Dum Aloo दम आलू : भारत की विविध रसोई में अगर किसी व्यंजन को सरल लेकिन शाही स्वाद का प्रतीक माना जाता है तो वह है दम आलू (Dum Aloo)। खासकर कश्मीरी दम आलू तो पूरी दुनिया में अपनी खास पहचान बना चुका है। यह व्यंजन न केवल मसालों की सुगंध से भरपूर है, बल्कि इसमें दही और पारंपरिक मसालों का ऐसा मेल है जो हर किसी के स्वाद को मोह लेता है।

Dum Aloo, दम आलू का इतिहास:
दम आलू का इतिहास कश्मीर की वादियों से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि 16वीं से 17वीं शताब्दी में जब मुग़ल सम्राट कश्मीर आए, तो उन्होंने वहां के भोजन में नई तकनीकें और मसाले जोड़े। “दम” तकनीक, जिसमें भोजन को धीमी आँच पर ढककर पकाया जाता है, फ़ारसी और मुग़ल रसोई से आई। इसी तकनीक से बना व्यंजन “दम आलू” धीरे-धीरे कश्मीर की पहचान बन गया।
कश्मीरी ब्राह्मण और मुस्लिम रसोई दोनों में यह डिश बेहद लोकप्रिय है। फर्क सिर्फ मसालों और प्याज-लहसुन के प्रयोग में देखने को मिलता है। ब्राह्मण शैली के दम आलू में लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं किया जाता, जबकि मुस्लिम शैली में इन्हें हल्के स्वाद के लिए शामिल किया जाता है।
दम आलू की विशेषता:
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छोटे आलू का उपयोग – इस व्यंजन में खासतौर पर छोटे आकार के आलू लिए जाते हैं, जिन्हें छीलकर हल्का तला जाता है।
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दही आधारित ग्रेवी – इसका मुख्य स्वाद दही और मसालों से आता है। इसमें टमाटर या प्याज की मात्रा बहुत कम होती है।
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कश्मीरी लाल मिर्च – दम आलू का लाल-लाल आकर्षक रंग कश्मीरी लाल मिर्च से आता है, जो ज्यादा तीखी नहीं होती।
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धीमी आँच पर पकना – “दम” तकनीक से ग्रेवी और मसाले आलू में अच्छे से समा जाते हैं, जिससे इसका स्वाद गहरा और लाजवाब हो जाता है।
कश्मीरी दम आलू बनाने की विधि:
सामग्री:
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छोटे आलू – 500 ग्राम
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दही – 1 कप
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सरसों का तेल – 4 बड़े चम्मच
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कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर – 2 चम्मच
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अदरक पाउडर (सौंठ) – 1 चम्मच
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सौंफ पाउडर – 1 बड़ा चम्मच
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इलायची पाउडर – ½ चम्मच
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लौंग – 3–4
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तेजपत्ता – 2
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हींग – एक चुटकी
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नमक – स्वाद अनुसार
बनाने की विधि:
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सबसे पहले छोटे आलू उबाल लें। फिर उन्हें छीलकर हल्का सा कांटे से छेद कर लें ताकि मसाले अच्छे से अंदर जा सकें।
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कढ़ाही में सरसों का तेल गर्म करें और आलुओं को हल्का सुनहरा तल लें।
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एक बाउल में दही को अच्छे से फेंटें और उसमें कश्मीरी लाल मिर्च, सौंठ पाउडर, सौंफ पाउडर और नमक मिलाएं।
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अब पैन में थोड़ा तेल डालें, उसमें हींग, लौंग और तेजपत्ता डालकर तड़का लगाएं।
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दही वाला मिश्रण डालें और धीमी आँच पर चलाते हुए पकाएं।
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अब इसमें तले हुए आलू डालें और धीमी आँच (दम) पर 20–25 मिनट तक पकने दें।
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आखिर में इलायची पाउडर डालकर ढक दें।
गरमा-गरम कश्मीरी दम आलू तैयार है। इसे आप कश्मीरी नान, चावल या रोटी के साथ परोस सकते हैं।
कश्मीरी संस्कृति और दम आलू:
दम आलू सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि कश्मीर की संस्कृति का हिस्सा है। इसे खास मौकों, त्योहारों और शादी-ब्याह में परोसा जाता है। कश्मीरी वज़वान भोज में यह एक मुख्य व्यंजन होता है। कश्मीर की ठंडी जलवायु में यह शरीर को ऊर्जा और गर्माहट देता है।
अन्य राज्यों में लोकप्रियता:
हालांकि दम आलू की असली पहचान कश्मीर से जुड़ी है, लेकिन आज इसके कई रूप देखने को मिलते हैं।
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बनारसी दम आलू – हल्का मीठा और मसालेदार स्वाद वाला।
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पंजाबी दम आलू – प्याज-टमाटर की ग्रेवी में पकाया जाता है।
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बंगाली आलूर दम – सरसों के तेल और मसालों के खास मिश्रण से तैयार।
इन विविधताओं के बावजूद कश्मीरी दम आलू अपनी मौलिकता और दही-मसाले वाली ग्रेवी के कारण सबसे अलग और खास है।
अंतर्राष्ट्रीय पहचान:
आज कश्मीरी दम आलू केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी परोसा जाता है। भारतीय रेस्टोरेंट्स में इसे खास कश्मीरी डिश के रूप में शामिल किया जाता है। विदेशी लोग इसके लाल-लाल रंग और दही वाली गाढ़ी ग्रेवी को बेहद पसंद करते हैं।
दम आलू कश्मीर का वह व्यंजन है जो साधारण आलू को शाही स्वाद में बदल देता है। इसमें दही, मसालों और धीमी आँच पर पकाने की तकनीक का जादू छिपा है। अगर आप असली कश्मीरी स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं तो एक बार घर पर दम आलू ज़रूर बनाइए। यह व्यंजन आपके भोजन को न केवल स्वादिष्ट बनाएगा बल्कि आपको कश्मीर की रसोई और संस्कृति से भी जोड़ देगा।
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