Gaza Peace Plan: गाज़ा में शांति की दस्तक: हमास ने टेके घुटने, पीएम मोदी ने ट्रंप की पहल को सराहागाज़ा में चल रहे लंबे संघर्ष के बीच आखिरकार एक बड़ी उम्मीद की किरण दिखाई दी है। कई महीनों से जारी हिंसा और युद्ध के बीच अब शांति की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इस दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश की गई “20 सूत्रीय शांति योजना” ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत गाज़ा में स्थायी और न्यायसंगत शांति के हर प्रयास का दृढ़ता से समर्थन करता है। उन्होंने कहा, “गाज़ा में शांति प्रयासों में निर्णायक प्रगति के बीच, हम राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हैं। बंधकों की रिहाई एक महत्वपूर्ण कदम है और भारत इस दिशा में हर सकारात्मक कोशिश के साथ खड़ा रहेगा।”
मोदी का यह बयान उस समय आया है जब मध्य पूर्व की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। दशकों से चले आ रहे इज़राइल-गाज़ा संघर्ष में यह समझौता एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
Gaza Peace Plan: हमास ने टेके घुटने, बंधकों की रिहाई पर जताई सहमति

गाज़ा से बड़ी खबर यह आई है कि हमास ने बंधक बनाए गए सभी इज़राइली नागरिकों को रिहा करने पर सहमति जताई है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘शांति की दिशा में पहला बड़ा संकेत’ माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, हमास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पेश की गई 20 सूत्रीय “गाज़ा पीस प्लान” का जवाब देते हुए कहा है कि वह तत्काल वार्ता में शामिल होने को तैयार है। संगठन ने यह भी घोषणा की है कि वह गाज़ा के प्रशासन को अरब और इस्लामी राष्ट्रों द्वारा समर्थित एक गैर-पक्षपाती, तकनीकी फिलिस्तीनी निकाय को सौंपने के लिए तैयार है।
यह बयान हमास की ओर से टेलीग्राम चैनल के माध्यम से जारी किया गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी। यह पहली बार है जब हमास ने इतने स्पष्ट रूप से सत्ता से पीछे हटने और शांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।
ट्रंप की शांति योजना – 20 सूत्रों में युद्धविराम से पुनर्निर्माण तक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में अपनी 20 सूत्रीय गाज़ा शांति योजना का ऐलान किया था। इस योजना में कई ऐसे अहम बिंदु शामिल हैं जो गाज़ा की दशकों पुरानी स्थिति को बदल सकते हैं।
योजना के प्रमुख बिंदुओं में तत्काल युद्धविराम की घोषणा, 72 घंटों के भीतर सभी बंधकों की रिहाई और “गाज़ा शांति बोर्ड” नामक एक अंतरराष्ट्रीय निकाय का गठन शामिल है। इस बोर्ड का काम गाज़ा के पुनर्निर्माण और स्थायी शांति व्यवस्था की निगरानी करना होगा।
यह बोर्ड अमेरिका, यूरोपीय संघ और कुछ अरब देशों के प्रतिनिधियों से मिलकर बनेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी इस “शांति बोर्ड” में शामिल किए जाएंगे।
‘Peace Board’ का गठन और उसकी भूमिका
‘शांति बोर्ड’ का विचार ट्रंप प्रशासन की उस नीति का हिस्सा है जिसमें स्थानीय प्रशासन की जगह एक अंतरराष्ट्रीय निकाय को जिम्मेदारी दी जाएगी। इस बोर्ड के तहत गाज़ा में स्थायी पुनर्निर्माण, मानवाधिकारों की रक्षा, और लोकतांत्रिक ढांचे की स्थापना की जाएगी।
योजना के अनुसार, गाज़ा का प्रशासन एक “गैर-पक्षपाती फिलिस्तीनी तकनीकी निकाय” को सौंपा जाएगा, जिसे अरब और इस्लामी राष्ट्रों का समर्थन प्राप्त होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गाज़ा किसी भी प्रकार के चरमपंथी या सैन्य नियंत्रण से मुक्त होकर शांतिपूर्ण विकास के रास्ते पर आगे बढ़े।
इस निकाय की देखरेख में शिक्षा, स्वास्थ्य, जल प्रबंधन और पुनर्वास परियोजनाओं पर काम शुरू किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन ने इस दिशा में अरब देशों से भी सहयोग की अपील की है।
हमास के लिए डेडलाइन तय, ट्रंप की कड़ी चेतावनी

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस शांति योजना की घोषणा करते हुए हमास को साफ चेतावनी दी थी कि अगर संगठन रविवार शाम तक इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं करता, तो इसे अंतिम अवसर माना जाएगा। उन्होंने कहा था कि इसके बाद अगर हमास इस समझौते को नहीं मानता, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से “निर्णायक कार्रवाई” की जाएगी।
ट्रंप ने कहा था, “यह आखिरी समझौता है। अगर हमास ने इसे अस्वीकार किया तो उसे परिणाम भुगतने होंगे। हम गाज़ा में स्थायी शांति देखना चाहते हैं, लेकिन अगर हिंसा जारी रही, तो पूरी तबाही मच जाएगी।”
