नवरात्रि में क्या-क्या करें: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

नवरात्रि में क्या-क्या करें: नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है, जिसे साल में दो बार बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व माँ दुर्गा और उनके नौ रूपों की उपासना का प्रतीक है। नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है “नौ रातें”, और इन नौ दिनों तक भक्तजन उपवास रखते हैं, पूजन-अर्चन करते हैं और अपने मन, शरीर तथा आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं। नवरात्रि केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि यह आत्म-नियंत्रण, साधना और भक्ति का भी पर्व है।

नवरात्रि में क्या-क्या करें
              नवरात्रि में क्या-क्या करें

आइए विस्तार से जानते हैं कि नवरात्रि में क्या-क्या करना चाहिए:

घर की शुद्धि और सजावट:

नवरात्रि शुरू होने से पहले घर को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। यह माना जाता है कि स्वच्छ घर में देवी का वास होता है। घर में फूलों, आम के पत्तों और तोरण से सजावट करने का भी महत्व है। पूजा घर को विशेष रूप से स्वच्छ और सुसज्जित रखना चाहिए।

कलश स्थापना (घट स्थापना):

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विधान है। इसे शुभ मुहूर्त में किया जाता है। मिट्टी के बर्तन में जौ या गेहूँ बोकर उसके ऊपर कलश स्थापित किया जाता है। कलश पर नारियल और आम की पत्तियाँ रखकर उसे लाल कपड़े से सजाया जाता है। यह कलश माँ दुर्गा का प्रतीक माना जाता है।

माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा:

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है:

  1. शैलपुत्री

  2. ब्रह्मचारिणी

  3. चंद्रघंटा

  4. कूष्मांडा

  5. स्कंदमाता

  6. कात्यायनी

  7. कालरात्रि

  8. महागौरी

  9. सिद्धिदात्री

हर दिन देवी के अनुसार रंग और पूजा का महत्व होता है। भक्तजन उसी अनुसार देवी का पूजन और भजन-कीर्तन करते हैं।

उपवास और नियम:

नवरात्रि में उपवास रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कई लोग पूरे नौ दिन का व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग पहले और आखिरी दिन का उपवास करते हैं। उपवास के दौरान सात्त्विक भोजन करना चाहिए, जैसे – फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू का आटा, राजगिरा आदि। प्याज, लहसुन और मांसाहारी भोजन का सेवन वर्जित है।

पाठ और भजन:

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती, देवी भागवत और रामायण का पाठ करना शुभ माना जाता है। सुबह और शाम आरती करना चाहिए। साथ ही माँ के भजन और जागरण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

दान-पुण्य और सेवा:

नवरात्रि आत्मशुद्धि और परोपकार का पर्व है। इस दौरान गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान देना पुण्यकारी होता है। कन्या पूजन में छोटी बच्चियों को भोजन कराना और उपहार देना भी बेहद शुभ माना गया है।

ध्यान और साधना:

नवरात्रि केवल उपवास और पूजा का पर्व ही नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन का भी समय है। ध्यान, योग और प्रार्थना करने से मन को शांति मिलती है और आत्मबल बढ़ता है।

सजग रहना और बुराइयों से दूर रहना:

नवरात्रि में नकारात्मक आदतों जैसे झूठ बोलना, क्रोध करना, नशा करना, अपवित्र भोजन खाना आदि से बचना चाहिए। यह नौ दिन व्यक्ति को आत्मसंयम और अनुशासन का संदेश देते हैं।

कन्या पूजन (कन्या भोज):

नवरात्रि के अंत में, यानी अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन किया जाता है। इसमें 2 साल से लेकर 9 साल तक की कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं। यह नवरात्रि की सबसे प्रमुख परंपराओं में से एक है।

विजयदशमी का महत्व:

नवरात्रि के दसवें दिन विजयदशमी (दशहरा) मनाई जाती है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन रावण दहन किया जाता है और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं।

नवरात्रि भक्ति, अनुशासन और साधना का पर्व है। इन नौ दिनों में हमें अपने विचार, खान-पान और कर्मों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करके हम न केवल आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं, बल्कि हमारे जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा भी आती है। उपवास, दान और भक्ति के माध्यम से नवरात्रि को पवित्र और सार्थक बनाया जा सकता है।

👉 इस नवरात्रि माँ दुर्गा से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन से सभी दुख और बाधाओं को दूर करें और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।

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नवरात्रि में कन्या पूजन: विधि, महत्व और इतिहास

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