Men and Heart Attacks: हार्ट अटैक आज दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। भारत में भी हर साल लाखों लोग इससे प्रभावित होते हैं। अक्सर यह सवाल उठता है कि पुरुषों को महिलाओं की तुलना में हार्ट अटैक ज़्यादा क्यों होता है? क्या इसके पीछे केवल जीवनशैली ज़िम्मेदार है या फिर जैविक (biological) कारण भी हैं? आइए इस विषय को विस्तार से समझते हैं।

1. हार्मोनल कारण: एस्ट्रोजन की सुरक्षा कवच:
महिलाओं के शरीर में पाया जाने वाला हार्मोन एस्ट्रोजन (Estrogen) दिल के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह:
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खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करता है
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अच्छी कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है
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धमनियों (arteries) को लचीला बनाए रखता है
पुरुषों में यह हार्मोन बहुत कम मात्रा में होता है। इसी कारण 40–55 साल की उम्र में पुरुषों को हार्ट अटैक का खतरा महिलाओं से कहीं ज़्यादा होता है। महिलाओं में यह खतरा मेनोपॉज़ (menopause) के बाद बढ़ता है, जब एस्ट्रोजन का स्तर गिरने लगता है।
2. गलत जीवनशैली: पुरुषों की सबसे बड़ी कमजोरी:
आंकड़े साफ़ बताते हैं कि पुरुषों में कुछ जोखिम भरी आदतें महिलाओं की तुलना में ज़्यादा पाई जाती हैं:
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🚬 धूम्रपान और तंबाकू का सेवन
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🍺 अधिक शराब पीना
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🍔 जंक फूड और अधिक वसा वाला खाना
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😴 कम नींद और अनियमित दिनचर्या
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🏃♂️ व्यायाम की कमी
ये सभी आदतें मिलकर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और मोटापे को बढ़ाती हैं, जो सीधे दिल की बीमारियों से जुड़ी हैं।
3. तनाव और गुस्सा: “मर्द को दर्द नहीं होता” वाली सोच:
पुरुषों में यह मानसिकता आम है कि वे अपनी भावनाओं को दबाकर रखें। ऑफिस का प्रेशर, आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ और सामाजिक अपेक्षाएँ उन्हें क्रॉनिक स्ट्रेस (chronic stress) में डाल देती हैं।
तनाव के समय शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ते हैं, जो:
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दिल की धड़कन तेज़ करते हैं
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ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं
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धमनियों में सूजन पैदा करते हैं
लंबे समय तक यह स्थिति हार्ट अटैक का रास्ता बना देती है।
4. पेट की चर्बी: साइलेंट किलर:
पुरुषों में फैट ज़्यादातर पेट (abdominal fat) में जमा होता है, जिसे विसरल फैट कहा जाता है। यह फैट:
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इंसुलिन रेज़िस्टेंस बढ़ाता है
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डायबिटीज़ का खतरा बढ़ाता है
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दिल की धमनियों में सूजन लाता है
यही कारण है कि “दुबले दिखने वाले” पुरुषों को भी हार्ट अटैक आ सकता है।
5. लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना: सबसे ख़तरनाक गलती
पुरुष अक्सर हार्ट अटैक के शुरुआती संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते। जैसे:
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सीने में हल्का दर्द या जलन
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बाएँ हाथ या जबड़े में दर्द
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अत्यधिक थकान
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पसीना आना
वे सोचते हैं, “गैस होगी” या “थकान है” – और डॉक्टर के पास जाने में देर कर देते हैं। यही देरी जानलेवा साबित होती है।
6. मेडिकल चेकअप से दूरी:
महिलाएँ नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने में पुरुषों से आगे होती हैं। जबकि पुरुष:
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तब तक डॉक्टर नहीं जाते जब तक हालत गंभीर न हो
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ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जाँच टालते रहते हैं
जब तक बीमारी पकड़ में आती है, तब तक दिल को काफ़ी नुकसान हो चुका होता है।
7. जेनेटिक कारण: परिवार का इतिहास:
अगर परिवार में पिता, दादा या भाई को कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ है, तो पुरुषों में इसका खतरा और बढ़ जाता है। यह जोखिम महिलाओं में भी होता है, लेकिन पुरुषों में यह जल्दी और ज़्यादा गंभीर रूप में सामने आता है।
8. पुरुषों में हार्ट अटैक कम उम्र में क्यों?
रिसर्च बताती है कि पुरुषों को हार्ट अटैक औसतन 7–10 साल पहले आता है। इसका कारण है:
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हार्मोनल सुरक्षा की कमी
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अधिक जोखिम भरी आदतें
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तनावपूर्ण जीवन
आजकल 30–40 की उम्र में हार्ट अटैक के केस बढ़ना इसी का परिणाम है।
खतरा ज़्यादा है, लेकिन रोका जा सकता है:
यह सच है कि पुरुषों में हार्ट अटैक का खतरा महिलाओं से ज़्यादा होता है, लेकिन यह नियति नहीं है। सही समय पर कदम उठाकर इसे रोका जा सकता है:
✔ क्या करें?
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रोज़ 30 मिनट व्यायाम
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धूम्रपान और शराब से दूरी
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तनाव प्रबंधन (योग, ध्यान)
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साल में एक बार हार्ट चेकअप
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संतुलित और देसी खाना
दिल मज़बूत होना मर्दानगी नहीं, दिल का ख़्याल रखना असली समझदारी है।
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