इस चेतावनी का असर साफ नजर आया जब हमास ने अचानक अपने रुख में नरमी दिखाई और शांति वार्ता में शामिल होने का ऐलान किया।
भारत का रुख – “शांति के हर प्रयास के साथ”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटनाक्रम पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रंप की पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत हमेशा से मध्य पूर्व में स्थायी और न्यायसंगत शांति का समर्थक रहा है। मोदी ने कहा,
“बंधकों की रिहाई एक महत्वपूर्ण कदम है। गाज़ा में शांति प्रयासों में निर्णायक प्रगति के बीच, हम राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हैं। भारत हर उस पहल का समर्थन करेगा जो हिंसा से मुक्त भविष्य की दिशा में काम करती है।”
भारत का यह बयान यह दर्शाता है कि नई दिल्ली वैश्विक मंच पर न केवल आर्थिक या रणनीतिक शक्ति के रूप में बल्कि “शांति और कूटनीति के दूत” के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रहा है।
भारत पहले भी फिलिस्तीन के पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता के लिए सहयोग करता आया है, और अब यह नई स्थिति भारत की कूटनीतिक छवि को और भी मजबूत बनाती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
गाज़ा शांति योजना को लेकर दुनिया भर से मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे “सही दिशा में एक सकारात्मक कदम” बताया है। वहीं फ्रांस और जर्मनी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
अरब लीग ने कहा है कि अगर हमास वास्तव में शांति प्रक्रिया में शामिल होता है और गाज़ा के नियंत्रण को तकनीकी निकाय को सौंप देता है, तो यह पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए ऐतिहासिक बदलाव साबित होगा।
हालांकि, ईरान ने इस योजना पर आपत्ति जताई है और इसे “अमेरिकी राजनीतिक चाल” करार दिया है। ईरान का कहना है कि इस योजना के पीछे अमेरिका का मकसद इज़राइल को लाभ पहुंचाना है।
हमास का आधिकारिक बयान
हमास ने टेलीग्राम पर जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा,
“हम गाज़ा की जनता की सुरक्षा, बंधकों की रिहाई और स्थायी शांति के लिए सभी रचनात्मक प्रयासों में शामिल होने के लिए तैयार हैं। हमारा लक्ष्य एक न्यायसंगत समाधान है जो फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों की रक्षा करे।”
हालांकि, हमास ने यह भी स्पष्ट किया कि वह “इज़राइल के किसी भी सैन्य कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा” और शांति प्रक्रिया में अरब देशों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।
यह बयान यह संकेत देता है कि हमास अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए व्यावहारिक रास्ता अपनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ट्रंप की शर्तें उसे युद्ध के विकल्प से बाहर धकेल रही हैं।
गाज़ा में आम लोगों की उम्मीदें
गाज़ा के आम लोगों के लिए यह समझौता “उम्मीद की नई सुबह” बनकर आया है। वर्षों से बमबारी, आर्थिक नाकाबंदी और मानवीय संकट झेल रहे लोगों के लिए अब राहत की संभावना दिखाई दे रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर यह योजना लागू होती है तो गाज़ा में शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का नया अध्याय शुरू हो सकता है। “हम बस शांति चाहते हैं,” एक स्थानीय नागरिक ने मीडिया से कहा, “हमारे बच्चे अब डर के साये में नहीं, उजाले में जीना चाहते हैं।”
एक नई शुरुआत की ओर
05 अक्टूबर 2025 को गाज़ा का यह घटनाक्रम दुनिया के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है। वर्षों से चले आ रहे इज़राइल-हमास संघर्ष के बीच यह पहली बार है जब दोनों पक्ष शांति की मेज़ पर आने के लिए तैयार दिख रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की इस 20 सूत्रीय योजना ने जहां राजनीतिक बहस को तेज किया है, वहीं भारत जैसे देशों का समर्थन इसे और विश्वसनीय बनाता है। प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में —
“शांति की राह कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। भारत हर उस प्रयास का समर्थन करेगा जो मानवता को हिंसा से मुक्त भविष्य की ओर ले जाए।”
अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह योजना वास्तव में युद्ध को समाप्त कर सकती है और गाज़ा में स्थायी शांति की नींव रख सकती है। फिलहाल, यह कहना गलत नहीं होगा कि गाज़ा की धरती पर अब शांति की एक नई सुबह उगती दिख रही है।
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