UPSC Reservation News: UPSC परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आरक्षण लेने वाले नहीं कर सकेंगे जनरल सीट पर दावा

UPSC Reservation News: भारत की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में आरक्षण से जुड़े एक बेहद अहम और दूरगामी प्रभाव वाले मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई उम्मीदवार UPSC परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ लेता है, तो वह सामान्य (General) श्रेणी की सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता, चाहे उसकी मेरिट या रैंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से बेहतर ही क्यों न हो।

यह निर्णय मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।

UPSC में आरक्षण व्यवस्था का संक्षिप्त इतिहास | UPSC Reservation News

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भारत में UPSC परीक्षाओं के माध्यम से IAS, IPS, IFS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में भर्ती होती है। संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण दिया गया है।

UPSC परीक्षाओं में आरक्षण केवल सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें

  • प्रारंभिक परीक्षा में कम कटऑफ,

  • आयु सीमा में छूट,

  • प्रयासों की संख्या में राहत
    जैसे लाभ भी शामिल हैं।

यही कारण है कि लंबे समय से यह बहस चल रही थी कि अगर कोई आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार इन सुविधाओं का लाभ लेकर परीक्षा पास करता है, लेकिन बाद में बेहतर प्रदर्शन करता है, तो क्या वह सामान्य श्रेणी की सीट पर दावा कर सकता है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या स्पष्ट किया?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बिल्कुल साफ शब्दों में कहा कि:

“यदि कोई उम्मीदवार UPSC परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ लेता है, तो वह परीक्षा नियम 2013 के तहत सामान्य श्रेणी की सूची में शामिल नहीं हो सकता।”

कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि:

  • आरक्षण का लाभ लेने का अर्थ केवल अंतिम चयन नहीं है,

  • बल्कि प्रारंभिक परीक्षा या किसी भी स्तर पर मिलने वाली छूट भी इसमें शामिल है,

  • बाद के चरणों में बेहतर प्रदर्शन आरक्षित उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी में स्थानांतरित नहीं कर सकता।

भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2013: पूरा मामला क्या था?

यह विवाद भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2013 से जुड़ा हुआ है, जिसे UPSC ने तीन चरणों में आयोजित किया था:

  1. प्रारंभिक परीक्षा

  2. मुख्य परीक्षा

  3. साक्षात्कार

प्रारंभिक परीक्षा का कटऑफ

  • सामान्य श्रेणी (General): 267 अंक

  • अनुसूचित जाति (SC): 233 अंक

उम्मीदवारों का प्रदर्शन: तुलना

जी. किरण (SC श्रेणी)

  • प्रारंभिक परीक्षा में अंक: 247.18

  • SC कटऑफ के आधार पर उत्तीर्ण

  • अंतिम मेरिट रैंक: 19

एंटनी एस. मारियप्पा (General श्रेणी)

  • प्रारंभिक परीक्षा में अंक: 270.68

  • जनरल कटऑफ पार किया

  • अंतिम मेरिट रैंक: 37

स्पष्ट रूप से देखा जाए तो अंतिम मेरिट सूची में जी. किरण की रैंक बेहतर थी, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा में उन्होंने आरक्षित कटऑफ का लाभ लिया था।

कैडर आवंटन और विवाद की शुरुआत

कैडर आवंटन के समय:

  • कर्नाटक में केवल 1 जनरल इनसाइडर वैकेंसी थी

  • SC इनसाइडर की कोई वैकेंसी नहीं थी

केंद्र सरकार ने:

  • जनरल इनसाइडर सीट एंटनी एस. मारियप्पा को दी

  • जी. किरण को तमिलनाडु कैडर आवंटित किया

इसी निर्णय को चुनौती देते हुए जी. किरण ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया।

कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि:

  • चूंकि जी. किरण ने अंतिम मेरिट सूची में बेहतर रैंक हासिल की है,

  • इसलिए उन्हें सामान्य श्रेणी के कैडर में नियुक्त किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि:

  • जी. किरण को कर्नाटक जनरल इनसाइडर कैडर दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला क्यों पलटा?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के तर्क से असहमति जताई और कहा कि:

  • परीक्षा नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती,

  • प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ लेना एक निर्णायक तथ्य है,

  • नियम 2013 स्पष्ट रूप से इसकी अनुमति नहीं देते।

कोर्ट ने यह भी कहा कि:

“अगर आरक्षण का लाभ लेकर परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को बाद में जनरल सीट पर बैठा दिया गया, तो इससे पूरी आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।”

इस फैसले का भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?

1. UPSC नियमों की स्पष्ट व्याख्या

यह फैसला UPSC परीक्षाओं में आरक्षण से जुड़े नियमों को लेकर किसी भी भ्रम को खत्म करता है

2. कैडर आवंटन में पारदर्शिता

अब यह स्पष्ट हो गया है कि कैडर आवंटन में केवल अंतिम रैंक नहीं, बल्कि परीक्षा के हर चरण में लिया गया लाभ मायने रखेगा।

3. भविष्य की कानूनी चुनौतियों पर रोक

इस निर्णय से समान मामलों में बार-बार होने वाली याचिकाओं पर भी लगाम लगेगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल UPSC परीक्षा प्रणाली के लिए बल्कि पूरे आरक्षण ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अदालत ने साफ कर दिया है कि आरक्षण एक समग्र लाभ है, जिसे आंशिक रूप से लेकर बाद में सामान्य श्रेणी का दावा नहीं किया जा सकता।

यह निर्णय योग्यता और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक स्पष्ट और मजबूत संदेश देता है। आने वाले वर्षों में यह फैसला UPSC समेत सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं के लिए एक नजीर (precedent) के रूप में काम करेगा।

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