World Cancer Day 2026: भारत में हर 28 महिलाओं में से 1 को अपने जीवनकाल में ब्रेस्ट कैंसर का सामना करना पड़ सकता है। यह alarming तथ्य बताता है कि सही समय पर और सही इलाज कितना महत्वपूर्ण है। 2026 में वर्ल्ड कैंसर डे पर विशेषज्ञों ने बताया कि पर्सनलाइज्ड या व्यक्तिगत स्क्रीनिंग और ट्रीटमेंट प्लान मरीजों के लिए नए आशा के द्वार खोल सकते हैं।
विश्व स्तर पर ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर है। यह लगभग 1 में से 4 मामलों को बनाता है। विश्व कैंसर अनुसंधान निधि (World Cancer Research Fund) के अनुसार, पिछले वर्ष अकेले 2.3 मिलियन से अधिक महिलाओं को यह बीमारी हुई। भारत में स्थिति और भी गंभीर है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के अनुसार, 1 में से 28 भारतीय महिलाओं को जीवन में किसी समय ब्रेस्ट कैंसर का सामना करना पड़ सकता है।

भारत में ब्रेस्ट कैंसर की बढ़ती चुनौती:
द लांसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारतीय शहरों की युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। अक्सर यह बीमारी देर से पकड़ में आती है क्योंकि नियमित जांचें कई बार स्किप कर दी जाती हैं। इसके चलते व्यक्तिगत स्क्रीनिंग और इलाज की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
घर पर महिलाएं कैसे अनुमान लगा सकती हैं:
1. आइने के सामने विज़ुअल चेक करें:
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अपनी छाती के सामने सीधे खड़ी होकर देखें।
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ध्यान दें अगर किसी ब्रेस्ट का आकार या आकार बदल गया है।
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त्वचा पर धब्बे, गड्ढे, लालिमा, सूजन या असामान्य नालियाँ हैं या नहीं।
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निप्पल (स्तन का स्तनक) अगर असामान्य रूप से अंदर या बाहर आया है या कोई रिसाव है तो ध्यान दें।
2. हाथों का उपयोग कर महसूस करें (Palpation):
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लेटकर या बैठकर हर ब्रेस्ट को धीरे-धीरे महसूस करें।
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उंगलियों की पैटर्न को बदलते हुए सभी हिस्सों (ऊपरी, निचले, बाहरी और आंतरिक हिस्सों) को जांचें।
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किसी भी गांठ, सख्ती, गांठ जैसा हिस्सा या असामान्य लंप का पता चलने पर ध्यान दें।
3. निप्पल (स्तनक) निरीक्षण:
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देखें कि स्तनक से कोई असामान्य तरल (रक्त, पीला या दूध जैसा) निकल रहा है या नहीं।
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स्तनक की त्वचा पर सूखापन या घाव भी चिंता का संकेत हो सकता है।
4. रूटीन अपनाएं:
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मासिक चेकअप हर महीने करें, मासिक धर्म के बाद 3–5 दिन में सबसे सही समय होता है।
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यदि menopause हो चुकी हैं, तो हर महीने एक ही दिन तय करें।
5. क्या नोट करें
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किसी भी नई गांठ या असामान्य बदलाव को नोट करें।
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अगर बदलाव लगातार दो महीने तक दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
घर पर ध्यान देने योग्य चेतावनी संकेत:
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नई गांठ या कठोर हिस्सा
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स्तन में अचानक सूजन या रंग बदलना
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स्तनक में दर्द या नलियों का बदलना
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स्तनक से असामान्य तरल का निकलना
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त्वचा पर गड्ढा या छाले जैसा बदलाव
महत्वपूर्ण:
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घर पर अनुमान सिर्फ शुरुआती चेतावनी देता है।
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किसी भी संदेह होने पर तुरंत डॉक्टर या स्तन विशेषज्ञ (breast specialist) से संपर्क करें।
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समय पर जांच और मेमोग्राफी/अल्ट्रासाउंड बहुत जरूरी है।
पर्सनलाइज्ड ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग कैसे मदद कर सकती है?
2026 में प्रकाशित WISDOM स्टडी ने साबित किया कि “रिस्क-आधारित (risk-based)” स्क्रीनिंग पुराने वार्षिक मैमोग्राफी नियम से समान रूप से सुरक्षित और कहीं अधिक स्मार्ट है।
डॉक्टर अब महिलाओं के ब्रेस्ट डेन्सिटी, 76-वेरीअंट पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर (PRS) और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर स्क्रीनिंग करते हैं। इसका लाभ यह है कि:
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उच्च जोखिम वाली महिलाओं में उन्नत कैंसर को जल्दी पकड़ा जा सकता है।
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कम जोखिम वाली महिलाओं को अनावश्यक टेस्ट और चिंता से बचाया जा सकता है।
76-वेरीअंट पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर क्या है?
