Womens Grand Swiss 2025: शतरंज की दुनिया में यह हमेशा चर्चा का विषय रहता है कि कौनसा टूर्नामेंट फॉर्मेट सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि नॉकआउट फॉर्मेट, जैसे FIDE वर्ल्ड कप, सबसे टफ होता है। इसमें एक हार का मतलब सीधे बाहर होना होता है, लेकिन कभी-कभी वापसी का मौका भी मिलता है। वहीं, स्विस फॉर्मेट जैसे ग्रांड स्विस टूर्नामेंट में हर राउंड के बाद नए और इन-फॉर्म खिलाड़ियों से टकराना पड़ता है। अगला मुकाबला किससे होगा, यह पहले से कोई नहीं जानता।
इस तरह के टूर्नामेंट में जीत हासिल करना आसान नहीं होता। वहीं, राउंड रॉबिन स्टाइल जैसे कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में सभी खिलाड़ी एक-दूसरे से खेलते हैं, लेकिन तैयारी के लिए समय कम होता है। और सबसे चुनौतीपूर्ण होता है वर्ल्ड चैंपियनशिप का हेड-टू-हेड मुकाबला, जिसमें एक ही खिलाड़ी के खिलाफ लंबा प्लान बनाना पड़ता है।
असल में, वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए खिलाड़ियों को इन सभी तरह की चुनौतियों से गुजरना पड़ता है।
वैशाली रमेशबाबू ने Women’s Grand Swiss में बाज़ी मारी

सोमवार को समरकंद में आयोजित Women’s Grand Swiss में भारत की वैशाली रमेशबाबू ने जबरदस्त खेल दिखाया और एक बार फिर इस प्रतिष्ठित खिताब पर कब्जा किया। टूर्नामेंट स्विस फॉर्मेट में आयोजित किया गया था, जहां हर राउंड के बाद यह नहीं पता होता कि अगला मैच किसके खिलाफ होगा।
वैशाली ने इस चुनौती को बखूबी संभाला और पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए टाइटल अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही वह वुमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में क्वालिफाई कर गई हैं, जो वर्ल्ड चैंपियनशिप की राह खोलता है।
यह उनकी दूसरी कोशिश होगी वर्ल्ड चैंपियन बनने की, और यह साबित करता है कि वैशाली लगातार टॉप लेवल पर प्रदर्शन कर रही हैं।
परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ी वैशाली रमेशबाबू
वैशाली रमेशबाबू भारत की तीसरी महिला ग्रैंडमास्टर हैं और देश की सबसे मजबूत महिला शतरंज खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। हालांकि उनके करियर में कुछ उतार-चढ़ाव भी देखे गए हैं। कभी-कभी दबाव में आकर उनके प्रदर्शन में गिरावट देखी गई।
लेकिन उन्होंने अपने खेल में लगातार सुधार किया और अब दूसरी बार यह कठिन टूर्नामेंट जीतकर अपने कौशल और मानसिक मजबूती का परिचय दिया है। यह साफ संकेत है कि वैशाली में वह क्षमता है जो किसी भी बड़े मंच पर जीत दिला सकती है।
शतरंज के फॉर्मेट की चुनौती
वैशाली के लिए स्विस फॉर्मेट हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ग्रांड स्विस में हर राउंड में नए प्रतिद्वंद्वी होते हैं, जिससे कोई पैटर्न नहीं बनता। इस फॉर्मेट में खिलाड़ी को हर समय मानसिक रूप से तैयार रहना पड़ता है। वैशाली ने इस चुनौती का सामना करते हुए अपने खेल में संतुलन बनाए रखा और जीत हासिल की।
फिलहाल, वह वुमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस टूर्नामेंट की जीत उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए महत्वपूर्ण मौके देती है।
🇮🇳 Vaishali Rameshbabu is the Winner of the FIDE Women’s Grand Swiss 2025! 🏆
❗️She claims this title for the second consecutive time and secures her spot in the Women’s Candidates 2026!#FIDEGrandSwiss pic.twitter.com/RojzkmTaPf
— International Chess Federation (@FIDE_chess) September 15, 2025
शॉएब अख्तर ने क्रिकेट में लिया फैसला लेकर उठाया सवाल
वैशाली की जीत के अलावा क्रिकेट की दुनिया में भी चर्चा रही। पूर्व पाकिस्तानी तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने सलमान अली आग़ा के उस फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने एशिया कप 2025 में भारत के खिलाफ पहले बल्लेबाज़ी करने का निर्णय लिया।
मैदान पर यह फैसला उल्टा पड़ा, क्योंकि पाकिस्तानी बल्लेबाज भारत के स्पिनरों के सामने टिक नहीं सके। पूरे 20 ओवर में पाकिस्तान की टीम केवल 127/9 रन ही बना सकी। इस दौरान साहिबज़ादा फरहान ने 40 रन बनाकर अपनी टीम का नाम रोशन किया।
शोएब अख्तर ने सोशल मीडिया और मीडिया इंटरव्यू में कहा कि पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला जोखिम भरा था और इससे टीम को नुकसान हुआ। इस चर्चा ने क्रिकेट फैंस के बीच हलचल मचा दी।
वैशाली और भारतीय शतरंज की नई उड़ान
वैशाली रमेशबाबू की यह जीत सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय महिला शतरंज की ताकत का भी परिचायक है। पिछले कुछ सालों में भारत की महिला खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। वैशाली की लगातार सफलता से नई पीढ़ी के खिलाड़ियों में उत्साह और प्रेरणा बढ़ रही है।
विश्व स्तरीय टूर्नामेंट में लगातार प्रदर्शन करना आसान नहीं होता। इसके लिए तकनीकी कौशल के साथ मानसिक मजबूती और रणनीति की गहरी समझ भी आवश्यक है। वैशाली ने यह साबित किया कि भारतीय महिला खिलाड़ी किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं और बड़े मंच पर चमक सकती हैं।
भविष्य की उम्मीदें
अब वैशाली रमेशबाबू का ध्यान वुमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट की तैयारी पर रहेगा। इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप की राह पर ले जाएगा। भारतीय शतरंज फैंस की नजरें वैशाली पर टिकी हैं और उम्मीद है कि वह इस चुनौती को भी पार करेंगी।
वैशाली रमेशबाबू ने Women’s Grand Swiss जीतकर यह साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत, रणनीति और मानसिक मजबूती किसी भी चुनौती को पार करने में मदद करती है। शतरंज के हर फॉर्मेट की अपनी कठिनाइयां होती हैं, लेकिन वैशाली ने सभी चुनौतियों का सामना करते हुए यह साबित किया कि वह किसी भी बड़े मंच पर जीत हासिल कर सकती हैं।
साथ ही, क्रिकेट में सलमान अली आग़ा के फैसले और शोएब अख्तर की आलोचना ने यह दिखाया कि खेल के हर क्षेत्र में फैसले महत्वपूर्ण होते हैं और उनका प्रभाव परिणामों पर सीधे पड़ता है।
आज वैशाली की जीत और क्रिकेट में उठी चर्चाओं ने खेल प्रेमियों के लिए एक रोमांचक दिन बना दिया।
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