Tere Ishq Mein Review: फ़िल्मों में प्रेम कहानियाँ तो बहुत आईं, लेकिन कुछ प्रेम कथाएँ अपने दर्द, जुनून और कच्ची सच्चाइयों की वजह से लंबे समय तक याद रह जाती हैं। “तेरे इश्क़ में”, जिसमें धनुष और कृति सैनन ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं, ऐसी ही एक फिल्म है। आनंद एल. राय द्वारा निर्देशित यह फिल्म प्यार की उन गहराइयों को छूती है जहाँ रिश्ते सिर्फ ख़ुशियों का नाम नहीं होते, बल्कि त्याग, कसक और संघर्ष का भी प्रतीक बन जाते हैं।
इस ब्लॉग में हम कहानी, अभिनय, निर्देशन, संगीत और सिनेमैटोग्राफी – हर पहलू पर विस्तार से बात करेंगे। बिना स्पॉइलर के, ताकि फिल्म देखने का मज़ा बरकरार रहे।

कहानी: प्यार, संघर्ष और समाज के बीच फँसी एक दास्तान
“तेरे इश्क़ में” की कहानी घूमती है शंकर (धनुष) और मुक्ति (कृति सैनन) के इर्द-गिर्द। शंकर एक बेपरवाह, भावुक और जिद्दी स्वभाव का युवक है, जो प्यार के लिए सबकुछ दांव पर लगाने की हिम्मत रखता है। दूसरी तरफ मुक्ति एक संवेदनशील, आत्मनिर्भर और मजबूत सोच वाली युवती है। दोनों की दुनिया अलग है, पर दिल एक-दूसरे की तरफ खिंचता है।
फिल्म की शुरुआत बेहद सहज और खूबसूरत अंदाज़ में होती है – छोटी-छोटी मुलाकातें, हल्के-फुल्के संवाद और वह मासूमीयत, जो किसी भी प्रेम कहानी की जड़ होती है।
इंटरवल तक आते-आते कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। प्यार की गहराई बढ़ती है और उसी के साथ बढ़ता है संघर्ष। समाज, परिवार और परिस्थितियाँ दोनों को अलग- अलग दिशाओं में खींचने लगती हैं।
यहां फिल्म अपनी गति पकड़ती है और दर्शक को सोचने पर मजबूर कर देती है-
क्या सिर्फ प्यार काफी है?
क्या हर रिश्ता अपनी मंज़िल तक पहुँच पाता है?
दूसरे हाफ में फिल्म और भी भावुक, और कहीं-कहीं कड़वी भी हो जाती है। कहानी लगातार ऐसी स्थितियाँ पैदा करती है जहाँ दर्शक खुद किरदारों की जगह सोचने लगता है। यही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।
अभिनय: धनुष फिर साबित करते हैं कि वह भावनाओं के बादशाह हैं
धनुष (शंकर):
धनुष हमेशा से अपने रॉ, नेचुरल और इमोशनल अभिनय के लिए जाने जाते हैं। इस फिल्म में भी उन्होंने शंकर के किरदार को पूरी ईमानदारी से जिया है।
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कभी वह मासूम प्रेमी लगते हैं,
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कभी एक जुनूनी प्रेमी,
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और कभी ऐसे टूटा हुआ इंसान, जिसे देखकर दर्शक खुद को रोक नहीं पाता।
उनकी आँखें ही कई बार बिना संवाद के पूरी कहानी बयान कर देती हैं। फिल्म में उनका इमोशनल हाईपॉइंट इस साल के सबसे यादगार पलों में से एक है।
कृति सैनन (मुक्ति):
कृति सैनन का किरदार बेहद मजबूती से लिखा गया है और उन्होंने इसे उसी शिद्दत से निभाया है।
मुक्ति सिर्फ खूबसूरत किरदार नहीं, बल्कि गहराई वाली शख्सियत है।
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उनके डर
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उनकी उम्मीदें
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और उनका संघर्ष
कृति ने इन सबको शानदार तरीके से पर्दे पर उतारा है। धनुष के साथ उनकी केमिस्ट्री बेहद नर्म और वास्तविक महसूस होती है।
#TereIshkMeinReview ~ INTENSE & HEART WRENCHING!
