Ethanol Fuel in India: पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों, प्रदूषण और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए भारत तेजी से एथेनॉल मिश्रित ईंधन (Ethanol Blended Fuel) की ओर बढ़ रहा है। आज E20 पेट्रोल यानी 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल की चर्चा हर जगह हो रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर एथेनॉल क्या होता है और भारत में इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने के लिए कैसे तैयार किया जाता है? आइए आसान भाषा में पूरी प्रक्रिया समझते हैं।

एथेनॉल क्या है?
एथेनॉल (Ethanol) एक प्रकार का अल्कोहल (Alcohol) है, जिसका रासायनिक सूत्र C₂H₅OH होता है। यह एक रंगहीन, ज्वलनशील और बायोडिग्रेडेबल तरल पदार्थ है। एथेनॉल का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे दवाइयों, सैनिटाइज़र, परफ्यूम और उद्योगों में। लेकिन जब इसे विशेष गुणवत्ता के साथ तैयार किया जाता है, तब इसे वाहनों के लिए ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
भारत में फ्यूल ग्रेड एथेनॉल मुख्य रूप से कृषि आधारित कच्चे माल से बनाया जाता है, इसलिए इसे बायोफ्यूल (Biofuel) भी कहा जाता है।
भारत में एथेनॉल किन चीजों से बनाया जाता है?
भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित स्रोतों का उपयोग किया जाता है:
- गन्ने का रस (Sugarcane Juice)
- शीरा (Molasses)
- बी-हेवी और सी-हेवी मोलासेस
- टूटे हुए चावल (Broken Rice)
- मक्का (Maize)
- खराब गुणवत्ता वाले अनाज
- अन्य स्टार्च युक्त कृषि उत्पाद
सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और अतिरिक्त कृषि उत्पादन का बेहतर उपयोग करने के लिए इन स्रोतों से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया है।
भारत में एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया:
1. कच्चे माल का चयन:
सबसे पहले गन्ने, मक्का, चावल या अन्य कृषि उत्पादों का चयन किया जाता है। यदि गन्ने का उपयोग किया जा रहा है, तो उससे रस या शीरा निकाला जाता है। यदि मक्का या चावल का उपयोग हो रहा है, तो उन्हें पीसकर स्टार्च निकाला जाता है।
2. स्टार्च को शुगर में बदलना:
यदि कच्चा माल अनाज है, तो उसमें मौजूद स्टार्च को विशेष एंजाइमों की मदद से ग्लूकोज जैसी सरल शर्करा में बदला जाता है। क्योंकि यीस्ट सीधे स्टार्च को नहीं, बल्कि शर्करा को ही एथेनॉल में बदल सकता है।
3. किण्वन (Fermentation):
अब इस शर्करा वाले घोल में यीस्ट (Yeast) मिलाया जाता है। यीस्ट शर्करा को खाकर एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है। यह प्रक्रिया लगभग 24 से 72 घंटे तक चल सकती है।
रासायनिक अभिक्रिया:
C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂
यानी ग्लूकोज से एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बनती है।
4. आसवन (Distillation):
किण्वन के बाद प्राप्त घोल में केवल 10–15% एथेनॉल होता है। इसे डिस्टिलेशन कॉलम में गर्म किया जाता है, जिससे एथेनॉल अलग होकर लगभग 95% शुद्धता तक पहुंच जाता है।
5. डिहाइड्रेशन (Dehydration):
ईंधन के रूप में उपयोग करने के लिए एथेनॉल में पानी की मात्रा लगभग पूरी तरह हटाई जाती है। इस प्रक्रिया के बाद लगभग 99.5% से अधिक शुद्ध फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल प्राप्त होता है, जिसे वाहनों में उपयोग किया जा सकता है।
6. पेट्रोल में मिश्रण:
अंतिम चरण में इस फ्यूल ग्रेड एथेनॉल को तेल कंपनियों के डिपो पर पेट्रोल के साथ निर्धारित अनुपात में मिलाया जाता है।
उदाहरण:
- E10 = 10% एथेनॉल + 90% पेट्रोल
- E20 = 20% एथेनॉल + 80% पेट्रोल
- E85 = 85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल (कुछ विशेष फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए)
इसके बाद यह मिश्रित ईंधन पेट्रोल पंपों तक पहुंचाया जाता है।

भारत एथेनॉल पर इतना जोर क्यों दे रहा है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। इससे विदेशी मुद्रा पर भारी खर्च होता है। यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जाए, तो पेट्रोल की खपत कम होती है और आयात पर निर्भरता भी घटती है।
इसके अलावा एथेनॉल:
- कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करता है।
- किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत देता है।
- कृषि उत्पादों की बेहतर खपत सुनिश्चित करता है।
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाता है।
क्या एथेनॉल पूरी तरह पेट्रोल की जगह ले सकता है?
फिलहाल इसका उत्तर नहीं है। हालांकि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियां E85 या उससे अधिक एथेनॉल मिश्रण पर भी चल सकती हैं, लेकिन भारत में अधिकांश वाहन अभी E20 तक के लिए डिजाइन किए जा रहे हैं। भविष्य में तकनीक के विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ एथेनॉल का उपयोग और अधिक बढ़ सकता है।
एथेनॉल केवल एक वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाला यह बायोफ्यूल देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि इसकी सफलता के लिए पर्याप्त उत्पादन, मजबूत वितरण व्यवस्था और एथेनॉल-अनुकूल वाहनों का विस्तार भी उतना ही आवश्यक है। आने वाले वर्षों में एथेनॉल भारत के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
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