Uttarakhand News: दिवाली नज़दीक है, मिठाइयों की खुशबू हर गली में फैल रही है। लेकिन इस मिठास के बीच मिलावटखोरी का जहर भी धीरे-धीरे बाजार में घुल रहा है। इसे रोकने के लिए उत्तराखंड फूड डिपार्टमेंट पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राज्य के कई जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है, जहाँ से नकली मावा और पनीर की बड़ी खेप बरामद की गई है।
त्योहारी सीजन में सख्त हुआ फूड विभाग का पहरा | Uttarakhand News
हर साल दीपावली के मौसम में मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इस मौके का फायदा उठाते हुए कुछ मिलावटखोर व्यापारी सस्ते और हानिकारक पदार्थों से नकली मावा और पनीर तैयार कर बाजार में बेच देते हैं।
इस बार फूड विभाग ने पहले से तैयारी कर रखी थी। अपर आयुक्त खाद्य ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में एक स्पेशल ड्राइव चलाई जा रही है जिसमें पूरे उत्तराखंड के बाजारों, मिठाई की दुकानों और डेयरी इकाइयों पर अचानक निरीक्षण किए जा रहे हैं।
नकली मावा और पनीर जब्त, मौके पर नष्ट

देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई दुकानों और गोदामों से नकली मावा और पनीर जब्त किया है।
जांच में पाया गया कि कुछ व्यापारी सिंथेटिक दूध, स्टार्च और डिटर्जेंट जैसी चीज़ों का इस्तेमाल कर मावा तैयार कर रहे थे। यह मावा इंसान की सेहत के लिए बेहद हानिकारक पाया गया। जब्त किया गया सारा मावा और पनीर मौके पर नष्ट कर दिया गया ताकि यह दोबारा बाजार में न पहुंचे।
बॉर्डर पर बढ़ी निगरानी: बाहरी राज्यों से आने वाले माल की जांच
त्योहारी सीजन में नकली खाद्य सामग्री अक्सर बाहरी राज्यों से आती है। इस बार उत्तराखंड फूड डिपार्टमेंट ने सीमाओं पर भी कड़ी निगरानी बढ़ा दी है।
दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाले दूध, मावा और पनीर की हर खेप की जांच की जा रही है। सीमावर्ती चेकपोस्ट पर क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) तैनात की गई हैं जो संदिग्ध ट्रकों को रोककर मौके पर जांच कर रही हैं।
मिठाई की दुकानों पर सख्त कार्रवाई
फूड डिपार्टमेंट की टीमें लगातार मिठाई की दुकानों पर औचक निरीक्षण कर रही हैं। कई दुकानों से मिठाई के सैंपल लिए गए हैं। कुछ जगहों पर पुराने मावे का इस्तेमाल करते हुए नए बैच की मिठाई बनाते पाए गए दुकानदारों को चेतावनी दी गई है।
विभाग ने दुकानदारों को निर्देश दिया है कि वे स्वच्छता और स्टोरेज मानकों का पालन करें और एक्सपायर्ड मावा या पनीर का प्रयोग न करें।
दीपावली तक चलेगा अभियान, ढिलाई नहीं बरती जाएगी
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने साफ कहा है कि विभाग दीपावली तक अभियान और तेज करेगा। सभी जिलों के खाद्य निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना रिपोर्ट पेश करें और किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतें।
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए है और मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
उपभोक्ताओं से सतर्क रहने की अपील
फूड डिपार्टमेंट ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे खाद्य पदार्थ खरीदते समय सावधानी बरतें। मावा, पनीर या मिठाई खरीदते वक्त हमेशा एफएसएसएआई मार्क, मैन्युफैक्चरिंग डेट और दुकानदार का लाइसेंस नंबर देखें।
अगर किसी को कोई संदिग्ध सामग्री दिखाई देती है, तो तुरंत फूड सेफ्टी हेल्पलाइन या जिला खाद्य विभाग में शिकायत दर्ज कराएं। इससे विभाग को कार्रवाई में मदद मिलेगी और मिलावटखोरों पर नकेल कसी जा सकेगी।
छोटे व्यापारियों की चिंता भी बढ़ी
विभाग की इस कार्रवाई से जहां उपभोक्ताओं में राहत है, वहीं कुछ छोटे व्यापारियों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सख्ती के कारण ईमानदार दुकानदारों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य केवल मिलावटखोरों पर कार्रवाई करना है। साफ-सुथरा व्यापार करने वाले दुकानदारों को परेशान नहीं किया जाएगा।
क्यों बढ़ती है मिलावटखोरी?
