अंगारकी चतुर्थी 2025: तिथि, महत्व, पूजा-विधि और आने वाले 10 दिनों का शुभ समय

अंगारकी चतुर्थी 2025: अंगारकी चतुर्थी 2025, 12 अगस्त (मंगलवार) को मनाई जाएगी, जो संकष्टी चतुर्थी का एक विशेष और दुर्लभ संयोग है। जब चतुर्थी तिथि मंगलवार को पड़ती है, तो इसे “अंगारकी चतुर्थी” कहा जाता है, जो भगवान गणेश और मंगल ग्रह दोनों की कृपा प्रदान करती है। इस दिन व्रत और पूजा से जीवन में मंगल, समृद्धि, सुख-शांति और विघ्नों का नाश होता है। पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आने वाले 10 दिनों तक भक्त गणेशजी की आराधना में लीन रहते हैं और विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरते हैं।

अंगारकी चतुर्थी 2025
              अंगारकी चतुर्थी 2025

विशेष समय (Ujjain, IST):

  • चतुर्थी तिथि आरंभ: सुबह 08:41 बजे, 12 अगस्त

  • तिथि अंत: सुबह 06:36 बजे, 13 अगस्त

दिवस का समय:

  • सूर्योदय: 06:06 AM

  • सूर्यास्त: 06:57 PM

  • चंद्र आरंभ: रात 09:06 PM

  • चंद्र अस्त: सुबह 09:44 AM (अगले दिन)

अंगारकी चतुर्थी 2025, महत्व और पौराणिक कथा:

  • “अंगारकी” पुच्छपाषाण-वर्ण (लाल कोयले सा रंग) मंगल (Mars) का प्रतीक है, और मंगलवार के साथ मिलकर यह दिन विशेष सत्कार, ऊर्जा और मंगलकारी प्रभावों का अधिष्ठान होता है।

  • हिंदू पुराणों — जैसे गणेश पुराण और स्मृति कौस्तुभ — में वर्णित है कि भगवान गणेश ने अंगारक नामक भक्त को आशीर्वाद दिया था, इसलिए इस तिथि पर उपवास करने वाले की इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

  • यह संकष्टी चतुर्थी में सबसे अधिक प्रभावशाली मानी जाती है, जिससे यह अन्य सभी संकष्टी व्रतों से उत्तम कहलाई जाती है।

व्रत एवं पूजा-रीति:

  1. व्रत प्रारंभ: सूर्योदय के साथ स्नान करके व्रत आरंभ करें।

  2. पूजा विधि:

    • गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, मोदक अर्पित करें।

    • दीपक जलाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।

    • ‘गणपति अथर्वशीर्ष’ का पाठ करें, तथा भजन एवं आरती कीजिए।

  3. चंद्र दर्शन एवं व्रत समापन: चंद्र दिखाई देने पर (रात 09:06 बजे के आसपास), पूजा-अर्चना करके आर्घ्य दें और व्रत खोलें।

  4. प्रतिबंध: पूरे दिन अनाज, नमक, तंबाकू, पान, शराब आदि का सेवन वर्जित है; केवल फलों, दूध, साबूदाने की खिचड़ी स्वीकार्य है।

  5. दान-धर्म: इस पुण्य दिन पर धन, वस्त्र या भोजन का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

मंगलवार के विशेष उपाय:

  • दिन की शुरुआत लाल वस्त्र धारण करके करें, जो मंगल ग्रह के प्रभाव को शांत करता है।

  • 108 बार “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप गणेश की विशेष प्रसन्नता प्राप्ति हेतु करें।

  • शाम में तिल का चौमुखी दीपक जलाएं और उसमें लौंग डालकर “ॐ विघ्नेश्वराय नमः” का जाप करें।

  • ऋण से मुक्ति के लिए लाल मसूर, ताम्बा/रुपये का सिक्का और गुड़ लाल कपड़े में बाँधकर चलते पानी में प्रवाहित करें — मंगल दोष कम होने में सहायता करेगा।

आने वाले 10 दिन: आध्यात्मिक यात्रा

  • 12 अगस्त — व्रत का उत्साह और पूजा विधि का आरंभ।

  • 13–18 अगस्त — गणेशजी की कृपा का अनुभव करते हुए, वैदिक मंत्र, भजन, सत्संग और सत्कर्म में विशेष रूप से समय निकालें।

  • 19–22 अगस्त — महीने में आने वाली अन्य चतुर्थियों और धार्मिक अवसरों की तैयारी; गणेश चतुर्थी (26–27 अगस्त) की आरंभिक योजना और पूजन सामग्री एकत्र करें।

यह पावन समय आत्मनिरीक्षण, मन की शुद्धि और दिव्यता के साथ जुड़ने का उपयुक्त अवसर है।

12 अगस्त 2025 की अंगारकी चतुर्थी एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ अवसर है, जब गणेश जी की आराधना मंगल के साथ समन्वय बनाती है। व्रत, पूजा, मंत्र, और भक्ति से जीवन में मंगल, समृद्धि, मनशांति और बुद्धि की प्राप्ति होती है। आने वाले 10 दिनों में इस दिव्य ऊर्जा का आनंद ले कर आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा को सफलता और सौभाग्य से भर सकते हैं।

अंगारकी चतुर्थी 2025 का यह शुभ अवसर भक्ति, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का अद्वितीय संगम है। 12 अगस्त को मंगलवार के दिन संकष्टी व्रत का पालन न केवल भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति का माध्यम है, बल्कि मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव को भी दूर करता है। इस दिन व्रत, पूजन, मंत्रजाप और दान के द्वारा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का संचार होता है। आने वाले 10 दिनों तक भक्त अपने कर्म, विचार और आचरण में पवित्रता बनाए रखते हैं, जिससे उनका जीवन आध्यात्मिक रूप से उन्नत और मंगलमय बनता है। यह अवसर वास्तव में साधना और सफलता का प्रतीक है।

ऐसे और भी संबंधित लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।

Raksha Bandhan 2025: 95 साल बाद बना ये खास योग, जानिए कब बांधें राखी और क्यों यह साल है खास

Leave a Comment