बीमार व्यक्ति नवरात्रि में व्रत रख सकता है या नहीं? जानिए सही मार्गदर्शन

बीमार व्यक्ति नवरात्रि में व्रत रख सकता है या नहीं: नवरात्रि भारत का प्रमुख पर्व है, जिसमें माँ दुर्गा की उपासना पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से की जाती है। इस समय अधिकांश लोग उपवास (फास्ट) रखते हैं और पूजा-पाठ कर आध्यात्मिक वातावरण में डूब जाते हैं। लेकिन अक्सर यह प्रश्न सामने आता है कि क्या कोई बीमार व्यक्ति नवरात्रि में व्रत रख सकता है? इस विषय पर विस्तार से समझना ज़रूरी है क्योंकि स्वास्थ्य और श्रद्धा, दोनों ही जीवन में महत्वपूर्ण हैं।

बीमार व्यक्ति नवरात्रि में व्रत रख सकता है या नहीं
 बीमार व्यक्ति नवरात्रि में व्रत रख सकता है या नहीं

1. व्रत का महत्व:

नवरात्रि का व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक अनुशासन के लिए भी अहम माना जाता है। यह शरीर को हल्का रखने और मन को एकाग्र करने में मदद करता है। माना जाता है कि व्रत से आत्म-नियंत्रण, धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।

लेकिन जब बात किसी बीमार व्यक्ति की आती है तो धार्मिक नियम और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना आवश्यक हो जाता है।

2. बीमार व्यक्ति के लिए व्रत की स्थिति:

बीमार व्यक्ति को व्रत रखना है या नहीं, यह उसकी बीमारी, शारीरिक क्षमता और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए:

  • डायबिटीज़ के मरीज को लंबे समय तक खाली पेट रहना खतरनाक हो सकता है क्योंकि ब्लड शुगर लेवल बहुत ज्यादा कम या ज्यादा हो सकता है।

  • हृदय रोगी को संतुलित आहार समय-समय पर लेना चाहिए, वरना कमजोरी और थकान बढ़ सकती है।

  • गंभीर रोग जैसे TB, कैंसर या किडनी रोग से ग्रसित लोगों के लिए व्रत करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

  • सर्दी, बुखार या सामान्य कमजोरी की स्थिति में भी शरीर को पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है।

इसलिए बीमार व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए।

3. शास्त्रों का दृष्टिकोण:

धार्मिक ग्रंथों में भी कहा गया है कि धर्म का पालन सदैव स्वास्थ्य और परिस्थितियों के अनुसार होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है तो वह व्रत की जगह भक्ति, ध्यान, मंत्र-जप, पूजा-पाठ, दान और सेवा के माध्यम से माँ दुर्गा की आराधना कर सकता है।

भगवान केवल कठोर उपवास से प्रसन्न नहीं होते, बल्कि सच्चे मन से की गई पूजा और भक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण होती है।

4. यदि बीमार व्यक्ति व्रत रखना चाहे तो विकल्प:

अगर कोई बीमार व्यक्ति श्रद्धा के कारण व्रत रखना ही चाहता है, तो उसे कठोर उपवास से बचकर हल्के उपवास या आंशिक व्रत का पालन करना चाहिए। जैसे कि:

  • फलाहार में आसानी से पचने वाले फल जैसे केला, पपीता, सेब, अनार खा सकता है।

  • नारियल पानी, नींबू पानी या दूध से ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

  • साबूदाना खिचड़ी, समक चावल, सिंघाड़े का आटा जैसी हल्की चीजें ले सकता है।

  • बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना खाने से कमजोरी और ब्लड शुगर की समस्या नहीं होगी।

  • शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लेना ज़रूरी है।

5. बीमार व्यक्ति के लिए सावधानियाँ:

  1. डॉक्टर से सलाह लें – यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, तो उपवास से पहले डॉक्टर की राय ज़रूर लेनी चाहिए।

  2. भूखे न रहें – लंबे समय तक खाली पेट रहने से शरीर पर दबाव बढ़ सकता है।

  3. दवाइयाँ समय पर लें – यदि व्यक्ति दवा ले रहा है, तो उन्हें छोड़ना खतरनाक हो सकता है। व्रत के दौरान भी दवा लेने के समय को बरकरार रखना चाहिए।

  4. कमजोरी महसूस हो तो व्रत तोड़ दें – माँ दुर्गा कभी भी अपने भक्त से उसके स्वास्थ्य के विरुद्ध बलिदान की अपेक्षा नहीं करतीं।

  5. मन से भक्ति करें – अगर शरीर व्रत की अनुमति नहीं देता, तो केवल पूजा, मंत्र और ध्यान से भी भक्ति पूरी मानी जाती है।

6. धार्मिक दृष्टि से विकल्प:

यदि कोई बीमार व्यक्ति व्रत नहीं रख सकता तो वह माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए इन उपायों को कर सकता है:

  • रोज़ सुबह-शाम माँ दुर्गा के मंत्रों का जप करें।

  • गरीब और ज़रूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें।

  • दुर्गा सप्तशती या देवी पाठ सुनें या पढ़ें।

  • घर में शुद्ध वातावरण बनाकर दीपक जलाएं और माँ का ध्यान करें।

इन विकल्पों से भी भक्त की आस्था और श्रद्धा पूरी तरह व्यक्त होती है।

नवरात्रि का व्रत आध्यात्मिक शुद्धि और माँ दुर्गा की कृपा पाने का माध्यम है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति बीमार है तो उसे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। बिना सोचे-समझे उपवास करना उसके लिए खतरनाक हो सकता है।

यदि श्रद्धा प्रबल हो तो आंशिक उपवास, फलाहार, दवा के साथ हल्का आहार या केवल भक्ति मार्ग से भी नवरात्रि का पालन किया जा सकता है। माँ दुर्गा अपने भक्त की नीयत और भावनाओं को देखती हैं, कठोर उपवास को नहीं।

इसलिए बीमार व्यक्ति को चाहिए कि वह अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्णय ले और स्वस्थ रहते हुए माँ दुर्गा की भक्ति में लीन हो।

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