अलबेंडाजोल: भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में बच्चों और वयस्कों को पेट में कीड़ों (intestinal worms) की समस्या आम है। ये कीड़े जैसे – राउंडवर्म (Roundworm), हुकवर्म (Hookworm), पिनवर्म (Pinworm), टेपवर्म (Tapeworm) आदि आंतों में रहकर पोषण चूसते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इस समस्या के इलाज के लिए “अलबेंडाजोल” (Albendazole) एक प्रमुख और प्रभावशाली दवा है। यह दवा WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) द्वारा भी अनुशंसित की जाती है।

अलबेंडाजोल क्या है?
अलबेंडाजोल एक एंटीपैरासिटिक (Antiparasitic) दवा है जो पेट में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कीड़ों को मारने या निष्क्रिय करने का कार्य करती है। यह Benzimidazole वर्ग की दवा है, जो शरीर में परजीवी (parasites) के ऊर्जा चक्र को बाधित कर उन्हें मार देती है।
अलबेंडाजोल कैसे काम करता है?
अलबेंडाजोल की वैज्ञानिक कार्यविधि इस प्रकार है:
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यह β-ट्यूब्युलिन (β-tubulin) नामक प्रोटीन के साथ जुड़कर कीड़ों के कोशिकीय ढांचे (microtubules) को बाधित करता है।
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इससे कीड़ों की पोषण ग्रहण करने की क्षमता समाप्त हो जाती है और वे मर जाते हैं।
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यह उनके ऊर्जा उत्पादन (glucose uptake) को रोकता है जिससे वे कुछ ही दिनों में निष्क्रिय होकर शरीर से मल के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं।
किन रोगों में अलबेंडाजोल का उपयोग होता है?
अलबेंडाजोल निम्नलिखित कीड़ों के संक्रमण में उपयोगी होता है:
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Ascariasis (गोल कीड़ा)
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Hookworm infection (हुकवर्म)
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Pinworm (Threadworm) (सूई कीड़ा)
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Whipworm infection
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Tapeworm (फीताकृमि)
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Hydatid disease (कुत्ते के फीताकृमि से होने वाला संक्रमण)
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Neurocysticercosis (दिमाग में टेपवर्म का संक्रमण)
अलबेंडाजोल की खुराक और सेवन विधि:
(कब और कैसे लें?)
❖ बच्चों और वयस्कों के लिए सामान्य खुराक (deworming):
● 1 साल से ऊपर के बच्चों और वयस्कों को हर 6 महीने में 1 बार 400mg की एक गोली लेनी चाहिए।
● यह गोली खाने के बाद लेना अच्छा रहता है।
● इसे चबाकर या पानी के साथ निगला जा सकता है।
❖ गंभीर संक्रमण में (जैसे टेपवर्म या न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस):
● डॉक्टर की सलाह पर 3 से 28 दिनों तक नियमित खुराक दी जा सकती है।
● खुराक मरीज के वजन, उम्र और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है।
दवा लेते समय क्या सावधानियाँ रखें?
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यह दवा खाली पेट ना लें।
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गर्भवती महिलाएं इसे बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
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दवा के बाद कुछ हल्के दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे पेट दर्द, उल्टी, चक्कर, लेकिन ये सामान्य होते हैं।
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जिगर (liver) के मरीजों को यह दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

बच्चों के लिए क्या विशेष ध्यान दें?
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एक साल से छोटे बच्चों को अलबेंडाजोल नहीं देना चाहिए।
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स्कूलों में सामूहिक डी-वॉर्मिंग अभियान के दौरान भी बच्चों को यह दवा दी जाती है।
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WHO के अनुसार वर्ष में दो बार 1-19 वर्ष के बच्चों को Deworm करना आवश्यक है।
अलबेंडाजोल का इतिहास:
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अलबेंडाजोल को 1975 में पहली बार GlaxoSmithKline द्वारा पेटेंट किया गया।
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यह दवा सबसे पहले पशु चिकित्सा (veterinary use) में उपयोग की गई थी।
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1982 में इसे मनुष्यों के लिए भी प्रयोग में लाया गया।
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इसके बाद यह तेजी से पूरी दुनिया में पेट के कीड़ों के इलाज में उपयोग होने लगी।
भारत में:
भारत सरकार ने भी स्कूल स्तर पर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (National Deworming Day) की शुरुआत की है, जिसमें लाखों बच्चों को अलबेंडाजोल की खुराक दी जाती है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान (NDD) का उद्देश्य:
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भारत सरकार ने 2015 से प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी और 10 अगस्त को कृमि मुक्ति दिवस घोषित किया।
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इसमें 1-19 साल के बच्चों और किशोरों को निशुल्क अलबेंडाजोल दी जाती है।
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यह अभियान देश में कुपोषण और संक्रमण को कम करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

घरेलू लक्षण जिनसे पता चलता है कि पेट में कीड़े हो सकते हैं:
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भूख कम लगना या अचानक ज्यादा लगना
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पेट में मरोड़ या दर्द
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मल में कीड़े निकलना
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वजन कम होना
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गुदा में खुजली
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शरीर में कमजोरी, एनीमिया
यदि ऐसे लक्षण बार-बार दिखाई दें तो डॉक्टर से परामर्श लेकर अलबेंडाजोल लिया जा सकता है।
अलबेंडाजोल के विकल्प:
कुछ अन्य एंटीपैरासिटिक दवाएं भी हैं:
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मेबेंडाजोल (Mebendazole)
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आईवर्मेक्टिन (Ivermectin)
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पाइरैंटल पामोएट (Pyrantel Pamoate)
इनमें से कौन सी दवा लेनी है, यह संक्रमण के प्रकार और शरीर की स्थिति पर निर्भर करता है।
अलबेंडाजोल एक सुरक्षित, सस्ती और प्रभावी दवा है जो पेट के कीड़ों से मुक्ति दिलाने में बेहद कारगर है। यह न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है बल्कि सामूहिक रूप से कुपोषण और संक्रमण को भी रोकती है। बच्चों, विशेषकर ग्रामीण और निम्न आयवर्ग के बच्चों में यह दवा एक वरदान सिद्ध हुई है। अलबेंडाजोल को सही समय पर, सही मात्रा में, डॉक्टर की सलाह से लेने पर यह अत्यधिक लाभकारी होती है।
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