अधिकांश ब्रेस्ट कैंसर एक एकल उच्च जोखिम वाले जीन (जैसे BRCA) से नहीं होता। बल्कि यह छोटे, सामान्य आनुवंशिक विविधताओं (SNPs) के संयुक्त प्रभाव से होता है। इसे समझने के लिए DNA को एक विशाल पुस्तक मानें:
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Monogenic Risk (BRCA): किताब का एक पूरा अध्याय गायब या बड़ी गलती
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Polygenic Risk (PRS): किताब में कई छोटे-छोटे टाइपो (SNPs)
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76-वेरीअंट स्कोर: 76 विशेष SNPs का विश्लेषण करता है जो ब्रेस्ट कैंसर के लिए सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं
इस प्रकार, प्रत्येक महिला की अनुवांशिक संरचना के आधार पर जोखिम की पहचान की जा सकती है।
डॉक्टर का दृष्टिकोण: “Personal is the New Standard”
डॉ. गोपाल शर्मा, वाइस चेयरमैन, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली कहते हैं:
“स्टेज 1 और 2 कैंसर का समय बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान लक्ष्य केवल कैंसर को हटाना नहीं बल्कि उन्नत उपचार के जरिए पुनरावृत्ति का जोखिम कम करना भी है।”
डॉ. शर्मा बताते हैं कि हर महिला का कैंसर अलग होता है। अब ऐसे टूल्स हैं जो ट्यूमर के प्रकार, आकार, नोडल इनवॉल्वमेंट, उम्र और आनुवंशिकी के आधार पर इलाज को व्यक्तिगत बना सकते हैं। इससे मरीज न केवल जीवित रहते हैं बल्कि बेहतर जीवन गुणवत्ता के साथ स्वस्थ रह सकते हैं।
भारत में शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर देखभाल में व्यक्तिगत बदलाव:
वर्तमान में भारत में डॉक्टर निम्नलिखित तरीकों से पर्सनलाइज्ड इलाज लागू कर रहे हैं:
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ट्यूमर बायोलॉजी की डीकोडिंग
ब्रेस्ट कैंसर एक जैसी बीमारी नहीं है। यह HR+, HER2+, ट्रिपल नेगेटिव जैसी विभिन्न श्रेणियों में आता है। ट्यूमर के सिग्नेचर को टेस्ट करने से अनावश्यक इलाज और साइड इफेक्ट्स से बचाव होता है। -
पुनरावृत्ति जोखिम का आक्रामक प्रबंधन
शुरुआती पहचान के बावजूद, कुछ उच्च जोखिम वाले मामलों में कैंसर के लौटने का जोखिम 50% तक हो सकता है। व्यक्तिगत निगरानी, जीन परीक्षण और लाइफस्टाइल कोचिंग इस जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। -
एडवांस्ड, लाइफस्टाइल इंटीग्रेटेड थेरेपी
नए हार्मोन-आधारित दवाएं और टारगेटेड इम्यूनोथेरेपीज़ आम साइड इफेक्ट्स जैसे थकान और भूख में कमी को कम करती हैं। इससे महिला दिनचर्या को रोके बिना इलाज जारी रख सकती हैं। -
जीवन गुणवत्ता को मापदंड के रूप में लेना
सफलता अब केवल स्पष्ट स्कैन से नहीं मापी जाती। मानसिक स्वास्थ्य, माइंडफुलनेस और पीयर ग्रुप सपोर्ट भी व्यक्तिगत देखभाल में शामिल है।
WISDOM स्टडी (2025–2026) से स्पष्ट है कि जब स्क्रीनिंग और इलाज महिला की अनुवांशिक और जैविक बनावट के अनुसार तैयार किया जाता है, तो कैंसर को इतनी जल्दी पकड़ा जा सकता है कि मरीज की कहानी का अंत सफलता और जीवन के साथ हो।
भारत में महिलाओं के लिए यह सिर्फ चिकित्सा प्रगति नहीं बल्कि जीवन रक्षक आवश्यकता है। पर्सनलाइज्ड ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग और इलाज उच्च पुनरावृत्ति जोखिम और युवा आबादी की बढ़ती चुनौती का समाधान प्रस्तुत करते हैं।
⚠️ Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के लिए है। व्यक्तिगत सलाह या उपचार के लिए हमेशा विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करें।
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