Rogan Josh रोगन जोश: भारत की पाक कला में अगर किसी व्यंजन को शाही और नफ़ासत से जोड़कर देखा जाता है तो उनमें सबसे पहले नाम आता है कश्मीरी रोगन जोश का। यह व्यंजन न केवल कश्मीर की पहचान है, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी सुगंध और स्वाद के लिए मशहूर है। “रोगन” का अर्थ है तेल या गाढ़ा लाल रंग और “जोश” का अर्थ है गर्माहट या तीव्रता। दोनों शब्द मिलकर इस डिश के रंग और स्वाद का परिचय देते हैं।

Rogan Josh, रोगन जोश का इतिहास:
रोगन जोश का इतिहास बहुत पुराना है और यह कई संस्कृतियों से होकर गुज़रा है। माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति फ़ारसी और मध्य एशियाई रसोई से हुई थी। 14वीं शताब्दी में जब मुग़ल बादशाह कश्मीर पहुँचे, तब वे अपने साथ यह व्यंजन भी लाए। कश्मीर की ठंडी जलवायु और वहां उपलब्ध मसालों ने इस व्यंजन को एक अलग ही पहचान दी।
कश्मीर में इसे वज़वान (कश्मीरी शाही भोज) का अहम हिस्सा माना जाता है। वज़वान, जो कि 36 पारंपरिक व्यंजनों का एक भव्य आयोजन होता है, उसमें रोगन जोश की मौजूदगी अनिवार्य होती है। इसे कश्मीर की मेहमाननवाज़ी और संस्कृति का प्रतीक भी कहा जाता है।
रोगन जोश की विशेषता:
रोगन जोश केवल एक मीट करी नहीं, बल्कि यह स्वाद, रंग और सुगंध का ऐसा मेल है जो इसे खास बनाता है। इसकी कुछ विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
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लाल रंग का जादू – इस डिश का लाल रंग रतनजोत और कश्मीरी लाल मिर्च से आता है, जो ज्यादा तीखी नहीं होती लेकिन व्यंजन को एक गहरा और आकर्षक रंग देती है।
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दही और मसालों का संतुलन – इसमें प्याज और टमाटर का उपयोग बहुत कम या न के बराबर होता है। स्वाद का मुख्य आधार दही और कश्मीरी मसाले होते हैं।
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सुगंधित मसाले – इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता, लौंग और सौंठ (सूखा अदरक) इसकी खुशबू को और गहरा बनाते हैं।
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धीमी आँच पर पकाना – रोगन जोश की असली पहचान इसकी “दम” तकनीक है, जिसमें मीट को धीमी आँच पर पकाया जाता है ताकि मसाले गहराई से उसमें समा जाएं।
बनाने की विधि (संक्षेप में):
सामग्री:
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मटन (बकरी या भेड़ का) – 500 ग्राम
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दही – 1 कप
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घी या सरसों का तेल – 3–4 बड़े चम्मच
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कश्मीरी लाल मिर्च – 2 बड़े चम्मच
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रतनजोत – थोड़ी सी (रंग के लिए)
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सौंठ पाउडर – 1 छोटा चम्मच
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सौंफ पाउडर – 1 बड़ा चम्मच
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इलायची, दालचीनी, लौंग – स्वाद अनुसार
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हींग – एक चुटकी
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नमक – स्वाद अनुसार
विधि:
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सबसे पहले मटन को धोकर अलग रख लें।
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पैन में घी या तेल गर्म करें और उसमें हींग, लौंग, दालचीनी, इलायची डालकर तड़का लगाएं।
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अब इसमें मटन डालें और हल्का सा भून लें।
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दही को अच्छी तरह फेंटकर इसमें मिलाएं और धीमी आँच पर पकने दें।
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अब सौंठ, सौंफ, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालें।
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रतनजोत को गर्म तेल में भिगोकर उसका रंग अलग से निकाल लें और फिर करी में डालें।
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धीमी आँच पर 40–45 मिनट तक पकाएँ जब तक मटन नर्म और रसदार न हो जाए।
तैयार है गरमागरम कश्मीरी रोगन जोश।
रोगन जोश और कश्मीर की संस्कृति:
कश्मीर में रोगन जोश को सिर्फ़ भोजन नहीं, बल्कि इज़्ज़त और परंपरा का हिस्सा माना जाता है। शादी-ब्याह, त्यौहार और खास मौकों पर यह व्यंजन ज़रूर परोसा जाता है। कश्मीर की वादियों में सर्द मौसम के दौरान यह व्यंजन शरीर को गर्म रखने में भी मदद करता है।
यह सिर्फ़ कश्मीरी पंडितों या मुसलमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कश्मीर में समान रूप से लोकप्रिय है। फर्क सिर्फ़ मसालों के प्रयोग में देखने को मिलता है। जैसे – पंडितों के रोगन जोश में प्याज और लहसुन का प्रयोग कम होता है, जबकि मुसलमानों के रोगन जोश में यह अधिक इस्तेमाल किया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय पहचान:
आज रोगन जोश केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कश्मीरी स्वाद का राजदूत बन चुका है। लंदन, न्यूयॉर्क और दुबई जैसे शहरों के रेस्टोरेंट्स में इसे खास डिश के रूप में परोसा जाता है। विदेशी लोग इसे कश्मीर की वादियों का स्वाद मानते हैं।
रोगन जोश केवल एक डिश नहीं बल्कि कश्मीर की परंपरा, संस्कृति और शाही स्वाद का प्रतीक है। इसका गहरा लाल रंग, सुगंधित मसाले और धीमी आँच पर पका हुआ मीट इसे भारतीय व्यंजनों में अलग पहचान दिलाता है। जब भी आप कश्मीर जाएं, तो वज़वान का आनंद लिए बिना आपकी यात्रा अधूरी है, और वज़वान में रोगन जोश के बिना कोई मज़ा नहीं।
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