JEE Main 2026 Result: रॉ स्कोर से कैसे बनता है पर्सेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक? जानिए कब आएगा सेशन-1 रिजल्ट

JEE Main 2026 Result: जेईई मेन 2026 सेशन-1 की परीक्षा समाप्त हो चुकी है और अब लाखों छात्र-छात्राओं की नजरें रिजल्ट पर टिकी हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए द्वारा आंसर-की जारी किए जाने के बाद उम्मीदवारों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रिजल्ट कब आएगा और उनका रॉ स्कोर पर्सेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक में कैसे बदलेगा। कई छात्र यह भी सोच रहे हैं कि यदि सेशन-1 का स्कोर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो क्या उन्हें सेशन-2 में दोबारा परीक्षा देनी चाहिए।

एनटीए द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, जेईई मेन 2026 सेशन-1 का रिजल्ट 12 फरवरी को जारी किया जाएगा। अभ्यर्थी अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाकर चेक कर सकेंगे। लेकिन रिजल्ट आने से पहले ही छात्रों के मन में एक और जिज्ञासा है कि आखिर रॉ स्कोर से पर्सेंटाइल कैसे निकलता है और उसी के आधार पर रैंक कैसे तय होती है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

जेईई मेन 2026 सेशन-1 रिजल्ट का इंतजार

हर साल की तरह इस बार भी जेईई मेन परीक्षा कई दिन और अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित की गई। देशभर के लाखों छात्रों ने इसमें भाग लिया। परीक्षा खत्म होने के बाद आंसर-की जारी की गई और छात्रों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया। अब फाइनल आंसर-की के बाद रिजल्ट जारी होने की बारी है।

एनटीए के मुताबिक 12 फरवरी को सेशन-1 का रिजल्ट घोषित किया जाएगा। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर पाएंगे, जिसमें उनका रॉ स्कोर, विषयवार पर्सेंटाइल और कुल एनटीए स्कोर यानी पर्सेंटाइल दिया होगा। यही पर्सेंटाइल आगे चलकर ऑल इंडिया रैंक तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जेईई मेन में रॉ स्कोर क्या होता है

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि रॉ स्कोर क्या है। रॉ स्कोर वही वास्तविक अंक होते हैं जो आपने परीक्षा में प्राप्त किए हैं। जेईई मेन में प्रत्येक सही उत्तर के लिए चार अंक मिलते हैं और प्रत्येक गलत उत्तर पर एक अंक की नेगेटिव मार्किंग होती है। यदि किसी प्रश्न को छोड़ा गया है तो उस पर कोई अंक नहीं दिया जाता।

मान लीजिए आपने फिजिक्स में 70 अंक, केमिस्ट्री में 60 अंक और मैथ्स में 40 अंक प्राप्त किए। ऐसे में आपका कुल रॉ स्कोर 170/300 होगा। यह आपका वास्तविक प्रदर्शन है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि जेईई मेन में रैंक सीधे रॉ स्कोर के आधार पर नहीं बनती। यहीं से शुरू होता है नॉर्मलाइजेशन का प्रोसेस।

नॉर्मलाइजेशन क्यों जरूरी है

जेईई मेन की परीक्षा कई शिफ्ट में होती है। हर शिफ्ट का पेपर अलग होता है और उसका कठिनाई स्तर भी अलग-अलग हो सकता है। किसी शिफ्ट का पेपर अपेक्षाकृत आसान हो सकता है तो किसी का कठिन। यदि केवल रॉ स्कोर के आधार पर रैंक दी जाए तो यह उन छात्रों के साथ अन्याय होगा जिनकी शिफ्ट का पेपर कठिन था।

इसी समस्या को दूर करने के लिए एनटीए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाता है। इस प्रक्रिया के तहत हर शिफ्ट के प्रदर्शन को आपस में तुलनीय बनाया जाता है। यानी अलग-अलग शिफ्ट के छात्रों को समान स्तर पर लाकर पर्सेंटाइल स्कोर दिया जाता है।