Ratings – ⭐️⭐️⭐️⭐️#TereIshkMein is a BONAFIDE BLOCKBUSTER as Aanand L Rai goes WILD with raw emotions, superb storytelling, and brilliant performances by the star cast🔥
The 1st HALF is TIGHT and sets up the story with an… pic.twitter.com/7L5wraYZJN
— CineHub (@Its_CineHub) November 28, 2025
निर्देशन: आनंद एल. राय की अपनी पहचान- भावनाओं को केंद्र में रखना, Tere Ishq Mein Review
आनंद एल. राय हमेशा से रिश्तों, भावनाओं और छोटे-छोटे पलों को बड़े कैनवास पर दिखाने के लिए जाने जाते हैं।
“तेरे इश्क़ में” भी उनकी उसी भावनात्मक शैली की मिसाल है।
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कहानी की नज़ाकत
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किरदारों की गहराई
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और हर रिश्ते की परतें
उन्होंने बड़ी नजाकत से उकेरी हैं।
कई दृश्य ऐसे हैं जो शांत होते हुए भी भीतर गहरा असर छोड़ते हैं। क्लाइमेक्स में निर्देशक का स्पर्श साफ महसूस होता है – बिना कहीं खोए, बिना कहानी को ज़रूरत से ज़्यादा खींचे।
दर्शक फिल्म के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ता है – शुरू से लेकर अंत तक।
संगीत: दिल को झकझोर देने वाली धुनें
फिल्म का संगीत इसकी आत्मा है।
प्रेम कहानी तभी असर करती है जब उसके गाने दिल पर असर करें, और यहाँ हर गीत कहानी से जुड़ा हुआ लगता है।
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रोमांस में मिठास,
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संघर्ष में दर्द,
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और जुदाई में कसक
सब कुछ गानों में महसूस होता है। बैकग्राउंड स्कोर कहानी के इमोशनल हिस्सों को और भी प्रभावशाली बनाता है, खासकर क्लाइमेक्स और प्री-क्लाइमेक्स में।
सिनेमैटोग्राफी और लोकेशन: हर फ्रेम एक कहानी कहता है:
कैमरा वर्क बेहद सुंदर है।
पहले हाफ के लोकेशन हल्के, खुशगवार और प्राकृतिक हैं।
दूसरे हाफ में टोन धीरे-धीरे गहरा और गंभीर होता जाता है ताकि दर्शक किरदारों की भावनाओं के साथ जुड़ सके।
कई क्लोज़-अप शॉट्स हैं जहां सिर्फ चेहरे के एक्सप्रेशन कथा को आगे बढ़ाते दिखाई देते हैं – यही फिल्म की खूबसूरती है।
फिल्म की खूबियाँ:
✔ दमदार और भावुक कहानी
✔ धनुष और कृति का बेहतरीन अभिनय
✔ निर्देशक की संवेदनशीलता
✔ दिल छूने वाला संगीत
✔ शानदार कैमरा वर्क
कमज़ोरियाँ:
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कुछ जगह कहानी थोड़ी ज्यादा भावुक लगती है
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सेकंड हाफ की गति हल्की धीमी हो जाती है
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कुछ सबप्लॉट कमज़ोर महसूस होते हैं
फिर भी इन कमज़ोरियों से फिल्म का असर कम नहीं होता।
क्यों देखें यह फिल्म?
“तेरे इश्क़ में” सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि ऐसी भावनात्मक यात्रा है जो दिल को भीतर तक प्रभावित करती है।
धनुष और कृति की केमिस्ट्री, कहानी की गहराई और संगीत की आत्मीयता इसे एक यादगार अनुभव बनाती है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)
अगर आपको प्यार, रिश्तों और भावनाओं से भरी फिल्मों का अंदाज़ पसंद है- तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।
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