Saphala Ekadashi 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और व्रत पारण समय

Saphala Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में सफला एकादशी का स्थान अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष में आती है और भगवान विष्णु को समर्पित होती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और कथा सुनने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा जीवन में सफलता, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। इसी कारण इस एकादशी को “सफला” कहा गया है।

Saphala Ekadashi 2025:

सफला एकादशी का धार्मिक महत्व:

शास्त्रों के अनुसार सफला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को जीवन में किए गए जाने-अनजाने पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है, जो जीवन में संघर्ष, असफलता या मानसिक अशांति से गुजर रहे हों। भगवान विष्णु की कृपा से उनके कार्य सफल होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

ऐसा भी कहा जाता है कि जो व्यक्ति पूरे श्रद्धा भाव से सफला एकादशी का व्रत करता है, उसे हजारों यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत केवल भौतिक सफलता ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

सफला एकादशी व्रत कथा:

प्राचीन काल की बात है, चंपावती नगरी में महिष्मान नामक एक प्रतापी राजा राज्य करता था। उसके चार पुत्र थे। सबसे बड़ा पुत्र लुम्पक अत्यंत दुष्ट, क्रूर और पापी स्वभाव का था। वह जुआ खेलता, चोरी करता और निर्दोष लोगों को सताया करता था। उसके दुर्व्यवहार से दुखी होकर राजा महिष्मान ने उसे राज्य से निकाल दिया।

राज्य से निकाले जाने के बाद लुम्पक जंगल में रहने लगा। भूख और कष्ट से परेशान होकर वह जंगल के जानवरों को मारकर जीवन यापन करने लगा। एक दिन शिकार न मिलने के कारण वह अत्यंत दुखी और कमजोर हो गया। संयोगवश वह एक पीपल के वृक्ष के नीचे जाकर बैठ गया। उसी दिन पौष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी, अर्थात सफला एकादशी थी।

भूख और थकान के कारण लुम्पक उस दिन कुछ भी खा न सका और पूरी रात जागता रहा। अनजाने में ही उसका एकादशी का व्रत हो गया। अगले दिन द्वादशी के दिन उसने कुछ फल खाकर उपवास तोड़ा।

भगवान विष्णु की कृपा से इस अनजाने व्रत का प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि उसके सभी पाप नष्ट हो गए। कुछ समय बाद राजा महिष्मान ने अपने पुत्र को ढूंढ लिया और उसके बदले हुए स्वभाव को देखकर उसे वापस राज्य में स्थान दिया। आगे चलकर लुम्पक एक धर्मात्मा और न्यायप्रिय राजा बना और अपने जीवन में अपार सफलता प्राप्त की।

इस प्रकार यह एकादशी यह संदेश देती है कि अनजाने में किया गया व्रत भी यदि श्रद्धा से जुड़ जाए, तो जीवन को सफल बना सकता है

सफला एकादशी व्रत विधि:

सफला एकादशी का व्रत अत्यंत सरल और सात्विक माना गया है।

  • एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाएं

  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें

  • दिन भर उपवास रखें, फलाहार या निर्जल व्रत भी कर सकते हैं

  • रात्रि में जागरण कर विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ करें

  • द्वादशी के दिन व्रत खोलें और जरूरतमंदों को दान दें

सफला एकादशी का आध्यात्मिक संदेश:

सफला एकादशी केवल व्रत नहीं बल्कि आत्मचिंतन का दिन है। यह हमें सिखाती है कि कोई भी व्यक्ति कितना ही पापी क्यों न हो, यदि वह सच्चे मन से भगवान की शरण में आ जाए, तो उसका जीवन बदल सकता है। यह एकादशी असफलता को सफलता में बदलने की प्रेरणा देती है।

व्रत से मिलने वाले लाभ:

  • जीवन में रुके हुए कार्यों में सफलता

  • पापों से मुक्ति और मन की शांति

  • आर्थिक, पारिवारिक और मानसिक समस्याओं से राहत

  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा

  • मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग

सफला एकादशी पूजा विधि (Step-by-Step):

सफला एकादशी का व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

1. प्रातःकाल की तैयारी

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें

  • स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें

  • घर के मंदिर की साफ-सफाई करें

2. संकल्प लें
हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर यह संकल्प करें:

“मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार सफला एकादशी व्रत कर रहा/रही हूँ। हे भगवान विष्णु, मेरी पूजा स्वीकार करें और जीवन को सफल बनाएं।”

3. भगवान विष्णु की पूजा

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

  • दीपक, धूप, पुष्प, तुलसी दल अर्पित करें

  • फल, मिष्ठान या पंचामृत का भोग लगाएं

  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें

4. एकादशी कथा का पाठ
सफला एकादशी की व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। इससे व्रत पूर्ण फलदायी होता है।

5. रात्रि जागरण

  • रात में भजन, कीर्तन या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें

  • जागरण करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है

सफला एकादशी व्रत के नियम:

  • इस दिन चावल और अन्न का सेवन वर्जित होता है

  • फलाहार, दूध या निर्जल व्रत किया जा सकता है

  • क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें

  • ब्रह्मचर्य का पालन करें

  • मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें

भगवान विष्णु की आरती:

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे,
दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का॥

(पूरी आरती आप पूजा के अंत में श्रद्धा से गा सकते हैं)

सफला एकादशी व्रत पारण नियम:

व्रत पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है।

पारण के समय ध्यान रखें:

  • सूर्योदय के बाद ही व्रत खोलें

  • पहले भगवान विष्णु को भोग अर्पित करें

  • फिर तुलसी जल या फल से व्रत खोलें

  • ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देना शुभ माना जाता है

❗ ध्यान दें: द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण अवश्य कर लें।

सफला एकादशी व्रत का फल:

  • जीवन की असफलताओं से मुक्ति

  • रुके हुए कार्यों में सफलता

  • पापों का नाश

  • मानसिक शांति और सकारात्मकता

  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा

सफला एकादशी 2025 – तारीख और समय

📌 एकादशी तिथि आरंभ:
14 दिसंबर 2025 शाम 6:49–6:50 बजे से शुरू होगी।

📌 एकादशी तिथि समाप्त:
15 दिसंबर 2025 रात 9:19–9:21 बजे तक रहेगी।

➡️ चूंकि उदय तिथि (जागरण तिथि) का नियम के अनुसार एकादशी उसी दिन मानी जाती है जब सुबह तिथि जारी रहे —
इसलिए सफला एकादशी व्रत 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) को रखा जाएगा।

शुभ मुहूर्त (पूजा और व्रत के लिए)

🔹 ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:17/05:22 बजे से 06:12/06:17 बजे तक — यह समय स्नान और प्रारंभिक पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

🔹 अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:43 बजे तक — पूजा-पाठ, मंत्र जाप व ध्यान के लिए उत्तम समय।

🔹 अन्य शुभ पूजा समय:
• सुबह 07:04 – 08:24 बजे
• सुबह 09:43 – 11:02 बजे
• दोपहर 01:41 – 03:00 बजे
• शाम 04:20 – 05:39 बजे
ये समय विशेष रूप से पूजा-आराधना के लिए शुभ माने जाते हैं।

व्रत पारण (Ekadashi Vrat Toḍna) का शुभ समय:

📌 पराण (व्रत तोड़ने) का दिन: 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार)
📌 शुभ समय: सुबह 07:07 बजे से 09:11 बजे तक

💡 ध्यान दें कि पारण सिर्फ द्वादशी तिथि में ही किया जाता है – तिथि समाप्त होने से पहले इसे कर लेना श्रेष्ठ माना जाता है।

सफला एकादशी वास्तव में नाम के अनुरूप जीवन को सफल बनाने वाली एकादशी है। श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में चमत्कारी परिवर्तन ला सकता है। यह व्रत हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति से हर असफलता को सफलता में बदला जा सकता है।

सफला एकादशी व्रत कथा हमें यह सिखाती है कि भक्ति, संयम और श्रद्धा से किया गया छोटा-सा प्रयास भी जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। यह व्रत न केवल सांसारिक सफलता प्रदान करता है, बल्कि आत्मा को शुद्ध कर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है। इसलिए प्रत्येक श्रद्धालु को इस पावन एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करनी चाहिए।

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