पर्सेंटाइल क्या होता है और कैसे निकलता है

बहुत से छात्र पर्सेंटाइल को प्रतिशत समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग चीजें हैं। यदि आपका पर्सेंटाइल 95 है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपने 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इसका मतलब है कि आपने अपनी शिफ्ट के 95 प्रतिशत छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

पर्सेंटाइल का मतलब है आपकी शिफ्ट में आपसे कम या आपके बराबर स्कोर करने वाले छात्रों का प्रतिशत। इसे निकालने का फॉर्मूला इस प्रकार है कि आपकी शिफ्ट में आपके बराबर या कम स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या को उस शिफ्ट में कुल छात्रों की संख्या से भाग दिया जाता है और फिर उसे 100 से गुणा किया जाता है।

उदाहरण के लिए यदि आपकी शिफ्ट में कुल 1 लाख छात्र बैठे और उनमें से 95 हजार छात्रों का स्कोर आपसे कम या बराबर है, तो आपका पर्सेंटाइल 95 होगा। यानी आपने अपनी शिफ्ट के 95 प्रतिशत छात्रों को पीछे छोड़ दिया।

विषयवार पर्सेंटाइल और कुल पर्सेंटाइल

जेईई मेन के स्कोरकार्ड में केवल कुल पर्सेंटाइल ही नहीं, बल्कि फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के अलग-अलग पर्सेंटाइल भी दिए जाते हैं। यह विषयवार प्रदर्शन को दर्शाता है। लेकिन ऑल इंडिया रैंक मुख्य रूप से कुल एनटीए स्कोर यानी कुल पर्सेंटाइल के आधार पर तय की जाती है।

एनटीए हर शिफ्ट का अलग-अलग पर्सेंटाइल निकालता है। फिर सभी शिफ्ट के पर्सेंटाइल को मिलाकर एक कॉमन मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। इसी से आगे चलकर ऑल इंडिया रैंक बनती है।

जेईई मेन में ऑल इंडिया रैंक कैसे बनती है

जेईई मेन में रैंक निकालने की प्रक्रिया सीधे-साधे अंकों पर आधारित नहीं होती। यह पूरी तरह पर्सेंटाइल स्कोर पर निर्भर करती है। यदि किसी छात्र ने दोनों सेशन यानी सेशन-1 और सेशन-2 में परीक्षा दी है, तो एनटीए दोनों में से बेहतर पर्सेंटाइल को फाइनल मानता है।

मान लीजिए किसी छात्र का सेशन-1 में पर्सेंटाइल 96 है और सेशन-2 में 98 है, तो रैंक के लिए 98 पर्सेंटाइल को ही माना जाएगा। इससे छात्रों को अपना प्रदर्शन सुधारने का दूसरा मौका मिलता है।

जब दोनों सेशन पूरे हो जाते हैं, तब एनटीए सभी छात्रों के बेस्ट पर्सेंटाइल को लेकर एक फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार करता है। इसी के आधार पर ऑल इंडिया रैंक जारी की जाती है। रैंक का मतलब है पूरे देश में आपकी स्थिति।

कब जारी होगी जेईई मेन 2026 की रैंक

जेईई मेन 2026 के दोनों सेशन समाप्त होने के बाद ही फाइनल रैंक जारी की जाएगी। सेशन-1 का रिजल्ट 12 फरवरी को आएगा, लेकिन ऑल इंडिया रैंक दोनों सेशन के बाद ही घोषित होगी। इसलिए जिन छात्रों को लगता है कि वे और बेहतर कर सकते हैं, उनके लिए सेशन-2 एक बड़ा अवसर है।

रैंक जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन से छात्र जेईई एडवांस्ड के लिए योग्य हैं। हर साल जेईई मेन में टॉप 2,50,000 रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को जेईई एडवांस्ड परीक्षा में बैठने का मौका मिलता है।

जेईई एडवांस्ड के लिए पात्रता

जेईई एडवांस्ड में बैठने के लिए केवल रैंक ही पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार को 12वीं कक्षा में कम से कम 75 प्रतिशत अंक भी प्राप्त करने होते हैं। हालांकि आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए यह प्रतिशत कुछ कम होता है। इस तरह जेईई मेन केवल पहला चरण है, असली चुनौती जेईई एडवांस्ड में होती है।

