Vice President Election 2025: भारत का लोकतंत्र अपनी विविधता और संवैधानिक ढांचे की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है। इसी ढांचे में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव सिर्फ संवैधानिक औपचारिकता नहीं बल्कि देश की राजनीतिक धड़कन को भी दर्शाता है। इस बार 2025 का उपराष्ट्रपति चुनाव कई मायनों में खास है।
एक तरफ विपक्षी INDIA गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है, वहीं सत्तारूढ़ एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और वरिष्ठ भाजपा नेता सी. पी. राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है। यह मुकाबला दक्षिण भारत से आए दो बड़े नामों के बीच है, इसलिए इसे “दक्षिण की टक्कर” भी कहा जा रहा है।
चुनावी कैलेंडर: तारीखें और प्रक्रिया | Vice President Election 2025
- नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख: 21 अगस्त 2025
- नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख: 25 अगस्त 2025
- मतदान और मतगणना: 9 सितंबर 2025
यह चुनाव संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों द्वारा किया जाएगा। इसमें राज्यसभा के नामांकित सदस्य भी वोट डालते हैं। वोटिंग सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली से गुप्त मतदान में होती है।
उम्मीदवारों की प्रोफ़ाइल
बी. सुदर्शन रेड्डी (INDIA गठबंधन)
- पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज, कार्यकाल 2007 से 2011।
- गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और गोवा के पहले लोकायुक्त रहे।
- तेलंगाना के निवासी, ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई।
- न्यायपालिका में अपने निष्पक्ष और बेबाक फैसलों के लिए प्रसिद्ध।
- विपक्ष ने उन्हें “संविधान की रक्षा का प्रतीक” बताकर मैदान में उतारा।
सी. पी. राधाकृष्णन (NDA उम्मीदवार)
- भाजपा के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु से दो बार लोकसभा सांसद।
- महाराष्ट्र के मौजूदा राज्यपाल, इससे पहले झारखंड और पुडुचेरी के भी राज्यपाल रह चुके।
- संगठन में गहरी पैठ और भाजपा के दक्षिण भारत अभियान के महत्वपूर्ण चेहरे।
- एनडीए ने उन्हें राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक कौशल की वजह से चुना।
नामांकन का माहौल
21 अगस्त को बी. सुदर्शन रेड्डी ने संसद भवन जाकर अपना नामांकन दाखिल किया। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कई विपक्षी नेता उनके साथ मौजूद रहे। विपक्ष ने इसे “संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई” बताते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि विचारधारा का संघर्ष है।
इसके पहले 20 अगस्त को सीपी राधाकृष्णन ने अपना नामांकन दाखिल किया। उनके प्रस्तावक खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। नामांकन के दौरान रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और कई एनडीए नेता भी मौजूद रहे। इस तरह सत्ता पक्ष ने अपनी ताकत और एकजुटता का स्पष्ट संकेत दिया।
चुनावी रणनीतियाँ और समर्थन
विपक्ष का दृष्टिकोण
INDIA गठबंधन ने सुदर्शन रेड्डी को यह कहते हुए आगे किया कि उन्हें संसद की गरिमा बहाल करनी है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाना है। कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह चुनाव सिर्फ पद का नहीं बल्कि देश के संविधान और न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सवाल है।
एनडीए का दृष्टिकोण
एनडीए राधाकृष्णन को अनुभवी राजनेता और संगठनात्मक क्षमता वाला चेहरा मानकर चल रहा है। उनके समर्थन में भाजपा के अलावा एनडीए की सभी सहयोगी पार्टियां मजबूती से खड़ी हैं। शिवसेना और अन्य क्षेत्रीय दलों से भी समर्थन की कोशिशें हो रही हैं।
सियासी समीकरण
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एनडीए के पास संख्यात्मक बढ़त है। संसद में भाजपा और सहयोगी दलों की ताकत विपक्ष से कहीं ज्यादा है।
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विपक्ष का मकसद जीतना नहीं, बल्कि संदेश देना है। विपक्ष इस चुनाव के जरिए जनता के सामने यह बात रखना चाहता है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहा है।
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दक्षिण भारत पर फोकस: दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं, इसलिए यह चुनाव क्षेत्रीय राजनीति को भी नया संदेश दे सकता है।
संसद में ताकत का गणित
उपराष्ट्रपति का चुनाव सांसदों द्वारा किया जाता है। वर्तमान में एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए राजनीतिक गणित यह कहता है कि सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय है।
हालांकि, विपक्ष का मानना है कि भले ही परिणाम पहले से तय हो, लेकिन उनके उम्मीदवार के जरिए जनता तक एक वैचारिक संदेश पहुँचेगा।
चुनाव को लेकर बयानबाज़ी
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सुदर्शन रेड्डी: “यह चुनाव केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की आत्मा का चुनाव है। संसद को संवाद और गरिमा का केंद्र बनाना मेरी प्राथमिकता होगी।”
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सीपी राधाकृष्णन: “यह पद मेरे लिए सेवा का अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी और एनडीए नेतृत्व ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, मैं उसे पूरा करूंगा।”
जनता और मीडिया की नजर
मीडिया इस चुनाव को “संवैधानिक टकराव” कह रहा है। जनता की नजर में भी यह मुकाबला दिलचस्प है क्योंकि एक तरफ निष्पक्ष न्यायाधीश और दूसरी तरफ अनुभवी राजनेता आमने-सामने हैं।
चुनावी तुलना – एक नजर
पहलू | बी. सुदर्शन रेड्डी (विपक्ष) | सी. पी. राधाकृष्णन (एनडीए) |
---|---|---|
पृष्ठभूमि | न्यायपालिका, सुप्रीम कोर्ट जज | राजनीति, सांसद और राज्यपाल |
ताकत | संवैधानिक छवि, निष्पक्षता | संगठनात्मक अनुभव, राजनीतिक समर्थन |
रणनीति | लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश | एनडीए का बहुमत और गठबंधन की मजबूती |
संभावना | जीत मुश्किल, लेकिन वैचारिक बढ़त | जीत लगभग तय, राजनीतिक स्थिरता |
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 भारतीय राजनीति के लिए सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक गहरा संदेश है। सुदर्शन रेड्डी विपक्ष की ओर से संविधान की रक्षा और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बनकर सामने आए हैं। वहीं सीपी राधाकृष्णन एनडीए की राजनीतिक शक्ति और संगठनात्मक एकजुटता का चेहरा हैं।
हालांकि संख्यात्मक समीकरण एनडीए के पक्ष में हैं और राधाकृष्णन की जीत लगभग निश्चित मानी जा रही है, लेकिन यह चुनाव विपक्ष को जनता तक अपनी आवाज़ पहुँचाने का बड़ा मंच देता है।
9 सितंबर 2025 को जब नतीजे आएंगे, तो यह सिर्फ नया उपराष्ट्रपति तय नहीं करेगा बल्कि यह भी बताएगा कि आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति किस विचारधारा की छाप लिए आगे बढ़ेगी।
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