुआ है।
शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रशासन, चुनाव आयोग और पार्टियों को मिलकर काम करना होगा।
पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव में दर्शनीय राजनीतिक लड़ाई होने की पूरी संभावना है। TMC अपनी सामाजिक कल्याण योजनाओं और जनाधार के बल पर बढ़त बनाए रखना चाहती है, जबकि BJP विकास-मुद्दों और सुरक्षा एजेंडा के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, Sanjukta Morcha सेक्युलर और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का लक्ष्य रखता है।
यह चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारों की लड़ाई भी है – किस प्रकार की बंगाल का विकास होगा, सामाजिक न्याय कैसे बनेगा, और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की मजबूती कैसे सुनिश्चित की जाएगी। चुनाव की दिशा को न सिर्फ पार्टियों की रणनीति, बल्कि मतदाता की जागरूकता, मतदान की पारदर्शिता और शांतिपूर्ण प्रक्रिया तय करेगी।
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