US Supreme Court Tariff: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट जल्द ही एक ऐसा फैसला सुनाने वाली है, जिसका असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों पर इसकी गूंज सुनाई दे सकती है। यह मामला अमेरिका के पूर्व और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ से जुड़ा है। इन टैरिफ्स को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई का दौर चल रहा है और जनवरी के मध्य में फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों पर 10 से 50 प्रतिशत तक के आयात शुल्क लगाए थे। उन्होंने इसे “लिबरेशन डे टैरिफ” का नाम दिया था और दावा किया था कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हालांकि, बाद में इन्हीं टैरिफ्स को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया।
ट्रंप के टैरिफ क्यों बने विवाद का कारण | US Supreme Court Tariff

अप्रैल 2025 में लगाए गए इन टैरिफ्स को लेकर कई व्यापारिक संगठनों और देशों ने सवाल उठाए। मामला तब और गंभीर हो गया जब अमेरिकी निचली अदालतों ने यह कह दिया कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ये फैसले लिए हैं। अदालतों का मानना था कि अमेरिकी संविधान के अनुसार आयात शुल्क लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA का हवाला देते हुए इन टैरिफ्स को सही ठहराया, लेकिन अदालतों ने इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि क्या राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और संभावित रुख
नवंबर में हुई सुनवाई के दौरान यह संकेत मिले कि सुप्रीम कोर्ट की कंजरवेटिव बेंच के कई जज ट्रंप के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। 6-3 के बहुमत वाली बेंच ने इस बात पर “गंभीर चिंता” जताई कि किस तरह एक कानून का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति ने व्यापक व्यापारिक फैसले लिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाती है, तो यह उनके दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी कानूनी हार हो सकती है। यही वजह है कि इस फैसले पर वैश्विक निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या पड़ेगा असर
अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ को अवैध या आंशिक रूप से रद्द करता है, तो इसका सीधा फायदा उभरते बाजारों को मिल सकता है, जिनमें भारत सबसे आगे है। भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण दबाव में रहा है, जिसमें अमेरिकी टैरिफ भी एक बड़ा कारण रहे हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैरिफ हटने या कमजोर होने से वैश्विक व्यापार में तेजी आएगी। इससे आईटी, फार्मा, मेटल और ऑटो जैसे सेक्टरों में निवेश बढ़ सकता है। विदेशी निवेशकों का भरोसा भी भारतीय बाजार पर मजबूत हो सकता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि अगर फैसला पूरी तरह ट्रंप के खिलाफ जाता है, तो यह भारत जैसे बाजारों के लिए बेहद सकारात्मक संकेत होगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि बाजार की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि फैसला कितना सख्त या नरम होता है।
सोने और चांदी की कीमतों में क्या बदलाव संभव है
जब भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सोना और चांदी सबसे पसंदीदा विकल्प बन जाते हैं। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला वैश्विक बाजारों को राहत देता है, तो इसका उल्टा असर भी देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर टैरिफ को अवैध घोषित किया जाता है और बाजारों में स्थिरता लौटती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट आ सकती है। निवेशक जोखिम वाले एसेट्स जैसे शेयर बाजार की ओर बढ़ सकते हैं। हालांकि, अगर फैसला आंशिक होता है या अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने की चमक और बढ़ सकती है।
अमेरिका की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर असर
ट्रंप के टैरिफ का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे अमेरिका की महंगाई और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा। कई कंपनियों को कच्चा माल महंगे दामों पर खरीदना पड़ा, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ा।
अगर सुप्रीम कोर्ट इन टैरिफ्स को खारिज करता है, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी राहत मिल सकती है। इससे व्यापारिक रिश्ते सुधरने की उम्मीद है और वैश्विक सप्लाई चेन फिर से मजबूत हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति
इस फैसले से पहले निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक घबराहट में कोई बड़ा फैसला न लें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य रखने का है।
अगर फैसला बाजार के पक्ष में आता है, तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि फैसले के दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव संभव है।
भारत के लिए क्यों है यह फैसला अहम

भारत एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और उसका बड़ा हिस्सा वैश्विक व्यापार से जुड़ा है। अमेरिकी टैरिफ का असर भारतीय निर्यातकों पर भी पड़ा है, खासकर स्टील, टेक्सटाइल और आईटी सेक्टर में।
अगर टैरिफ हटते हैं या कमजोर होते हैं, तो भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में बेहतर मौके मिल सकते हैं। इससे रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को भी गति मिल सकती है।
US Supreme Court का यह फैसला केवल एक कानूनी मामला नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला कदम साबित हो सकता है। भारतीय शेयर बाजार, सोना-चांदी और विदेशी निवेश सभी इस फैसले से प्रभावित होंगे।
अब सबकी निगाहें जनवरी में आने वाले फैसले पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ को पूरी तरह खारिज करती है या आंशिक राहत देती है। जो भी फैसला आए, इतना तय है कि इसके बाद वैश्विक बाजारों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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