Vice President Election 2025: राधाकृष्णन बनाम सुदर्शन, कब और कैसे होगी वोटिंग, जानें पूरी प्रक्रिया

Vice President Election 2025: भारत का राजनीतिक परिदृश्य एक बार फिर से बेहद अहम मोड़ पर है। सात सितंबर 2025 यानी मंगलवार का दिन खास होने वाला है, जब देश के 15वें उपराष्ट्रपति के लिए मतदान होगा। इस चुनाव में सत्ता पक्ष की तरफ से एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन मैदान में हैं, जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर से पी. सुदर्शन रेड्डी चुनौती पेश कर रहे हैं।

जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से 21 जुलाई को अचानक इस्तीफा देने के बाद उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया था और अब नए चुनाव के जरिए देश को 15वां उपराष्ट्रपति मिलने जा रहा है। इस बार का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि दोनों गठबंधनों के बीच मुकाबला कड़ा माना जा रहा है।

कहां और कब होगी वोटिंग? | Vice President Election 2025

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उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान संसद भवन में होगा। राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। मतदान संसद भवन के कमरा नंबर एफ-101 “वसुधा” में सुबह 10 बजे से शुरू होकर शाम पांच बजे तक चलेगा।

शाम छह बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी और संभावना है कि नतीजे उसी रात घोषित कर दिए जाएंगे। यानी मंगलवार शाम तक देश के नए उपराष्ट्रपति का नाम साफ हो जाएगा।

कौन-कौन डाल सकेगा वोट?

भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव आम जनता के वोट से नहीं होता। इसके लिए संसद का विशेष निर्वाचक मंडल वोट डालता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के निर्वाचित और नामित सदस्य शामिल होते हैं।

वर्तमान स्थिति के अनुसार—

  • राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य (छह सीटें खाली हैं)

  • राज्यसभा के 12 नामित सदस्य

  • लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (एक सीट खाली है)

कुल मिलाकर निर्वाचक मंडल में 788 सदस्य होते हैं, लेकिन इस बार 781 सदस्य ही वोट डालेंगे।

वोटिंग का तरीका क्या है?

उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग का तरीका बेहद खास होता है। इसके लिए सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम (STVS) अपनाया जाता है।

  • मतपत्र सफेद रंग का होता है।

  • उस पर उम्मीदवारों के नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखे होते हैं।

  • सांसदों को अपनी पसंद के हिसाब से 1, 2, 3… इस तरह प्राथमिकता दर्ज करनी होती है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी सांसद की पहली पसंद राधाकृष्णन हैं तो वह उनके नाम के आगे “1” लिखेगा। अगर दूसरी पसंद सुदर्शन हैं तो उनके नाम के आगे “2” लिखा जाएगा।

यह प्रक्रिया पूरी तरह गुप्त होती है। वोट डालते समय सांसद किसी की मदद नहीं ले सकता। केवल वही सांसद, जो प्रिवेंटिव डिटेंशन (जेल) में हों, उन्हें डाक से वोट डालने की अनुमति होती है। इस बार शेख अब्दुल रशीद (बारामूला) और अमृतपाल सिंह (खडूर साहिब) जेल में हैं, इसलिए वे पोस्टल बैलेट से वोट डाल सकेंगे।

वोटों की गिनती कैसे होती है?

गिनती का तरीका भी आम चुनाव से अलग होता है।

  1. सबसे पहले वैध मतों की छंटनी होती है।
  2. फिर पहली प्राथमिकता वाले वोट गिने जाते हैं।
  3. अगर किसी उम्मीदवार को कुल वैध मतों का 50% से ज्यादा मिल जाता है, तो वही विजेता घोषित हो जाता है।
  4. अगर पहले चरण में कोई बहुमत नहीं पा सका, तो सबसे कम वोट वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है और उसके वोट अगली प्राथमिकता के अनुसार दूसरे उम्मीदवार को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।
  5. यह प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक किसी उम्मीदवार को बहुमत न मिल जाए।

क्या सांसद दल-बदल कानून से बंधे होते हैं?

उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति का चुनाव किसी पार्टी सिंबल पर नहीं लड़ा जाता। किसी भी पार्टी को अपने सांसदों पर व्हिप जारी करने का अधिकार नहीं होता। यानी सांसद अपनी मर्जी से किसी भी उम्मीदवार को वोट दे सकते हैं।

इस चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता, इसलिए अगर कोई सांसद विपक्षी उम्मीदवार को वोट दे भी देता है तो उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

उम्मीदवारों की जमानत राशि कब जब्त होती है?

उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करने के समय उम्मीदवारों को 15 हजार रुपये की जमानत राशि जमा करनी होती है। अगर चुनाव में किसी उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से भी कम वोट मिलते हैं, तो उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है।

नतीजों को चुनौती कैसे दी जा सकती है?

अगर किसी उम्मीदवार या निर्वाचक मंडल के 10 से ज्यादा सदस्य चुनाव परिणाम से असंतुष्ट हों, तो वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं।
लेकिन इसके लिए एक शर्त है— नतीजे घोषित होने के 30 दिन के भीतर ही याचिका दाखिल करनी होगी।

उपराष्ट्रपति को क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?

उपराष्ट्रपति को देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद माना जाता है। उन्हें कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं—

  • उपराष्ट्रपति को सीधे तौर पर वेतन नहीं मिलता, बल्कि राज्यसभा के पदेन सभापति के तौर पर उन्हें वेतन दिया जाता है।
  • 2018 में संशोधन के बाद उपराष्ट्रपति को महीने में 4 लाख रुपये वेतन मिलता है।
  • मुफ्त आवास, दैनिक भत्ता, ट्रैवल अलाउंस, रेल व हवाई यात्रा की सुविधा।
  • लैंडलाइन और मोबाइल फोन, मुफ्त मेडिकल सुविधाएं।
  • सुरक्षा के लिए 24 घंटे बड़ा स्टाफ और निजी सचिवालय।

रिटायरमेंट के बाद की सुविधाएं

  • उपराष्ट्रपति को उनके वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता है, यानी लगभग 2 लाख रुपये मासिक।
  • टाइप-8 बंगला, एक प्राइवेट सेक्रेटरी, एक अतिरिक्त निजी सचिव, एक निजी सहायक।
  • एक डॉक्टर, एक नर्सिंग अधिकारी और चार नर्स/अटेंडेंट।
  • निधन की स्थिति में जीवनसाथी को आजीवन टाइप-7 आवास का अधिकार।

भारत में अब तक के उपराष्ट्रपति

भारत के इतिहास में अब तक 14 उपराष्ट्रपति रह चुके हैं। सबसे पहले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इस पद पर आसीन हुए थे। उसके बाद डॉ. जाकिर हुसैन, बी.डी. जत्ती, एम. हिदायतुल्लाह, आर. वेंकटरमण, शंकर दयाल शर्मा, के.आर. नारायणन, कृष्णकांत, भैरोसिंह शेखावत, हामिद अंसारी, एम. वेंकैया नायडू और जगदीप धनखड़ तक यह परंपरा चली है।

यह पद न सिर्फ संवैधानिक रूप से अहम है बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्सर उपराष्ट्रपति आगे चलकर राष्ट्रपति भी बनते हैं।

इस बार चुनाव क्यों खास है?

यह चुनाव कई मायनों में खास है।

  • सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अनुभवी और लोकप्रिय नेताओं को उम्मीदवार बनाया है।
  • सी.पी. राधाकृष्णन लंबे समय से भाजपा और आरएसएस से जुड़े रहे हैं और तमिलनाडु की राजनीति में उनकी गहरी पकड़ है।
  • वहीं पी. सुदर्शन रेड्डी दक्षिण भारत से ही आते हैं और विपक्ष उन्हें एक मजबूत विकल्प मान रहा है।

दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बना है। इसके अलावा, संसद में मौजूदा गणित को देखते हुए एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन विपक्ष भी एकजुट होकर कड़ा मुकाबला देने की कोशिश कर रहा है।

सात सितंबर का दिन भारतीय राजनीति के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। संसद भवन के अंदर होने वाली यह वोटिंग यह तय करेगी कि देश का नया उपराष्ट्रपति कौन होगा—सी.पी. राधाकृष्णन या पी. सुदर्शन रेड्डी।

यह चुनाव न सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और विविधता का भी परिचायक है। वोटिंग, गिनती और नतीजों की पूरी प्रक्रिया एक पारदर्शी और निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रणाली की मिसाल है।

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