Taiwan China News: अगले दो साल में बनेगी 50 हजार ड्रोन आर्मी, चीन को रोकने के लिए ताइवान की बड़ी तैयारी

Taiwan China News: एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच ताइवान अपनी सुरक्षा रणनीति को नए स्तर पर ले जा रहा है। चीन के बढ़ते दबाव और लगातार हो रही सैन्य गतिविधियों के बीच ताइवान अब तकनीकी युद्धक क्षमता को बढ़ाने में जुट गया है। इसी कड़ी में ताइवान ने अगले दो साल में लगभग 50,000 ड्रोन खरीदने की योजना बनाई है। यह कदम न केवल ताइवान की रक्षा को मजबूत करेगा बल्कि उसे दुनिया की सबसे बड़ी ड्रोन पावर बनने की दिशा में भी आगे ले जाएगा।

क्यों जरूरी है ताइवान के लिए ड्रोन आर्मी?

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चीन और ताइवान के बीच तनाव किसी से छिपा नहीं है। चीन लगातार ताइवान को अपने हिस्से के रूप में दावा करता है और सैन्य अभ्यासों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करता है। ताइवान के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती है खुद को सुरक्षित रखना और किसी भी संभावित हमले का मुकाबला करना।

आधुनिक युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि ड्रोन भविष्य के युद्धों का सबसे बड़ा हथियार होंगे। ताइवान भी इसी रणनीति पर काम कर रहा है। ज्यादा संख्या में ड्रोन खरीदकर ताइवान एक ऐसी फोर्स तैयार करना चाहता है जो चीन के किसी भी कदम का तुरंत जवाब दे सके।

ताइवान का ड्रोन खरीदने का बड़ा प्लान | Taiwan China News

ताइवान की सरकारी वेबसाइट पर जारी सूचना के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय का आयुध ब्यूरो अगले दो साल में ड्रोन की बड़ी खेप खरीदने वाला है। 2026 तक ताइवान 11,270 ड्रोन खरीदेगा और 2027 तक 37,480 ड्रोन और शामिल किए जाएंगे। यानी कुल मिलाकर करीब 50 हजार ड्रोन सेना का हिस्सा बन जाएंगे।

इन ड्रोन में मल्टी-रोटर VTOL (Vertical Take-Off and Landing) प्लेटफॉर्म से लेकर फिक्स्ड-विंग सिस्टम तक शामिल होंगे। इनकी उड़ान क्षमता सात मिनट से लेकर ढाई घंटे तक की होगी। यानी अलग-अलग मिशन के लिए ताइवान के पास हर तरह के ड्रोन उपलब्ध होंगे।

कौन-कौन से ड्रोन होंगे शामिल?

ताइवान पांच अलग-अलग कैटेगरी के ड्रोन खरीद रहा है। इनकी क्षमताएं और रेंज भी अलग-अलग होंगी।

टाइप A ड्रोन

ये मल्टी-रोटर VTOL ड्रोन होंगे, जिनकी रेंज 6 किमी होगी और ये 2.5 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकेंगे। इनकी उड़ान क्षमता 7 से 30 मिनट तक की होगी। 2026 में 7,500 और 2027 में 26,500 ऐसे ड्रोन खरीदे जाएंगे।

टाइप B ड्रोन

इनकी रेंज 25 किमी होगी और ये 10 किलोग्राम तक का पेलोड उठा सकते हैं। हवा में एक घंटे से ज्यादा उड़ सकते हैं। 2026 में 1,100 और 2027 में 3,200 ड्रोन खरीदे जाएंगे।

टाइप C ड्रोन

इस कैटेगरी के ड्रोन की रेंज 90 किमी होगी और ये 2 घंटे तक उड़ सकते हैं। इन्हें कैटापल्ट लॉन्च सिस्टम से उड़ाया जाएगा और ये 10 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकते हैं। 2026 में 970 और 2027 में 2,980 ड्रोन खरीदे जाएंगे।

टाइप D ड्रोन

ये छोटे फिक्स्ड-विंग ड्रोन होंगे, जिनकी रेंज 30 किमी होगी और ये 30 मिनट तक उड़ सकते हैं। 2026 में 1,350 और 2027 में 4,450 ड्रोन खरीदे जाएंगे।

टाइप E ड्रोन

ये सबसे एडवांस्ड ड्रोन होंगे। इनकी रेंज 100 किमी से ज्यादा होगी और उड़ान समय ढाई घंटे का होगा। ये फिक्स्ड-विंग VTOL ड्रोन होंगे और तेज हवा में भी काम कर सकेंगे। अगले दो साल में 700 ऐसे ड्रोन खरीदे जाएंगे।

चीन को लेकर कड़ा संदेश

ताइवान ने साफ कर दिया है कि इन ड्रोन में चीन का कोई भी घटक इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि ताइवान न केवल अपनी सुरक्षा बढ़ा रहा है बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि चीन पर उसकी कोई तकनीकी निर्भरता न रहे। यह रणनीति अमेरिका की नीति से मेल खाती है, जहां चीन पर तकनीकी निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है।

ड्रोन क्यों बन रहे हैं युद्ध का सबसे बड़ा हथियार?

ड्रोन युद्ध की तस्वीर बदल रहे हैं। ये कम लागत में ज्यादा असर डालते हैं। इन्हें ऑपरेट करना आसान होता है और दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम होते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध ने दिखाया कि कैसे ड्रोन ने पारंपरिक हथियारों और टैंकों को चुनौती दी।

ताइवान के लिए ड्रोन सेना का मतलब है कि वह बिना ज्यादा खर्च किए अपनी रक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है। 50 हजार ड्रोन का बेड़ा चीन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है क्योंकि यह संख्या किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए काफी होगी।

अंतरराष्ट्रीय समर्थन और सहयोग

ताइवान का यह कदम अकेला नहीं है। अमेरिका और जापान जैसे देश भी ताइवान की मदद कर रहे हैं। अमेरिका पहले ही ताइवान को एडवांस्ड हथियार और तकनीक उपलब्ध करा रहा है। ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है कि ड्रोन सेना बनाने में भी ताइवान को सहयोग मिलेगा।

ताइवान का 50 हजार ड्रोन खरीदने का फैसला एशिया की सुरक्षा समीकरण को बदल सकता है। आने वाले दो साल में जब यह पूरी तरह से लागू होगा तो ताइवान न केवल अपनी रक्षा मजबूत करेगा बल्कि चीन के लिए भी एक कड़ा संदेश होगा कि वह आसानी से ताइवान को झुका नहीं सकता।

ड्रोन आर्मी का यह प्लान भविष्य की लड़ाइयों में ताइवान को मजबूत स्थिति में खड़ा करेगा। यह कदम तकनीकी और रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम है।

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