क्या TRAPPIST-1 e बनेगा ‘दूसरी धरती’? JWST की खोजों से क्यों बढ़ीं उम्मीदें

मानव सभ्यता का सबसे बड़ा सपना हमेशा से यही रहा है कि क्या धरती जैसी दूसरी दुनिया ब्रह्मांड में कहीं मौजूद है। नासा का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) इस सपने को हकीकत के करीब ले आता दिख रहा है। हाल ही में JWST ने TRAPPIST-1 e ग्रह के बारे में जो खुलासे किए हैं, उन्होंने वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों के बीच उम्मीदें जगा दी हैं। यह ग्रह पृथ्वी के आकार का है और अपने तारे के हैबिटेबल जोन में स्थित है, यानी वह इलाका जहां पानी तरल रूप में मौजूद रह सकता है।

TRAPPIST-1 e: आखिर यह ग्रह क्यों है खास?

 TRAPPIST-1 e

TRAPPIST-1 e पृथ्वी से लगभग 40 प्रकाश वर्ष दूर एक ग्रह है, जो एक ठंडे रेड ड्वार्फ तारे TRAPPIST-1 की परिक्रमा करता है। खास बात यह है कि इस तारे के चारों ओर कुल 7 पृथ्वी जैसे ग्रह घूमते हैं, जिनमें से TRAPPIST-1 e जीवन के लिहाज से सबसे संभावित माना जा रहा है।

वैज्ञानिक इसे ‘अर्थ 2.0’ कहने लगे हैं, क्योंकि शुरुआती आंकड़ों से संकेत मिले हैं कि यहां पानी और वायुमंडल हो सकता है। अगर यह सही साबित हुआ तो यह ग्रह हमारे लिए दूसरी धरती साबित हो सकता है।

JWST ने कैसे जुटाए सबूत?

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप में लगे शक्तिशाली इन्फ्रारेड सेंसर ग्रह के तारे से आने वाली रोशनी का अध्ययन करते हैं। जब TRAPPIST-1 e अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो उसकी रोशनी ग्रह के वायुमंडल से होकर आती है।

JWST ने इसी रोशनी का स्पेक्ट्रल एनालिसिस किया और पाया कि वहां कुछ रसायनों के संकेत मौजूद हैं। स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर नेस्टोर एस्पिनोजा ने कहा कि JWST हमें इतनी बारीक डिटेल दे रहा है, जो पहले किसी भी उपकरण से मुमकिन नहीं थी।

हाइड्रोजन-हिलियम परत क्यों गायब हो गई?

शोधकर्ताओं के मुताबिक, TRAPPIST-1 e पर शुरूआती दौर में हाइड्रोजन और हिलियम का मोटा वायुमंडल रहा होगा। लेकिन तारे से उठने वाले तेज सोलर फ्लेयर्स ने समय के साथ इसे उड़ा दिया।

पृथ्वी की तरह कई ग्रह अपना दूसरा वायुमंडल बना लेते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि TRAPPIST-1 e के पास भी ऐसा वायुमंडल हो सकता है, जो जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सके। हालांकि यह भी संभव है कि यह ग्रह पूरी तरह से ‘बेयर रॉक’ हो यानी बिल्कुल नंगा पत्थरीला ग्रह, जहां कोई वायुमंडल न हो।

सूर्य से बिल्कुल अलग है TRAPPIST-1

कोर्नेल यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक निकोल लुईस ने कहा कि TRAPPIST-1 हमारे सूर्य से बिल्कुल अलग है। यह एक रेड ड्वार्फ स्टार है, जो छोटा और ठंडा है। इसी वजह से इसके चारों ओर का ग्रह तंत्र भी बिल्कुल अलग तरह का है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि TRAPPIST-1 e पर वीनस या मंगल जैसे कार्बन डाइऑक्साइड से भरे मोटे वायुमंडल की संभावना बहुत कम है। बल्कि यह ग्रह हमारे सौरमंडल से एकदम अलग उदाहरण है।

क्या यहां हो सकता है पानी?

