नवरात्रि व्रत विशेष: भारत में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का समय होता है। मां दुर्गा के नौ रूपों की साधना, भक्ति और व्रत-उपवास इस पर्व का मुख्य हिस्सा हैं। नवरात्रि का व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी बहुत लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने, आत्म-नियंत्रण बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का साधन है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि में उपवास को सही तरीके से कैसे करें और किन चीज़ों का सेवन करना उचित है।

नवरात्रि उपवास का महत्व:
नवरात्रि उपवास केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि एक अनुशासन है। इन दिनों में सात्विक आहार का पालन करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। उपवास करने से शरीर में जमा टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और मानसिक शांति भी मिलती है। इसे आत्मसंयम और आस्था का संगम कहा जा सकता है।
नवरात्रि में व्रत रखने के प्रकार:
हर व्यक्ति अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार उपवास रखता है। मुख्य रूप से व्रत रखने के कुछ प्रकार इस प्रकार हैं:
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निर्जला व्रत – जिसमें जल तक का सेवन नहीं किया जाता (अत्यंत कठिन)।
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फलाहार व्रत – केवल फल, दूध, जूस या सूखे मेवे ग्रहण किए जाते हैं।
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सात्विक आहार व्रत – इसमें व्रत के अनुकूल आहार जैसे सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, समा चावल, कुट्टू का आटा आदि खाया जाता है।
नवरात्रि उपवास में क्या खा सकते हैं:
फल और मेवे:
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सेब, केला, पपीता, अनार, अंगूर जैसे मौसमी फल।
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बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश, मूंगफली।
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नारियल पानी और ताज़े जूस।
अनाज के विकल्प:
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सामक चावल (व्रत का चावल) – इससे खिचड़ी, इडली या पुलाव बन सकते हैं।
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सिंघाड़े का आटा – पूड़ी, हलवा या पैनकेक बनाने में प्रयोग होता है।
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कुट्टू का आटा (Buckwheat) – इससे पूरी या पकौड़े बनाए जाते हैं।
अन्य खाद्य पदार्थ:
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साबूदाना – साबूदाना खिचड़ी, वड़ा या खीर।
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आलू और शकरकंद – उबालकर या सब्ज़ी बनाकर खा सकते हैं।
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दूध और दही – प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत।
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मखाना (Fox Nuts) – भुने हुए या दूध में पकाकर।
व्रत में किन चीज़ों से बचें:
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गेहूं का आटा, चावल, दालें और सामान्य अनाज।
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प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन।
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मांसाहार, शराब और सिगरेट।
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ज़्यादा तला-भुना और पैकेज्ड फूड।
उपवास के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:
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पानी खूब पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।
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भोजन कम मात्रा में और बार-बार लें।
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तैलीय और भारी भोजन से बचें ताकि पाचन तंत्र को आराम मिले।
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फलों और मेवों को भोजन का हिस्सा बनाएँ।
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यदि स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही व्रत करें।
नवरात्रि उपवास के स्वास्थ्य लाभ:
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डिटॉक्सिफिकेशन – शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।
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पाचन सुधार – हल्के भोजन से पाचन शक्ति मज़बूत होती है।
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वज़न नियंत्रण – सात्विक और संतुलित आहार से वज़न कम करने में मदद।
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मानसिक शांति – व्रत और पूजा से मन की अशांति दूर होती है।
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ऊर्जा में वृद्धि – फल और मेवों का सेवन ऊर्जा प्रदान करता है।
उपवास के बाद भोजन कैसे करें:
व्रत के बाद अचानक भारी और मसालेदार भोजन न करें। धीरे-धीरे सामान्य भोजन की ओर लौटें। शुरुआत फलों, खिचड़ी और हल्के आहार से करें ताकि पेट पर भार न पड़े।
नवरात्रि व्रत केवल धार्मिक आस्था का हिस्सा नहीं है बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य और जीवनशैली के लिए भी लाभकारी है। सही तरीके से उपवास रखने पर शरीर और मन दोनों को शुद्धि मिलती है। संतुलित सात्विक आहार, समय पर जल सेवन और संयमित जीवनशैली से नवरात्रि व्रत को सफल और सुखद बनाया जा सकता है।
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