Sourav Ganguly Defamation Case: कोलकाता में फुटबॉल प्रेमियों के लिए जिस दिन को ऐतिहासिक और यादगार होना था, वही दिन विवाद, अफरा-तफरी और आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया। अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर और वर्ल्ड कप विजेता लियोनेल मेसी की कोलकाता यात्रा ने जहां लाखों फैंस को उत्साहित किया, वहीं आयोजन के दौरान फैली अव्यवस्था ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली का नाम विवादों में घसीटा गया, जिसके बाद उन्होंने बड़ा और सख्त कदम उठाया है।
सौरव गांगुली ने कोलकाता के साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराते हुए 50 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे की चेतावनी दी है। यह शिकायत उन्होंने अर्जेंटीना फुटबॉल फैन क्लब के संस्थापक और खुद को उसका अध्यक्ष बताने वाले उत्तम साहा के खिलाफ दर्ज कराई है। गांगुली का कहना है कि उनके खिलाफ बिना किसी ठोस सबूत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे उनकी छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है।
सौरव गांगुली क्यों हुए नाराज़ | Sourav Ganguly Defamation Case

सौरव गांगुली की शिकायत के अनुसार, उत्तम साहा ने एक बंगाली न्यूज़ पोर्टल को दिए गए वीडियो इंटरव्यू में ऐसे बयान दिए, जो न सिर्फ भ्रामक हैं बल्कि सीधे तौर पर मानहानिकारक भी हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब और फेसबुक पर तेजी से वायरल हुआ, जिससे गांगुली की छवि पर असर पड़ा।
गांगुली ने अपनी शिकायत में साफ कहा है कि उत्तम साहा ने जानबूझकर, लापरवाही से और दुर्भावना के साथ ऐसे बयान दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि साहा ने यह दावा किया कि मेसी के कोलकाता आने में सौरव गांगुली की भूमिका थी और वह आयोजक तथा अर्जेंटीना टीम के बीच मध्यस्थ थे। इतना ही नहीं, साहा ने इवेंट आयोजक सतद्रु दत्ता को गांगुली का “मोहरा” तक कह दिया।
गांगुली ने इसे पूरी तरह निराधार, झूठा और बदनाम करने वाला आरोप बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के बयान सार्वजनिक मंच पर देकर उनकी वर्षों में बनाई गई प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया है।
क्या सच में आयोजन से जुड़े थे सौरव गांगुली
इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सौरव गांगुली लियोनेल मेसी के कोलकाता इवेंट के आयोजन से जुड़े थे। गांगुली ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि वह सिर्फ मेसी के दौरे के दौरान स्टेडियम में मौजूद थे, लेकिन आयोजन प्रक्रिया, प्रबंधन या टिकट व्यवस्था से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
गांगुली का कहना है कि एक सार्वजनिक शख्सियत होने के नाते उनका किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ एक ही मंच पर दिखना स्वाभाविक है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं निकाला जा सकता कि वह आयोजन के हर पहलू में शामिल थे।
कैसे बिगड़ा लियोनेल मेसी का कोलकाता इवेंट

13 दिसंबर का दिन कोलकाता के फुटबॉल प्रेमियों के लिए किसी सपने से कम नहीं था। लियोनेल मेसी जैसे दिग्गज खिलाड़ी को अपने शहर में देखने का मौका हर किसी को नहीं मिलता। हजारों फैंस ने भारी रकम खर्च कर टिकट खरीदे थे, जिनकी कीमत 4,500 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक थी।
लेकिन जैसे ही इवेंट शुरू हुआ, हालात बिगड़ने लगे। फैंस का आरोप है कि बड़ी संख्या में वीआईपी, राजनेता और उनके समर्थक सुरक्षा नियमों को तोड़ते हुए मैदान में घुस आए। इससे आम दर्शकों को मेसी की झलक तक ठीक से नहीं मिल पाई।
कई फैंस का कहना था कि उन्होंने सिर्फ दूर से मेसी को देखा और पूरे आयोजन में आम लोगों को नजरअंदाज किया गया। गुस्से में आए दर्शकों ने बोतलें फेंकीं और स्टेडियम की फाइबरग्लास सीटों को नुकसान पहुंचाया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
राजनीति और आरोपों ने बढ़ाया विवाद
इस पूरे हंगामे के बीच आरोप लगे कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ते हुए मैदान में प्रवेश किया। इससे आयोजन और ज्यादा विवादों में घिर गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए और इवेंट को “रॉयल मैस” तक कहा जाने लगा।
इसी माहौल में उत्तम साहा के बयान सामने आए, जिसमें उन्होंने सौरव गांगुली का नाम सीधे तौर पर जोड़ दिया। यही वह बिंदु था, जहां से मामला कानूनी मोड़ ले गया।
आयोजक सतद्रु दत्ता की मुश्किलें बढ़ीं
मेसी के G.O.A.T इंडिया टूर 2025 के प्रमोटर और आयोजक सतद्रु दत्ता की मुश्किलें भी इस मामले में कम नहीं हुईं। बिधाननगर कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। उन पर आयोजन में लापरवाही और अव्यवस्था फैलने के आरोप लगे हैं।
इसके अलावा, पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति भी गठित की गई है। इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशिम कुमार रे कर रहे हैं, जबकि राज्य के मुख्य सचिव और गृह एवं पहाड़ी मामलों के अतिरिक्त मुख्य सचिव इसके सदस्य हैं।
सौरव गांगुली का सख्त रुख
सौरव गांगुली ने अपनी शिकायत में साफ कहा है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति के खिलाफ इस तरह के आरोप बेहद गंभीर होते हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत के उनका नाम जोड़ना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है।
गांगुली ने संकेत दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह 50 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि एक मिसाल कायम करने का भी है, ताकि भविष्य में कोई भी बिना सोचे-समझे इस तरह के आरोप न लगाए।
सोशल मीडिया ट्रायल पर सवाल
यह पूरा मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर होने वाले “ट्रायल” पर सवाल खड़ा करता है। आज किसी भी बड़े आयोजन में अगर कुछ गलत होता है, तो आरोप तुरंत किसी बड़े चेहरे पर मढ़ दिए जाते हैं, बिना सच्चाई जाने।
सौरव गांगुली जैसे अनुभवी और सम्मानित खिलाड़ी का नाम इस विवाद में आना कई लोगों को हैरान कर गया। यही वजह है कि उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आता है और उत्तम साहा अपने आरोपों को किस तरह सही ठहराते हैं। अगर आरोप साबित नहीं होते, तो गांगुली का मानहानि केस एक बड़ा कानूनी उदाहरण बन सकता है।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखा दिया है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सुरक्षा, प्रबंधन और पारदर्शिता कितनी जरूरी है। एक छोटी सी चूक पूरे शहर और देश की छवि पर असर डाल सकती है। लियोनेल मेसी का कोलकाता दौरा फुटबॉल प्रेमियों के लिए यादगार होना था, लेकिन अव्यवस्था, राजनीति और आरोपों ने इसे विवादों में बदल दिया। इस पूरे मामले में सौरव गांगुली का सख्त रुख यह साफ संदेश देता है कि बिना सबूत किसी की छवि खराब करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन इतना तय है कि यह विवाद सिर्फ एक इवेंट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानून, सोशल मीडिया जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई सवाल खड़े करेगा।
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