Sonam Wangchuk Arrested: लद्दाख हिंसक प्रदर्शन के बाद NSA के तहत कार्रवाई, सोनम वांगचुक भेजे गए जोधपुर जेल

Sonam Wangchuk Arrested: लद्दाख पिछले कई महीनों से उथल-पुथल और विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी मांग है कि लद्दाख को भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल किया जाए और उसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिले। इन्हीं मांगों को लेकर लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसने पूरे देश का ध्यान इस आंदोलन की ओर खींचा।

लेकिन 2025 के सितंबर महीने में हालात अचानक बिगड़ गए। लद्दाख में हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिनमें चार लोगों की मौत और 90 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। इसके बाद केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया और आंदोलन के नेता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया। उन्हें लद्दाख से उठाकर सीधे राजस्थान के जोधपुर जेल में भेज दिया गया है।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी: क्यों उठाया गया यह कदम? | Sonam Wangchuk Arrested

Sonam Wangchuk arrested

शुक्रवार को लेह पुलिस ने सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने भूख हड़ताल और सार्वजनिक सभाओं के दौरान दिए गए उत्तेजक बयानों से लोगों को भड़काया। उनके भाषणों में उन्होंने “अरब स्प्रिंग-स्टाइल आंदोलन” और “नेपाल के जेन-ज़ेड विरोध” जैसे उदाहरण दिए, जिसे सरकार ने बेहद गंभीर माना।

सरकार का कहना है कि इन बयानों से भीड़ उग्र हुई और हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों की जड़ में यही उत्तेजना थी। इसी आधार पर NSA के तहत उनकी गिरफ्तारी की गई और लद्दाख से बाहर स्थानांतरित करके जोधपुर जेल भेजा गया।

भूख हड़ताल और छठी अनुसूची की मांग

सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर 2025 को भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी प्रमुख मांग थी कि लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत लाया जाए ताकि क्षेत्र के आदिवासी समुदायों को संवैधानिक सुरक्षा मिल सके। साथ ही, वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे थे।

उनकी भूख हड़ताल 15 दिनों तक चली और 24 सितंबर को उन्होंने इसे समाप्त किया। लेकिन इस दौरान हिंसा बढ़ने लगी, जिस वजह से उन्होंने कहा कि “अब आंदोलन को और हिंसक होने से बचाना जरूरी है।”

लद्दाख एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की भूमिका

इस आंदोलन का नेतृत्व केवल सोनम वांगचुक ने नहीं किया। उनके साथ लेह एपेक्स बॉडी (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) भी खड़े रहे। ये दोनों संगठन लंबे समय से लद्दाख की राज्यhood और छठी अनुसूची की मांग को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत कर रहे हैं।

सरकार ने भी माना है कि वह लगातार हाई-पावर्ड कमेटी और सब-कमेटी के जरिए इन संगठनों से चर्चा कर रही थी। कई दौर की औपचारिक और अनौपचारिक बैठकें भी हो चुकी हैं।

केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच नई वार्ता

हिंसा और गिरफ्तारियों के बीच भी बातचीत का सिलसिला थमा नहीं है। 25 सितंबर 2025 को लेह में लद्दाख एपेक्स बॉडी और गृह मंत्रालय के बीच पहली बैठक हुई। अब 29 या 30 सितंबर को दूसरी बैठक दिल्ली में होनी तय है। इसमें लद्दाख के सांसद समेत सात प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

इसके बाद एक हाई-पावर्ड कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी ताकि बातचीत आगे बढ़ सके। यह संकेत है कि सरकार संवाद का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं करना चाहती।

गृह मंत्रालय का बयान और FCRA रद्दीकरण

गृह मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि,
“सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर को भूख हड़ताल शुरू की और छठी अनुसूची व राज्यhood की मांग रखी। यह भी सर्वविदित है कि सरकार इन मुद्दों पर लगातार एपेक्स बॉडी और KDA से चर्चा कर रही है। लेकिन इसके बावजूद कुछ नेताओं ने उत्तेजक बयान दिए जिससे हालात बिगड़े।”

इतना ही नहीं, सरकार ने वांगचुक के NGO की FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) सर्टिफिकेट भी रद्द कर दी। सरकार का कहना है कि फंडिंग के इस्तेमाल में भी कई सवाल खड़े हुए हैं।

राजनीतिक विवाद: BJP बनाम कांग्रेस

लद्दाख के हिंसक प्रदर्शनों ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पार्षद फुंतसोग स्टैनज़िन त्सेपाग (Upper Leh Ward) पर आरोप लगाया है कि उन्होंने भीड़ को भड़काया और हिंसा को अंजाम दिया। बीजेपी का आरोप है कि त्सेपाग हथियार के साथ भीड़ का नेतृत्व करते दिखे और उन्होंने बीजेपी दफ्तर व सरकारी संपत्ति को निशाना बनाया।

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि कांग्रेस के पार्षद ने इस हिंसा को हवा दी।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने सभी आरोपों से इनकार किया है। कांग्रेस का कहना है कि असली दोषियों को छिपाने के लिए सरकार उन पर झूठे आरोप लगा रही है। उन्होंने न्यायिक जांच की मांग की है ताकि असलियत सामने आ सके।

सोनम वांगचुक का जवाब

सोनम वांगचुक ने भी सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इस आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा,
“जिस व्यक्ति ने बीजेपी कार्यालय में प्रवेश किया, उसका नाम बताइए। कुछ हफ्ते पहले ही कांग्रेस पार्टी को हमारी एपेक्स बॉडी से बाहर कर दिया गया था ताकि आंदोलन गैर-राजनीतिक बना रहे। इसलिए यह आंदोलन कांग्रेस से जुड़ा नहीं है। उन्हें चुनाव तक बाहर रहने को कहा गया है। इसके बाद वे फिर इसमें शामिल हो सकते हैं।”

इस बयान से साफ है कि वांगचुक चाहते हैं कि आंदोलन पूरी तरह जनआधारित और गैर-राजनीतिक बना रहे।

लद्दाख की जनता की मांग क्यों अहम है?

लद्दाख एक संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र है, जो सीधे चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर स्थित है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियाँ और सांस्कृतिक पहचान अलग है।

छठी अनुसूची में शामिल होने से यहां की स्थानीय जनजातीय आबादी को भूमि, संसाधनों और सांस्कृतिक संरक्षण का संवैधानिक अधिकार मिल जाएगा। साथ ही, राज्यhood मिलने से लद्दाख के पास अपनी विधानसभा और स्वतंत्र प्रशासन होगा।

लोगों का मानना है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद उनकी आवाज़ और अधिकार सीमित हो गए हैं। यही वजह है कि आंदोलन इतना व्यापक हो गया है।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने लद्दाख की राजनीति और आंदोलन दोनों को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

  • एक ओर सरकार कह रही है कि हिंसा और भड़काऊ बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • दूसरी ओर, लद्दाख की जनता यह मान रही है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज़ हैं और उन्हें संवैधानिक सुरक्षा चाहिए।

आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाली बैठकें इस पूरे विवाद का भविष्य तय करेंगी। क्या लद्दाख को राज्य का दर्जा मिलेगा? क्या छठी अनुसूची लागू होगी? या फिर आंदोलन और ज्यादा उग्र होगा — यह सब सरकार और लद्दाख के नेताओं के बीच संवाद पर निर्भर करेगा।

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