Kathua Cloud Burst: जम्मू और कश्मीर के कठुआ जिले में शनिवार रात और रविवार तड़के बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने पूरी घाटी में दहशत फैला दी। जॉध घाटी और जंगलोटे क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हुए, जहां अचानक आई बाढ़ और मलबे ने कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। अधिकारियों के अनुसार, जॉध घाटी में आए बादल फटने के कारण पांच लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हो गए। वहीं, जंगलोटे क्षेत्र में भूस्खलन के कारण दो लोगों की जान चली गई। यह घटना इस बात का संकेत है कि वर्षा और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहना कितना महत्वपूर्ण है।
घटना के समय रात का समय था, जिससे बचाव कार्यों में और कठिनाई आई। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए पुलिस, एसडीआरएफ और सेना की संयुक्त टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन टीमों को सक्रिय किया। अधिकारियों ने बताया कि जॉध घाटी में बाढ़ की वजह से सड़क संपर्क भी टूट गया था, जिससे बचाव कार्यों में प्रारंभिक कठिनाई आई। इसके बावजूद, बचाव दल ने तेजी से कार्रवाई करते हुए प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
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प्रभावित क्षेत्रों का भौगोलिक और सामाजिक परिदृश्य
जॉध घाटी और जंगलोटे क्षेत्र पहाड़ी इलाके में स्थित हैं, जहां भारी वर्षा होने पर भूस्खलन की संभावना अधिक रहती है। इन क्षेत्रों में बाढ़ और मलबा सिर्फ घरों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय बुनियादी ढांचे जैसे कि सड़क, पुल, और विद्युत आपूर्ति को भी नुकसान पहुंचाता है। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू–पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग के कुछ हिस्सों में भी नुकसान हुआ, जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। कई ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास अल्प संसाधन हैं, और अचानक आई आपदा ने उनकी सुरक्षा और जीवनयापन को गंभीर चुनौती दी।
स्थानीय लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय सिर्फ बचाव ही नहीं, बल्कि तुरंत राहत और पुनर्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
Kendriya vidyalaya school kathua affected by flood water & debris, due to #cloudburst. Engineering college & Jammu university campus can be seen in the background. #JammuAndKashmir @KVS_HQ https://t.co/UTkuK3Un6F pic.twitter.com/L7fCMMzORL
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प्रशासन और सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया | Kathua Cloud Burst

घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन सभी प्रभावित इलाकों में तैनात है और हरसंभव सहायता प्रदान कर रहा है। इसके अलावा, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नियमित संपर्क बनाए रखा।
अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि सरकार स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की मदद से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हर स्तर पर मदद के लिए तैयार है और इस आपदा में प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है। इस तरह की सक्रिय सरकारी प्रतिक्रिया प्रभावित लोगों के लिए राहत की भावना पैदा करती है और यह दिखाती है कि आपदा प्रबंधन में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है।
प्राकृतिक आपदा और भविष्य की तैयारियाँ

जम्मू और कश्मीर में प्राकृतिक आपदाओं का यह सिलसिला चिंताजनक है। पिछले सप्ताह किश्तवाड़ जिले में भी बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में कई लोगों की जान गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में मौसम परिवर्तन, भारी वर्षा और भूमि कटाव की प्रक्रिया लगातार तीव्र हो रही है। ऐसे में प्रशासन और नागरिकों को आपदा पूर्व चेतावनी, सुरक्षित आवास और आपातकालीन योजना को लागू करना अत्यंत आवश्यक है।
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भारी वर्षा की संभावना जताई है और लोगों से नदियों और नालों के पास जाने से बचने की अपील की है। प्रशासन ने भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि नदी और नालों के किनारे न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें। इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में जलस्तर पर नजर रखने और संभावित भूस्खलन या बाढ़ की स्थिति के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
मानवीय दृष्टिकोण और स्थानीय समुदाय की भूमिका
कठुआ में हुई इस आपदा ने स्थानीय समुदाय की मानवीय भावना और एकजुटता को भी उजागर किया। ग्रामीण लोग स्वयं ही प्रभावित इलाकों में मदद के लिए जुटे और मलबे में दबे लोगों को निकालने में प्रशासन के साथ सहयोग किया। आपदा के समय स्थानीय नागरिकों का योगदान जीवन रक्षक साबित होता है। यह दिखाता है कि प्राकृतिक आपदाओं का सामना केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
स्थानीय लोगों की कहानियां, जिन्होंने अपने पड़ोसियों को बचाया या अपने घरों को खोते हुए भी दूसरों की मदद की, मानवता की प्रेरणा बनती हैं। इस आपदा ने यह भी स्पष्ट किया कि जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, तो सामाजिक और मानवीय समर्थन का महत्व कितनी गहराई से महसूस किया जाता है।
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