ट्रंप के सबसे भरोसेमंद साथी Sergio Gor बने भारत में नए अमेरिकी राजदूत

भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 39 वर्षीय Sergio Gor को भारत में अमेरिका का नया राजदूत नियुक्त करने का ऐलान किया है। गोर को ट्रंप का सबसे भरोसेमंद सहयोगी और व्हाइट हाउस का इनसाइडर माना जाता है। उनकी यह नियुक्ति न केवल भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से अहम है, बल्कि ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक सोच को भी दर्शाती है।

कौन हैं Sergio Gor?

Sergio Gor

Sergio Gor का जन्म उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में हुआ था, जब वह सोवियत संघ का हिस्सा था। उनका असली नाम गोरखोव्स्की है। गोर मात्र 12 साल की उम्र में यानी 1999 में अपने परिवार के साथ अमेरिका आ गए थे। उनके पिता सोवियत सैन्य विमानों के डिजाइन इंजीनियर थे और मां इस्राइली मूल की बताई जाती हैं। यही वजह है कि गोर बहुसांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके भीतर बचपन से ही वैश्विक दृष्टिकोण रहा है।

अमेरिका आने के बाद Sergio Gor ने लॉस एंजेलिस में पढ़ाई की और आगे की उच्च शिक्षा जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से पूरी की। यहीं से उनका रुझान रिपब्लिकन राजनीति की ओर बढ़ा और वे कंजरवेटिव सर्कल्स में सक्रिय हो गए।

शुरुआती राजनीतिक सफर

Sergio Gor का राजनीतिक करियर रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों के साथ शुरू हुआ। उन्होंने स्टीव किंग और मिशेल बाखमैन जैसे रिपब्लिकन नेताओं के प्रवक्ता के रूप में काम किया। इसके बाद वे सीनेटर रैंड पॉल के दफ्तर से जुड़े और डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ तक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने रिपब्लिकन राजनीति की बारीकियों को समझा और अपनी पकड़ मजबूत की।

ट्रंप कैंप से उनकी नजदीकी 2020 के चुनावों के दौरान बढ़ी। वे धीरे-धीरे MAGA (Make America Great Again) मूवमेंट का हिस्सा बने और डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी रणनीतियों और अभियानों में अहम भूमिका निभाई।

ट्रंप के सबसे भरोसेमंद साथी

Sergio Gor

सर्जियो गोर को ट्रंप का भरोसेमंद साथी इसलिए भी माना जाता है क्योंकि उन्होंने न केवल उनके चुनाव अभियानों को संभाला, बल्कि ट्रंप की किताबों को पब्लिश करने में भी अहम भूमिका निभाई। इतना ही नहीं, उन्होंने ट्रंप के सबसे बड़े सुपर PAC को भी संचालित किया। यही वजह है कि ट्रंप उन्हें अपने सबसे बड़े सहयोगियों में गिनते हैं और अब भारत जैसे अहम देश की जिम्मेदारी भी उन्हीं को सौंपी है।

गोर को व्हाइट हाउस में लो-प्रोफाइल लेकिन बेहद प्रभावशाली इनसाइडर माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने बहुत कम समय में करीब 4,000 लोगों को सरकारी विभागों में नियुक्त कर ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे को आगे बढ़ाया।

भारत से गोर का पहला सीधा नाता

दिलचस्प बात यह है कि Sergio Gor का भारत से अब तक कोई सीधा संबंध नहीं रहा है। यही वजह है कि उनकी नियुक्ति को लेकर विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है। लेकिन यह भी सच है कि अमेरिका-भारत संबंध इस समय वैश्विक राजनीति के केंद्र में हैं। चाहे रक्षा सहयोग हो, व्यापारिक रिश्ते हों या इंडो-पैसिफिक रणनीति, अमेरिका भारत को अपने सबसे अहम साझेदारों में देखता है।

