Atal Bihari Vajpayee Jayanti: भारत की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विचार, मूल्य और संस्कार बन जाते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ऐसा ही एक नाम है। 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे अटल जी भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में थे, जिनकी स्वीकार्यता पक्ष और विपक्ष दोनों में समान रूप से थी। उनकी जयंती हमें न केवल एक महान प्रधानमंत्री को याद करने का अवसर देती है, बल्कि उनके आदर्शों से सीख लेने का भी संदेश देती है।
Tribute to former Prime Minister of India, Bharat Ratna Shri Atal Bihari Vajpayee Ji on his Jayanti, which is observed as Good Governance Day.
His leadership and unwavering dedication to nation-building continue to inspire us all.#GoodGovernanceDay #AtalBihariVajpayee #MoPNG pic.twitter.com/pYTMh9VF6V
— Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) December 25, 2025
प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक यात्रा:
अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन सादगी और संघर्ष से शुरू हुआ। वे छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और राष्ट्रसेवा को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने समाज और राजनीति को करीब से समझा। बाद में वे भारतीय जनसंघ से जुड़े और संगठन को वैचारिक मजबूती प्रदान की। भारतीय जनता पार्टी के गठन और विस्तार में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
ओजस्वी वक्ता और कुशल संसद:
अटल जी की पहचान एक प्रखर वक्ता के रूप में थी। संसद में उनके भाषण विचारशील, संतुलित और प्रभावशाली होते थे। वे विरोध करते समय भी मर्यादा नहीं भूलते थे। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने सरकार की रचनात्मक आलोचना की और सत्ता में रहते हुए विपक्ष का सम्मान किया। यही कारण था कि उन्हें एक आदर्श लोकतांत्रिक नेता माना गया।
प्रधानमंत्री के रूप में ऐतिहासिक निर्णय:
अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने, लेकिन 1999 से 2004 तक का कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षणों के माध्यम से उन्होंने भारत को सामरिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाया। यह निर्णय भारत के आत्मसम्मान और सुरक्षा नीति का मजबूत आधार बना।
शांति और संवाद की राजनीति:
अटल जी केवल शक्ति के समर्थक नहीं थे, बल्कि शांति के भी पक्षधर थे। उनकी लाहौर बस यात्रा भारत-पाक संबंधों में एक साहसिक और ऐतिहासिक पहल थी। उन्होंने यह सिद्ध किया कि कठिन परिस्थितियों में भी संवाद का रास्ता खुला रखना चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण आज भी वैश्विक राजनीति के लिए प्रासंगिक है।
विकास और बुनियादी ढांचे में योगदान:
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छुईं। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना ने देश को सशक्त सड़क नेटवर्क से जोड़ा। टेलीकॉम, ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सुधारों ने भारत को आर्थिक विकास की नई दिशा दी।

कवि हृदय वाला राजनेता:
राजनीति के कठोर वातावरण में भी अटल जी का कवि हृदय जीवंत रहा। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, जीवन संघर्ष और मानवीय संवेदनाएँ झलकती हैं। “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा” जैसी पंक्तियाँ आज भी युवाओं को प्रेरणा देती हैं। साहित्य उनके व्यक्तित्व का संवेदनशील पक्ष उजागर करता है।
नैतिकता, सादगी और नेतृत्व:
अटल बिहारी वाजपेयी का नेतृत्व नैतिक मूल्यों पर आधारित था। गठबंधन सरकार चलाने की उनकी क्षमता, सहयोगियों के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन उन्हें विशिष्ट बनाता है। निजी जीवन में वे अत्यंत सादगीपूर्ण थे और सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे।
आज के संदर्भ में अटल जी की प्रासंगिकता:
आज जब राजनीति में कटुता और विभाजन बढ़ता दिख रहा है, अटल बिहारी वाजपेयी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। संवाद, सहिष्णुता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना उनके राजनीतिक दर्शन का मूल था।
उपसंहार:
अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का अवसर है। उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि राजनीति में भी संवेदनशीलता, शालीनता और राष्ट्रप्रेम संभव है। अटल जी अपने विचारों और कर्मों के माध्यम से सदैव भारत की आत्मा में जीवित रहेंगे।
अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन युवाओं के लिए विशेष प्रेरणा है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि राजनीति में सफलता पाने के लिए कटु भाषा या आक्रामक व्यवहार आवश्यक नहीं है। धैर्य, अध्ययन, विचारों की स्पष्टता और नैतिक साहस से भी नेतृत्व किया जा सकता है। आज के युवाओं के लिए अटल जी का संदेश है कि लोकतंत्र में भागीदारी केवल सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी है। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि असफलताएँ मार्ग में आती हैं, लेकिन यदि उद्देश्य स्पष्ट हो तो उनसे घबराना नहीं चाहिए।
अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत केवल योजनाओं या पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक राजनीतिक संस्कृति की विरासत है। उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा किया और आंतरिक रूप से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया। आज जब देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, तब अटल जी के विचार हमें संतुलन और संवेदनशीलता की याद दिलाते हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सशक्त राष्ट्र वही होता है, जो विकास के साथ मानवीय मूल्यों को भी संजोकर रखता है।
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