त्योहारों में मिठाई की मांग बढ़ने के साथ-साथ असली मावे और पनीर की आपूर्ति कम पड़ जाती है। ऐसे में कुछ लोग नकली मावा बनाने लगते हैं जो सस्ता पड़ता है लेकिन सेहत के लिए खतरनाक होता है।
ऐसे नकली उत्पादों में रासायनिक तत्व, सिंथेटिक दूध, डिटर्जेंट और स्टार्च का इस्तेमाल किया जाता है। इनका सेवन करने से फूड पॉइजनिंग, किडनी और लीवर डैमेज जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
नकली मावा और पनीर की पहचान ऐसे करें
असली मावा को जब उंगलियों से मसलते हैं तो उसमें हल्की चिकनाई महसूस होती है जबकि नकली मावा चिपचिपा होता है।
पनीर की पहचान करने के लिए उसे गर्म पानी में डालें — अगर वह टूटने लगे या रबर जैसा हो जाए तो वह नकली है।
मावा को पानी में उबालने पर अगर सफेद झाग निकले तो उसमें मिलावट है। ये छोटे-छोटे टेस्ट आपको सेहतमंद रहने में मदद कर सकते हैं।
जांच अब लैब तक पहुंची
राज्य में एकत्र किए गए सभी सैंपल अब खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। रिपोर्ट आने के बाद जिन व्यापारियों के खिलाफ ठोस सबूत मिलेंगे, उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे और एफएसएसएआई एक्ट के तहत कड़ी सजा दी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि कुछ सैंपल केंद्रीय फूड रिसर्च संस्थान को भी भेजे गए हैं ताकि जांच निष्पक्ष हो सके।
जनता में बढ़ रही जागरूकता
उत्तराखंड के कई जिलों में अब उपभोक्ता भी जागरूक हो गए हैं। लोग मिठाई खरीदते समय एफएसएसएआई नंबर देख रहे हैं और पैक्ड प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कई दुकानदारों ने भी अपने स्टॉल पर “मिलावट मुक्त मिठाई उपलब्ध है” के बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं ताकि ग्राहक उन पर भरोसा कर सकें।
विभाग का संदेश: सुरक्षित मिठास, खुशहाल त्योहार
फूड डिपार्टमेंट का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि जनता का भरोसा बनाए रखना है। अधिकारी चाहते हैं कि लोग दीपावली और अन्य त्योहारों को बिना डर के मना सकें।
यह अभियान लगातार जारी रहेगा और कोशिश यही रहेगी कि बाजार में बिकने वाली हर मिठाई और खाद्य सामग्री शुद्ध और सुरक्षित हो।
त्योहारों की खुशियाँ तभी पूरी होती हैं जब मिठास में मिलावट न हो। उत्तराखंड में फूड डिपार्टमेंट का यह अभियान जनता की सेहत की सुरक्षा और मिलावटखोरी पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम है।
अगर जनता सतर्क रहे और प्रशासन सख्त, तो नकली मावा और पनीर बेचने वालों को जल्द ही बाजार से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
Disclaimer: यह खबर विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। जांच की प्रक्रिया जारी है, इसलिए कुछ आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है। पाठकों से अनुरोध है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
ऐसे और भी National लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।
Jaisalmer Bus Fire: जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर आग का गोला बनी बस में 20 की मौत, 16 गंभीर रूप से घायल