Stray Dogs Supreme Court Order: दिल्ली और एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से चर्चा और विवाद का विषय रही है। कहीं लोगों पर हमले की घटनाएँ सामने आती हैं, तो कहीं पशु प्रेमी इनके अधिकार और देखभाल की बात करते हैं। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और सख्त आदेश देकर साफ कर दिया है कि अब इस मुद्दे को अनदेखा नहीं किया जाएगा। अदालत ने 8 हफ्तों के भीतर 5,000 क्षमता वाले कुत्ता शेल्टर बनाने का आदेश दिया है और यह भी कहा है कि इन कुत्तों को अब दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा।
नया बेंच करेगा सुनवाई | Stray Dogs Supreme Court Order

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पहले सुन रहे बेंच से हटाकर एक नई तीन-जजों की विशेष पीठ को सौंप दिया। इस बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल होंगे। यह बेंच कल इस मामले की सुनवाई करेगी और इसमें चार अलग-अलग याचिकाएँ शामिल हैं – एक स्वतः संज्ञान लिया गया मामला, 2024 की एक याचिका और दो अन्य जनहित याचिकाएँ।
आदेश: 8 हफ्तों में 5,000 क्षमता के शेल्टर
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार, नगर निगम दिल्ली (MCD), नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC), और नोएडा, गाज़ियाबाद, गुरुग्राम व फरीदाबाद की संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिया है कि अगले 6 से 8 हफ्तों में ऐसे डॉग शेल्टर बनाएं, जिनमें कुल 5,000 कुत्तों को रखने की क्षमता हो। अदालत ने इसे एक “प्रगतिशील अभ्यास” बताया और कहा कि भविष्य में इनकी क्षमता को और बढ़ाना होगा।
इन शेल्टरों में कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण, डीवॉर्मिंग और चिकित्सा देखभाल के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद होना चाहिए। साथ ही, सीसीटीवी कैमरों से इन शेल्टरों की निगरानी होगी, ताकि कोई भी कुत्ता बाहर न छोड़ा जा सके या अवैध रूप से न निकाला जा सके।
मानवीय दृष्टिकोण: कुत्तों की भलाई सर्वोपरि
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कुत्तों के पुनर्वास में उनकी भलाई का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में कुत्तों को क्रूरता, भूख या दुर्व्यवहार का शिकार नहीं होना चाहिए। शेल्टर में भीड़भाड़ नहीं होनी चाहिए और हर समय कम से कम दो जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद हों, जिनकी ड्यूटी शेड्यूल तय हो।
कमजोर और बीमार कुत्तों को अलग से रखने का निर्देश भी दिया गया है। इसके अलावा, समय पर पशु चिकित्सक द्वारा इलाज की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
गोद लेने की योजना: लेकिन सड़कों पर वापसी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित संस्थाओं को यह भी अनुमति दी है कि वे इन शेल्टरों में रखे कुत्तों के लिए गोद लेने की योजना लागू करने पर विचार कर सकते हैं, बशर्ते यह योजना 2022 में जारी स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल फॉर एडॉप्शन ऑफ कम्युनिटी एनिमल्स के अनुरूप हो।
लेकिन अदालत ने चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में गोद लेने के बाद कुत्ते को दोबारा सड़क पर नहीं छोड़ा जाएगा। अगर ऐसा पाया गया, तो जिम्मेदार अधिकारी और व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
क्यों उठा यह मुद्दा?
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली और एनसीआर में आवारा कुत्तों के हमलों के कई मामले सामने आए हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की घटनाओं ने लोगों में डर और गुस्सा दोनों पैदा किया है। वहीं, कई एनजीओ और पशु अधिकार कार्यकर्ता मानते हैं कि समस्या का समाधान कुत्तों को मारना या सड़कों से हटाना नहीं है, बल्कि उनकी नसबंदी, टीकाकरण और सही देखभाल है।
2024 और 2025 की शुरुआत में सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गर्माया रहा, जब विभिन्न इलाकों में कुत्तों को पकड़ने और हटाने की कार्रवाई पर विवाद हुआ। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश एक संतुलित लेकिन सख्त कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
पशु अधिकार कार्यकर्ता कह रहे हैं कि यह आदेश यदि सही ढंग से लागू हुआ तो यह न केवल इंसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि कुत्तों के जीवन की गुणवत्ता भी सुधार देगा। दूसरी ओर, कुछ शहरी योजनाकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में शेल्टर बनाना और उनका संचालन करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी, खासकर इतने कम समय में।
आगे की राह
अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि क्या सरकारें और स्थानीय निकाय तय समय में शेल्टर निर्माण का कार्य पूरा कर पाती हैं या नहीं। अदालत ने साफ कहा है कि कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है। लेकिन यह तभी संभव होगा, जब इसे राजनीतिक या प्रशासनिक टालमटोल से दूर रखकर पूरी गंभीरता से अमल में लाया जाए।
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