क्या रॉ स्कोर से रैंक का अनुमान लगाया जा सकता है

अक्सर छात्र इंटरनेट पर सर्च करते हैं कि 150, 170 या 200 रॉ स्कोर पर कितनी रैंक आएगी। लेकिन यह पूरी तरह निश्चित नहीं कहा जा सकता क्योंकि हर साल परीक्षा का कठिनाई स्तर, छात्रों की संख्या और प्रदर्शन अलग होता है।

फिर भी पिछले वर्षों के ट्रेंड के आधार पर एक अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन अंतिम रैंक केवल आधिकारिक पर्सेंटाइल के आधार पर ही तय होती है। इसलिए रॉ स्कोर देखकर घबराने या अत्यधिक उत्साहित होने की बजाय रिजल्ट का इंतजार करना ही बेहतर है।

सेशन-2 में बैठना चाहिए या नहीं

सेशन-1 का रिजल्ट आने के बाद कई छात्र यह निर्णय लेते हैं कि उन्हें सेशन-2 में दोबारा परीक्षा देनी चाहिए या नहीं। यदि आपका पर्सेंटाइल उम्मीद से कम है और आपको लगता है कि आप बेहतर तैयारी के साथ अधिक स्कोर कर सकते हैं, तो सेशन-2 एक अच्छा अवसर हो सकता है।

क्योंकि एनटीए दोनों में से बेहतर पर्सेंटाइल को ही मानता है, इसलिए दोबारा प्रयास करने में कोई नुकसान नहीं है। बल्कि इससे आपकी रैंक सुधारने की संभावना बढ़ जाती है।

रिजल्ट कैसे करें चेक

JEE Main 2026 Result

जेईई मेन 2026 सेशन-1 का रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर उपलब्ध होगा। उम्मीदवार को अपना एप्लिकेशन नंबर और पासवर्ड या जन्मतिथि दर्ज करनी होगी। लॉग इन करने के बाद स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड कर भविष्य के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है।

स्कोरकार्ड में कुल पर्सेंटाइल, विषयवार पर्सेंटाइल और अन्य जरूरी जानकारी दी होगी। इसी के आधार पर छात्र आगे की योजना बना सकते हैं।

छात्रों के लिए जरूरी सलाह

रिजल्ट का इंतजार हमेशा तनावपूर्ण होता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि जेईई मेन केवल एक परीक्षा है, जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं। यदि स्कोर उम्मीद के अनुसार नहीं आता है तो भी कई अन्य अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज और विकल्प मौजूद हैं।

जो छात्र सेशन-2 की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें सेशन-1 के अनुभव से सीख लेकर अपनी कमजोरियों पर काम करना चाहिए। समय प्रबंधन, मॉक टेस्ट और कॉन्सेप्ट की स्पष्टता पर ध्यान देना इस समय सबसे अधिक जरूरी है।

जेईई मेन 2026 सेशन-1 का रिजल्ट 12 फरवरी को जारी होने वाला है और लाखों छात्र बेसब्री से इसका इंतजार कर रहे हैं। रॉ स्कोर से पर्सेंटाइल और फिर पर्सेंटाइल से ऑल इंडिया रैंक बनने की प्रक्रिया सीधी नहीं बल्कि नॉर्मलाइजेशन पर आधारित होती है। पर्सेंटाइल का मतलब प्रतिशत अंक नहीं बल्कि आपसे कम स्कोर करने वाले छात्रों का प्रतिशत होता है।

अंतिम रैंक दोनों सेशन के बेहतर पर्सेंटाइल के आधार पर तय की जाएगी। टॉप 2,50,000 उम्मीदवारों को जेईई एडवांस्ड में बैठने का मौका मिलेगा, जहां से आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का रास्ता खुलता है।

ऐसे में जरूरी है कि छात्र सही जानकारी रखें, अफवाहों से बचें और अपने प्रदर्शन का वास्तविक आकलन करें। रिजल्ट चाहे जैसा भी हो, मेहनत और सही दिशा में प्रयास हमेशा सफलता की ओर ले जाते हैं।

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