President Address to Nation: भारत 15 अगस्त 2025 को अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देशभर में तिरंगे की शान और आज़ादी के जश्न की गूंज है। इस विशेष अवसर की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम अपना भावपूर्ण और प्रेरणादायक संबोधन दिया। उनका भाषण केवल अतीत की गौरवगाथा ही नहीं था, बल्कि वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर भी एक स्पष्ट दृष्टि पेश करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति के इस संदेश की सराहना करते हुए कहा कि इसमें देशवासियों को राष्ट्र-निर्माण में बढ़-चढ़कर भाग लेने की प्रेरणा मिली है।
आजादी का गौरव और संघर्ष की यादें | President Address to Nation
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ की। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त का दिन केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित वह क्षण है जब भारत ने औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों को तोड़ आज़ादी की सांस ली।
उन्होंने याद दिलाया कि यह आज़ादी हमें आसानी से नहीं मिली। अनेक पीढ़ियों ने अपना जीवन बलिदान किया, कठिनाइयों का सामना किया और कभी हार नहीं मानी। यह संघर्ष निराशा का नहीं, बल्कि दृढ़ आशा का प्रतीक था। उसी आशा ने आज़ाद भारत की प्रगति को ऊर्जा दी है।
लोकतंत्र की अनूठी मिसाल
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आज़ादी के बाद भारत ने जिस लोकतांत्रिक रास्ते को चुना, वह दुनिया के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने गर्व से कहा कि हमारे देश ने शुरुआत से ही सभी वयस्क नागरिकों को समान मताधिकार दिया, जबकि उस समय कई लोकतांत्रिक देशों में भी जाति, धर्म, लिंग या अन्य आधारों पर मताधिकार सीमित था।
भारत भूमि को उन्होंने “लोकतंत्र की जननी” बताया। हमारे संविधान की बुनियाद पर खड़ा यह लोकतंत्र हमारे प्राचीन गणराज्यों की विरासत का आधुनिक स्वरूप है।
भारतीय लोकतंत्र के चार स्तंभ
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने वाले चार प्रमुख मूल्यों की चर्चा की—
न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता।
ये मूल्य केवल संवैधानिक शब्द नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति के मूल सिद्धांत हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इन्हें पुनर्जीवित किया गया और आज ये देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं।
विभाजन की पीड़ा और स्मृति
राष्ट्रपति ने यह भी याद दिलाया कि स्वतंत्रता के साथ देश ने विभाजन का दर्द भी झेला। लाखों लोगों को विस्थापन और हिंसा का सामना करना पड़ा। उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें इतिहास की गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए, ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार
2025 का वर्ष भारत के लिए चुनौतियों से भरा रहा। कश्मीर में छुट्टियों पर गए निर्दोष नागरिकों की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि इस कायरतापूर्ण और अमानवीय हमले का जवाब भारत ने दृढ़ संकल्प और रणनीतिक स्पष्टता के साथ दिया।
“ऑपरेशन सिंदूर” के जरिए हमारे सशस्त्र बलों ने सीमा पार आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया। यह अभियान न केवल भारत की सैन्य क्षमता का प्रमाण है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ मानवता की लड़ाई में एक ऐतिहासिक उदाहरण भी है।

एकता की ताकत
राष्ट्रपति ने इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात के रूप में देश की एकजुटता को बताया। विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने एक स्वर में भारत की स्थिति को दुनिया के सामने रखा। यह संदेश गया कि भारत आक्रामक नहीं होगा, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र की ऐतिहासिकउपलब्धियां
ऑपरेशन सिंदूर ने “आत्मनिर्भर भारत” मिशन की क्षमता को भी साबित किया। राष्ट्रपति ने गर्व से कहा कि हमारे स्वदेशी रक्षा उत्पादन ने ऐसा स्तर हासिल कर लिया है कि हम अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करने में सक्षम हैं। यह आज़ादी के बाद भारत के रक्षा इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया
पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा,
“स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने संबोधन में बहुत ही महत्वपूर्ण बातें कही हैं। इसमें उन्होंने सामूहिक प्रयासों से भारत की प्रगति और भविष्य के अवसरों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला है। राष्ट्रपति जी ने हमें उन बलिदानों की याद दिलाई, जिनसे देश की आजादी का सपना साकार हुआ। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से राष्ट्र-निर्माण में बढ़-चढ़कर भागीदारी का आग्रह भी किया है।”
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने संबोधन में बहुत ही महत्वपूर्ण बातें कही हैं। इसमें उन्होंने सामूहिक प्रयासों से भारत की प्रगति और भविष्य के अवसरों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला है। राष्ट्रपति जी ने हमें उन बलिदानों की याद दिलाई, जिनसे देश की आजादी का…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 14, 2025
आज का भारत: चुनौतियां और अवसर
राष्ट्रपति के भाषण ने यह स्पष्ट किया कि आज भारत केवल अपनी स्वतंत्रता का जश्न नहीं मना रहा, बल्कि एक मजबूत, आत्मनिर्भर और सुरक्षित भविष्य की ओर भी बढ़ रहा है। वैश्विक मंच पर भारत की छवि पहले से अधिक सशक्त हो रही है।
तकनीक, रक्षा, विज्ञान, शिक्षा और अर्थव्यवस्था में तेजी से प्रगति हो रही है। लेकिन साथ ही हमें आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता और सामाजिक समरसता जैसी चुनौतियों का भी सामना करना है।
स्वतंत्रता दिवस का असली अर्थ
राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश यही था कि स्वतंत्रता केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि आंतरिक मजबूती और जिम्मेदारी का नाम है। न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के मूल्यों को अपनाकर ही हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भारत का निर्माण कर सकते हैं।
तिरंगे के नीचे एकजुट भारत
15 अगस्त की सुबह जब देशभर में तिरंगा लहराएगा, तो यह केवल एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि हमारे संघर्ष, बलिदान, गर्व और एकता का प्रतीक होगा। राष्ट्रपति का यह संबोधन हमें याद दिलाता है कि आज़ादी की रक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर दिया गया संबोधन आने वाले वर्षों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। इसमें इतिहास का सम्मान, वर्तमान की चुनौतियों का सामना और भविष्य के लिए संकल्प—तीनों का संगम है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया ने भी यह संदेश मजबूत किया कि जब देश एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं होती।
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