Top 10 Arms Importing Countries: सऊदी और कतर को पछाड़ा, मात्र 4 करोड़ आबादी वाला देश बना दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदार – जानिए टॉप-10 की पूरी लिस्ट

Top 10 Arms Importing Countries: दुनिया भर में हथियारों की दौड़ लगातार तेज होती जा रही है। वैश्विक सुरक्षा माहौल, क्षेत्रीय संघर्ष और शक्ति संतुलन के बीच कई देश बड़े पैमाने पर हथियारों की खरीद कर रहे हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि पिछले पांच वर्षों में एक ऐसा छोटा देश सबसे बड़ा हथियार आयातक बनकर उभरा है जिसकी आबादी महज 4 करोड़ के आसपास है। इसने सऊदी अरब, कतर और यहां तक कि चीन जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह रिपोर्ट इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में हथियारों की खरीद का भूगोल और भी तेजी से बदल सकता है।

हथियारों की दौड़ और दुनिया का बदलता परिदृश्य

पिछले एक दशक से दुनिया में हथियारों की खरीद लगातार बढ़ रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-अमेरिका तनाव, मध्य पूर्व में अस्थिरता और एशिया में बढ़ते संघर्षों ने देशों को अपनी सुरक्षा रणनीतियों को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है। अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी और चीन जैसे देश हथियार निर्यातक के तौर पर हावी हैं, वहीं एशिया और मध्य पूर्व के कई देश उनके सबसे बड़े ग्राहक बन गए हैं। SIPRI के मुताबिक, हथियारों के आयात में एशिया की हिस्सेदारी 40% से अधिक है।

4 करोड़ की आबादी वाला देश बना सबसे बड़ा खरीदार

SIPRI की रिपोर्ट बताती है कि मात्र 40 मिलियन यानी करीब 4 करोड़ की आबादी वाला दक्षिण कोरिया (South Korea) पिछले पांच सालों में दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदार बन गया है। उत्तर कोरिया से लगातार बढ़ते खतरे, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग ने दक्षिण कोरिया को भारी मात्रा में हथियार खरीदने के लिए मजबूर कर दिया है। इस दौरान उसने अमेरिका और यूरोप से अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट्स, वायु रक्षा प्रणाली और नौसैनिक उपकरण खरीदे। दक्षिण कोरिया ने अपने रक्षा बजट को GDP के 2.8% तक बढ़ा दिया है, जो विश्व औसत से कहीं अधिक है।

भारत की स्थिति – दूसरे नंबर पर

Top 10 Arms Importing Countries

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है। सीमाई तनाव, पाकिस्तान और चीन से खतरे और तेजी से बदलती सुरक्षा परिस्थितियों की वजह से भारत अपनी सेना को आधुनिक हथियारों से लैस कर रहा है। भारत रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम, फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान और अमेरिका से अपाचे हेलीकॉप्टर जैसे हथियार खरीद चुका है। हालांकि, मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा उत्पादन कार्यक्रम को बढ़ावा देकर आने वाले वर्षों में हथियारों की निर्भरता को कम करने की दिशा में काम कर रही है। भारत ने स्वदेशी फाइटर जेट तेजस, आकाश मिसाइल प्रणाली और विभिन्न ड्रोन परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया है।

टॉप-10 हथियार आयातक देश | Top 10 Arms Importing Countries

SIPRI की रिपोर्ट में हथियार खरीदने वाले टॉप-10 देशों की सूची इस प्रकार है –

  1. दक्षिण कोरिया
  2. भारत
  3. सऊदी अरब
  4. कतर
  5. ऑस्ट्रेलिया
  6. मिस्र
  7. पाकिस्तान
  8. जापान
  9. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
  10. वियतनाम

इन देशों का हथियारों पर खर्च उनके भू-राजनीतिक हालात, क्षेत्रीय तनाव और सामरिक महत्व को दिखाता है।

सऊदी और कतर की रफ्तार क्यों धीमी हुई?

सऊदी अरब और कतर लंबे समय तक दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदार रहे हैं। खाड़ी देशों की सुरक्षा हमेशा से अमेरिका और यूरोप पर निर्भर रही है। लेकिन हाल के वर्षों में तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बदलते हालात ने इन देशों की हथियार खरीद की गति को कुछ हद तक धीमा किया है। हालांकि, वे अभी भी टॉप-5 में बने हुए हैं।

हथियारों पर बढ़ता खर्च और वैश्विक असर

वैश्विक स्तर पर हथियारों पर बढ़ता खर्च यह दिखाता है कि दुनिया धीरे-धीरे एक नए शीतयुद्ध जैसे दौर में प्रवेश कर रही है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध और एशिया में सैन्य संतुलन को लेकर बढ़ती चुनौतियां इस खर्च को और बढ़ा रही हैं। SIPRI की रिपोर्ट बताती है कि पिछले पांच वर्षों में हथियारों का वैश्विक आयात 8% बढ़ा है। एशिया-पैसिफिक क्षेत्र इस वृद्धि का केंद्र बना हुआ है।

भारत के लिए सबक

भारत के लिए यह रिपोर्ट कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ भारत को अपनी सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हथियार आयात जारी रखना होगा, वहीं दूसरी तरफ घरेलू उत्पादन को बढ़ाना भी उतना ही ज़रूरी है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत ने स्वदेशी हथियार उत्पादन को प्राथमिकता दी है। DRDO और निजी कंपनियों की भागीदारी से भारत आने वाले वर्षों में न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरे देशों के लिए भी हथियार बना सकता है।

दुनिया के लिए SIPRI की यह रिपोर्ट चेतावनी है कि हथियारों की बढ़ती होड़ किसी भी समय बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। दक्षिण कोरिया का शीर्ष पर आना यह दिखाता है कि छोटे देश भी अपनी सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर खर्च करने को तैयार हैं। भारत जैसे देश को संतुलन बनाते हुए अपनी रक्षा जरूरतों और आर्थिक प्राथमिकताओं में तालमेल बैठाना होगा।

ऐसे और भी Global लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।

Trump Tariffs India: ट्रंप का नया 50% टैरिफ, भारत-अमेरिका व्यापार में भूचाल, क्या संभाल पाएगा भारत ?

Trump Tariffs India: “अमेरिकी टेक कंपनियाँ पिगी बैंक नहीं हैं” — ट्रंप का डिजिटल टैक्स पर बड़ा धमाका, दुनिया भर में बढ़ी टेंशन

India Fiji Ties: भारत-फिजी रिश्तों में नया अध्याय, सहयोग और साझेदारियों से मजबूत होते द्विपक्षीय संबंध

Leave a Comment