अगर TRAPPIST-1 e पर वायुमंडल है तो वहां पानी के मौजूद होने की संभावना काफी मजबूत है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पानी या तो एक बड़े महासागर के रूप में फैला हो सकता है या फिर ग्रह के उस हिस्से में जमा हो सकता है जहां हमेशा दिन रहता है।

TRAPPIST-1 e टाइडली लॉक्ड है, यानी इसका एक हिस्सा हमेशा तारे की ओर रहता है और दूसरा हिस्सा हमेशा अंधेरे में। रोशनी वाला हिस्सा गर्म और पानी के अनुकूल हो सकता है, जबकि अंधेरा हिस्सा ठंडा और बर्फीला होगा।

ग्रीनहाउस इफेक्ट की भूमिका

निकोल लुईस का मानना है कि अगर TRAPPIST-1 e पर थोड़ा-सा भी ग्रीनहाउस इफेक्ट हो, तो तापमान स्थिर रह सकता है। कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें ग्रह को गर्म रखने में मदद कर सकती हैं, जिससे सतह पर पानी तरल रूप में मौजूद रह सके।

JWST के NIRSpec उपकरण ने ट्रांजिट के दौरान तारे की रोशनी के स्पेक्ट्रम में हल्के बदलाव दर्ज किए हैं। हर ट्रांजिट के साथ डेटा और ज्यादा साफ हो रहा है, जिससे ग्रह की वास्तविक स्थिति का अनुमान लगाना आसान हो रहा है।

अभी तक क्या मिला है और क्या बाकी है?

अब तक वैज्ञानिकों ने TRAPPIST-1 e के 15 ट्रांजिट में से सिर्फ 4 का विश्लेषण किया है। यानी अभी रिसर्च अधूरी है और आने वाले वर्षों में और डेटा इकट्ठा किया जाएगा।

ये शुरुआती नतीजे JWST के DREAMS (Deep Reconnaissance of Exoplanet Atmospheres using Multi-instrument Spectroscopy) कोलैबोरेशन से मिले हैं। इससे उम्मीद है कि आने वाले ट्रांजिट्स में और स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

JWST मिशन क्यों है खास?

JWST नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और कैनेडियन स्पेस एजेंसी (CSA) का संयुक्त प्रोजेक्ट है। यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली स्पेस साइंस ऑब्जर्वेटरी है।

यह मिशन न सिर्फ एक्सोप्लैनेट्स की खोज कर रहा है बल्कि हमारे सौरमंडल के रहस्यों को भी सुलझा रहा है और ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने में मदद कर रहा है।

‘दूसरी धरती’ की तलाश में एक कदम और आगे

TRAPPIST-1 e की खोज यह साबित करती है कि हम धरती जैसे ग्रहों को खोजने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। यह अब तक का सबसे मजबूत उम्मीदवार है, जहां जीवन की संभावनाएं हो सकती हैं।

हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यहां वाकई जीवन मौजूद है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि आने वाले वर्षों में JWST और अन्य टेलीस्कोप इस रहस्य को जरूर उजागर करेंगे।

              TRAPPIST-1 e पर हुए शुरुआती शोध ने पूरी दुनिया में उत्साह भर दिया है। यह ग्रह हमें बताता है कि धरती अकेली नहीं हो सकती, ब्रह्मांड में कहीं और भी जीवन के लिए उपयुक्त परिस्थितियां मौजूद हो सकती हैं।

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से मिली ये जानकारी न सिर्फ विज्ञान बल्कि इंसान की कल्पना को भी पंख दे रही है। अगर आने वाले वर्षों में यह साबित हो गया कि TRAPPIST-1 e पर पानी और वायुमंडल है, तो यह खोज मानव इतिहास की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में शामिल होगी।

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