Paush Amavasya 2025 Kab Hai: 18 या 19 दिसंबर? इस दिन करें ये चमत्कारी उपाय, खुल जाएंगे किस्मत के दरवाजे

Paush Amavasya 2025 Kab Hai: हिंदू पंचांग में अमावस्या का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, लेकिन पौष मास की अमावस्या को साल की आखिरी अमावस्या होने के कारण अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन पितरों का स्मरण, तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। माना जाता है कि पौष अमावस्या पर किए गए दान, स्नान और उपाय कई गुना फल देते हैं।

पौष अमावस्या का संबंध भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और पितरों से जुड़ा होता है। यही कारण है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्य न केवल सांसारिक कष्टों को दूर करते हैं, बल्कि आत्मिक शांति भी प्रदान करते हैं।

पौष अमावस्या 2025 कब है: 18 या 19 दिसंबर | Paush Amavasya 2025 Kab Hai

Paush Amavasya 2025 Kab Hai

पौष अमावस्या 2025 को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह 18 दिसंबर को है या 19 दिसंबर को। पंचांग के अनुसार, पौष कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 19 दिसंबर 2025 को पड़ रही है। इसी दिन स्नान-दान, श्राद्ध, तर्पण और पितृ पूजन करना श्रेष्ठ माना जाएगा।

हालांकि कुछ स्थानों पर तिथि के आरंभ और समाप्ति के कारण भ्रम की स्थिति बनती है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से पौष अमावस्या का मुख्य व्रत और उपाय 19 दिसंबर को ही किए जाने चाहिए।

पौष अमावस्या पर स्नान और दान का महत्व

पौष अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने से पापों का नाश होता है। अगर गंगा स्नान संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर घर पर ही स्नान किया जा सकता है।

स्नान के बाद दान करना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य कर्म माना गया है। अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, कंबल और जरूरतमंदों को भोजन कराने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती।

पौष अमावस्या पर पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण

Paush Amavasya

पौष अमावस्या पितरों को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।

इस दिन दूध और चावल से बनी खीर तैयार कर गोबर के उपले या कंडे की कोर जलाकर पितरों के निमित्त भोग लगाया जाता है। भोग लगाने के बाद थोड़ा-सा जल दाहिनी ओर छोड़ना चाहिए। यदि खीर बनाना संभव न हो तो घर में बने शुद्ध और ताजे भोजन से भी पितरों को भोग लगाया जा सकता है।

इसके बाद एक लोटे में जल भरकर उसमें गंगाजल, थोड़ा दूध, चावल के दाने और तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करना चाहिए। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं।

पौष अमावस्या के उपाय जो बदल सकते हैं किस्मत

पौष अमावस्या पर किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन की दिशा बदल सकते हैं। यह उपाय न केवल आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हैं, बल्कि मानसिक और पारिवारिक सुख भी प्रदान करते हैं।

तरक्की के रास्ते खोलने के लिए इस दिन तुलसी की जड़ से थोड़ी मिट्टी लेकर उसमें जल मिलाकर लेप बनाना चाहिए। इस लेप को शरीर पर लगाकर कुछ समय बाद स्नान करें और स्नान के पश्चात भगवान विष्णु को प्रणाम करें। ऐसा करने से कार्यक्षेत्र में उन्नति के योग बनते हैं।

शत्रुओं के भय से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु के बारह नामों का स्मरण करते हुए उन्हें पीले फूल अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना गया है। शाम के समय इन फूलों को बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए या पीपल के पेड़ के नीचे रखना चाहिए।

समाज में मान-सम्मान बढ़ाने का उपाय

यदि आप चाहते हैं कि आपके परिवार का समाज में मान-सम्मान बना रहे, तो पौष अमावस्या के दिन किसी कन्या या जरूरतमंद विवाहित महिला को पीले वस्त्र दान करें। दान के बाद उनका आशीर्वाद अवश्य लें। यह उपाय भगवान विष्णु की पूजा के बाद किसी भी समय किया जा सकता है।

श्रीमद्भागवत गीता से जुड़ा विशेष उपाय

पौष अमावस्या पर श्रीमद्भागवत गीता का विशेष महत्व बताया गया है। यदि आपके घर में गीता है, तो मंदिर में लाल कपड़ा बिछाकर उस पर गीता स्थापित करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का 11 बार जाप करते हुए गीता का स्पर्श कर आंखों से लगाएं। ऐसा करने से जीवन में आने वाली बड़ी से बड़ी विपत्ति भी दूर हो जाती है।

यदि गीता उपलब्ध न हो, तो एक कोरे कागज पर लाल रंग से “श्रीमद्भागवत गीता” लिखकर नीचे मंत्र लिखें और उसी विधि से पूजा करें। अगले दिन उस कागज और लाल कपड़े को संभालकर रख लें।

अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए उपाय

पौष अमावस्या पर अच्छे स्वास्थ्य की कामना से आटे को भूनकर उसमें शक्कर मिलाकर हवन करना शुभ माना जाता है। हवन से पहले संकल्प लें और फिर विधिपूर्वक हवन करें। इसके बाद छोटी कन्याओं को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी होता है।

यदि हवन संभव न हो, तो आटे की रोटी का चूरमा बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाएं और बाद में उसे कन्याओं में बांट दें।

धन-समृद्धि के लिए लक्ष्मी-विष्णु पूजा

धन की तिजोरी भरने के लिए पौष अमावस्या पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करना विशेष फल देता है। पूजा के समय 11 अक्षत लेकर माता लक्ष्मी को अर्पित करें और मंत्र जाप करें। पूजा के बाद इन अक्षतों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। ऐसा करने से धन में निरंतर वृद्धि होती है।

नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव

यदि आप चाहते हैं कि आपकी तरक्की पर किसी की नजर न लगे, तो पौष अमावस्या के दिन गाय को नमक वाली कोई चीज खिलाएं। यह उपाय आपकी सफलता को सुरक्षित रखता है।

घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने के लिए सुबह के समय हल्दी में पानी मिलाकर घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

पौष अमावस्या पर नारियल का उपाय

जीवन में खुशियों का विस्तार करने के लिए एक कच्चा नारियल लेकर उस पर स्वास्तिक बनाएं और भगवान विष्णु को अर्पित करें। इसके बाद नारियल को तोड़कर परिवार के सभी सदस्यों में बांट दें। यह उपाय पारिवारिक सुख को बढ़ाता है।

पौष अमावस्या 2025 न केवल पितरों की कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति लाने का भी विशेष दिन है। यदि 19 दिसंबर को श्रद्धा और विश्वास के साथ स्नान-दान, तर्पण और बताए गए उपाय किए जाएं, तो निश्चित रूप से किस्मत के बंद दरवाजे खुल सकते हैं।

यह अमावस्या हमें अपने पूर्वजों को याद करने, उनका आशीर्वाद लेने और जीवन को सही दिशा देने का संदेश देती है। श्रद्धा से किया गया छोटा-सा उपाय भी बड़े बदलाव ला सकता है।

नोट: यह राशिफल सामान्य ज्योतिष दृष्टिकोण पर आधारित है और सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू नहीं हो सकता। इसे मार्गदर्शक मानें, निर्णय आपके विवेक पर निर्भर करें।

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