गोर की नियुक्ति इस लिहाज से भी अहम है कि भारत न केवल दक्षिण एशिया बल्कि मध्य एशिया में भी अमेरिका की नीति का केंद्र है। ऐसे में गोर का रोल सिर्फ राजदूत का ही नहीं होगा, बल्कि उन्हें साउथ और सेंट्रल एशिया मामलों के लिए स्पेशल एन्वॉय (विशेष दूत) की जिम्मेदारी भी मिल सकती है।

मौजूदा स्थिति और चुनौतियां

भारत और अमेरिका के बीच संबंध हाल के वर्षों में लगातार गहरे हुए हैं। रक्षा सौदों से लेकर तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक में चीन की चुनौती तक, दोनों देशों का सहयोग कई मोर्चों पर बढ़ रहा है। हालांकि, कुछ मुद्दों पर मतभेद भी बने हुए हैं, जैसे व्यापारिक टैरिफ, वीजा पॉलिसी और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अलग-अलग रुख।

गोर को इन चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना होगा। उनकी नियुक्ति से यह संकेत भी मिलता है कि ट्रंप भारत को लेकर एक व्यावहारिक और रणनीतिक अप्रोच अपनाना चाहते हैं।

एरिक गार्सेटी की जगह लेंगे गोर

सर्जियो गोर अब तक के सबसे युवा अमेरिकी राजदूत होंगे। वे डेमोक्रेटिक अपॉइंटी एरिक गार्सेटी की जगह लेंगे, जो बाइडन कार्यकाल खत्म होने के बाद कैलिफोर्निया लौट गए हैं। गार्सेटी के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों में कई महत्वपूर्ण कदम उठे, लेकिन अब गोर को इन रिश्तों को नई दिशा देनी होगी।

सीनेट की मंजूरी के बाद अगला कदम

हालांकि सर्जियो गोर की नियुक्ति का ऐलान हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने के लिए अमेरिकी सीनेट की मंजूरी जरूरी है। अगर सीनेट इस फैसले पर मुहर लगा देती है, तो गोर न केवल भारत में राजदूत होंगे बल्कि साउथ और सेंट्रल एशिया मामलों के लिए विशेष दूत की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।

गोर का बयान

नियुक्ति के ऐलान के बाद Sergio Gor ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा:

“मैं राष्ट्रपति ट्रंप का बेहद आभारी हूं, जिन्होंने मुझ पर इतना भरोसा किया और मुझे भारत का अगला अमेरिकी राजदूत और साउथ व सेंट्रल एशिया मामलों का विशेष दूत नियुक्त किया। अमेरिका की जनता की सेवा करना और इस प्रशासन का हिस्सा होना मेरे लिए गर्व की बात है। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान होगा कि मैं भारत में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करूं।”

भारत-अमेरिका रिश्तों का भविष्य

सर्जियो गोर की नियुक्ति भारत-अमेरिका संबंधों के लिए कई मायनों में अहम होगी। भारत इस समय अमेरिका के लिए रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। चाहे चीन को लेकर चिंताएं हों या तकनीकी सहयोग, दोनों देश एक-दूसरे पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं।

गोर की भूमिका इस लिहाज से महत्वपूर्ण होगी कि वे ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते हैं और उनकी नियुक्ति से यह संकेत जाता है कि ट्रंप प्रशासन भारत को लेकर गंभीर है।

Sergio Gor की कहानी प्रवासी पृष्ठभूमि से अमेरिकी सत्ता के केंद्र तक पहुंचने की है। उजबेकिस्तान में जन्मे और अमेरिका में पले-बढ़े गोर अब भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनका अनुभव, ट्रंप से करीबी और राजनीतिक पकड़ उन्हें इस पद के लिए खास बनाती है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में वे किस तरह संबंधों को आगे बढ़ाते हैं और चुनौतियों का सामना करते हैं।

भारत और अमेरिका के रिश्तों में आने वाले वर्षों में गोर की भूमिका बेहद निर्णायक होगी। उनकी नियुक्ति से न केवल नई संभावनाओं के दरवाजे खुलेंगे, बल्कि भारत-अमेरिका साझेदारी को नई ऊर्जा भी मिलेगी।

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