Saraswati Mata Ki Aarti: हिंदू धर्म में माँ सरस्वती को ज्ञान, विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और वाणी की देवी माना जाता है। वे ब्रह्मा जी की शक्ति हैं और सृष्टि में चेतना व विवेक का संचार करती हैं। जब अज्ञान का अंधकार बढ़ता है, तब माँ सरस्वती का प्रकाश मनुष्य को सही दिशा दिखाता है। उनकी आराधना का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है – सरस्वती माता की आरती।
सरस्वती माता की आरती केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और बुद्धि को जाग्रत करने का साधन है।

माँ सरस्वती का स्वरूप और महत्व:
माँ सरस्वती का वर्ण श्वेत है, जो पवित्रता, शांति और सात्त्विकता का प्रतीक है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और कमल या हंस पर विराजमान रहती हैं। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें वीणा, पुस्तक, माला और कमंडल सुशोभित रहते हैं।
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वीणा कला और संगीत की प्रतीक है
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पुस्तक ज्ञान का संकेत देती है
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माला साधना और एकाग्रता का प्रतीक है
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कमंडल वैराग्य और संयम को दर्शाता है
विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और लेखकों के लिए माँ सरस्वती की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
सरस्वती माता की आरती का धार्मिक महत्व:
आरती का अर्थ है – ईश्वर के दिव्य स्वरूप की स्तुति और प्रकाश से अंधकार का नाश। जब हम सरस्वती माता की आरती करते हैं, तब हम उनसे यह प्रार्थना करते हैं कि वे हमारे जीवन से अज्ञान, भ्रम और नकारात्मक विचारों को दूर करें।
नियमित रूप से आरती करने से:
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बुद्धि तेज होती है
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एकाग्रता बढ़ती है
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वाणी में मधुरता आती है
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पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलती है
सरस्वती माता की आरती (पूर्ण पाठ):
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
चन्द्रवदनी पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
बायें कर में वीणा, दायें कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गले मोतियन माला॥
देवि शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह और अज्ञान तिमिर का, जग से नाश करो॥
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥
आरती करने की सही विधि:
सरस्वती माता की आरती प्रातःकाल या संध्या समय करना उत्तम माना जाता है, विशेषकर बसंत पंचमी के दिन।
आरती विधि:
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स्वच्छ वस्त्र धारण करें, बेहतर हो तो श्वेत रंग
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माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
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दीपक, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें
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पहले सरस्वती वंदना या मंत्र जप करें
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अंत में श्रद्धा से आरती गाएँ
आरती के बाद बच्चों की पुस्तकों और कलम को माँ के चरणों में रखने की परंपरा भी है।
विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व:
विद्यार्थियों के जीवन में सरस्वती माता की आरती का विशेष स्थान है। परीक्षा के समय, पढ़ाई में मन न लगने पर या आत्मविश्वास की कमी होने पर आरती करने से मानसिक शांति मिलती है। यह केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है।
सरस्वती माता की आरती हमें यह सिखाती है कि सच्चा ज्ञान विनम्रता से आता है। यह आरती न केवल शब्दों का समूह है, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा है जो हमारे जीवन को सकारात्मक दिशा देती है। यदि इसे श्रद्धा और नियमितता से किया जाए, तो माँ सरस्वती की कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होती है।
ज्ञान, विवेक और सृजनशीलता के पथ पर आगे बढ़ने के लिए
“जय माँ सरस्वती” 🌼
माँ सरस्वती की आरती केवल पूजा का एक अंग नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मविकास का माध्यम भी है। जब भक्त पूर्ण श्रद्धा से आरती गाता है, तो मन की चंचलता धीरे-धीरे शांत होने लगती है और विचारों में स्पष्टता आती है। आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धी जीवन में, जहाँ ज्ञान के साथ-साथ विवेक की भी अत्यधिक आवश्यकता है, वहाँ सरस्वती माता की आरती मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध होती है। यह आरती हमें सिखाती है कि सच्ची विद्या वही है जो अहंकार को नहीं, बल्कि विनम्रता और करुणा को बढ़ाए। नियमित रूप से आरती करने से न केवल विद्या की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच भी विकसित होती है।
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