Chhannulal Mishra Death: शास्त्रीय संगीत जगत का दिवंगत नक्षत्र पंडित छन्नूलाल मिश्र का 91 साल की उम्र में निधन, बनारस और संस्कृति को अपूरणीय क्षति

Chhannulal Mishra Death: 2 अक्टूबर 2025 की सुबह भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के लिए बेहद दुखद साबित हुई। बनारस घराने के महान गायक, पद्म विभूषण से सम्मानित, संगीत की आत्मा माने जाने वाले पंडित छन्नूलाल मिश्र का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका निधन केवल एक कलाकार की मृत्यु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय धरोहर के एक स्तंभ के गिरने जैसा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि छन्नूलाल मिश्र जीवन भर भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उनके निधन से भारतीय संगीत जगत में ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसकी भरपाई असंभव है।

बचपन और संगीत शिक्षा | Chhannulal Mishra Death

Chhannulal Mishra Death

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गाँव में हुआ था। यह गाँव स्वयं संगीत और संस्कृति की धरती माना जाता है।

उनके पिता पंडित बद्री प्रसाद मिश्र स्वयं संगीत के ज्ञानी थे और घर का वातावरण संगीत से सराबोर था। छन्नूलाल मिश्र ने मात्र 6 वर्ष की आयु में अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने 9 वर्ष की अवस्था में उस्ताद गनी अली साहब से खयाल गायकी की बारीकियाँ सीखीं। यही से उनकी गायकी का आधार मजबूत हुआ। उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद तबला वादन में प्रसिद्ध थे, जिससे संगीत का संस्कार उन्हें पीढ़ियों से मिला।

बनारस और किराना घराने का अनूठा संगम

पंडित मिश्र की विशेषता यह थी कि उन्होंने किराना और बनारस दोनों घरानों की गहराइयों को आत्मसात किया और उन्हें अपने गायन में एक नया रूप दिया। बनारस की ठुमरी और दादरा हो या किराना घराने का खयाल — उनके स्वरों में सब कुछ समाहित था।

उनकी गायकी में भाव और भक्ति का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता था। वे खयाल, ठुमरी, दादरा, भजन, चैत और लोक संगीत की विधाओं में समान रूप से निपुण थे। उनकी गायकी शब्दों के अर्थ को स्वर के माध्यम से जीवंत करने की कला का उदाहरण थी।

उनका मानना था कि संगीत केवल स्वर या लय का खेल नहीं है, बल्कि उसमें भाव और आत्मा की अभिव्यक्ति भी उतनी ही ज़रूरी है।

संगीत यात्रा और योगदान

छन्नूलाल मिश्र ने बनारस को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने देश-विदेश में असंख्य प्रस्तुतियाँ दीं और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उनकी प्रस्तुतियों की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे शास्त्रीय संगीत को आम जनता तक पहुँचाने में सक्षम थे।

वे गाते समय श्रोताओं से संवाद करते, भावनाओं को स्वर में ढालते और हर प्रस्तुति को जीवंत बना देते। यही कारण है कि उनकी ठुमरी, भजन और दादरा आम लोगों के दिल तक पहुँच जाते थे।

उनकी गायकी में परंपरा और नवीनता का संतुलन देखने को मिलता था। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को केवल मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जन-जन की धरोहर बना दिया।

सम्मान और पुरस्कार

पंडित छन्नूलाल मिश्र के योगदान को देश ने बार-बार सराहा। उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

  • उन्हें 2010 में पद्म भूषण प्रदान किया गया।
  • 2020 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया, जो भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
  • इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप, यश भारती पुरस्कार, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद पुरस्कार और शीरोमणि पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

ये सम्मान उनके योगदान और कला की उस गहराई को दर्शाते हैं, जिसने भारतीय संगीत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

निजी जीवन और संघर्ष

संगीत में सफलता के बावजूद उनका निजी जीवन कई दुखों से भरा रहा। उनकी पत्नी मनोरा मिश्र का निधन कोविड-19 के दौरान हुआ। इसके बाद उनकी बेटी संगीता की भी मौत हो गई। इन हादसों ने उन्हें भीतर से झकझोर दिया, लेकिन संगीत ही उनका सहारा बना रहा।

बढ़ती उम्र के साथ उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ भी घेरने लगीं। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कुछ दिन पहले उन्हें बीएचयू के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि हालत सुधरने पर उन्हें घर भेज दिया गया था, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाए।

अंतिम समय और निधन

2 अक्टूबर 2025 की सुबह मिर्जापुर स्थित उनके निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 91 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

उनका पार्थिव शरीर वाराणसी लाया गया, जहाँ शाम को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। हजारों लोग इस अंतिम यात्रा में शामिल हुए और नम आँखों से उन्हें विदाई दी।

प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि

Chhannulal Mishra Death

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा —
“सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुँचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा।”

उनकी विरासत

पंडित छन्नूलाल मिश्र की सबसे बड़ी विरासत उनका संगीत है। उनकी ठुमरी, भजन और खयाल की रिकॉर्डिंग आज भी लोगों के दिलों में बसती हैं। उनकी शैली, उनकी आवाज़ और उनकी गहराई हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेंगी।

उन्होंने सिद्ध कर दिया कि संगीत किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का है। उनकी गायकी ने पीढ़ियों को जोड़ने का काम किया।

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जीवन एक साधना था। उन्होंने दिखाया कि संगीत केवल पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। उनके निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना नामुमकिन है।

लेकिन उनकी आवाज़, उनकी ठुमरी और उनकी गाई हुई भक्ति रचनाएँ हमेशा जीवित रहेंगी। वे अब भले ही इस लोक में न हों, लेकिन उनके स्वर अनंत काल तक गूँजते रहेंगे।

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