Smriti Mandhana: नवी मुंबई के डॉ. डी. वाई. पाटिल स्टेडियम में गुरुवार को खेले गए महिला वर्ल्ड कप 2025 के सेमीफाइनल मुकाबले में भारत और ऑस्ट्रेलिया आमने-सामने थे। यह मैच रोमांच से भरा था, लेकिन एक पल ऐसा आया जिसने पूरे स्टेडियम को स्तब्ध कर दिया। जब स्मृति मंधाना को एक विवादित निर्णय के तहत आउट करार दिया गया, तो मानो पूरा माहौल ठहर गया।
Smriti Mandhana ने शानदार शुरुआत की थी। उन्होंने 24 गेंदों में 24 रन बनाए, जिसमें दो चौके और एक शानदार छक्का शामिल था। भारत 339 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा कर रहा था और शुरुआत काफी सकारात्मक नजर आ रही थी। लेकिन पावरप्ले के आखिरी ओवर में किस्मत ने करवट ली और एक गेंद ने सब कुछ बदल दिया।
वो डिलीवरी जिसने मैच का रुख पलट दिया | Smriti Mandhana

ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाज किम गार्थ ने एक गेंद फेंकी जो लेग साइड की ओर जा रही थी। ऑन-फील्ड अंपायर ने उसे वाइड करार दिया और Smriti Mandhana ने अगले गेंद की तैयारी कर ली। लेकिन तभी ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर एलिसा हीली ने आत्मविश्वास के साथ डीआरएस की मांग की।
रीप्ले आने के बाद सबकी नजरें स्क्रीन पर टिक गईं। स्निकोमीटर पर हल्का सा स्पाइक दिखा जिससे साफ हो गया कि गेंद बल्ले को छूकर गुजरी थी। अंपायर ने फैसला पलटते हुए मंधाना को आउट करार दिया। स्टेडियम में सन्नाटा छा गया। मंधाना वहीं पिच पर कुछ पल के लिए ठिठकी रह गईं।
वह सिर हिलाती हुईं, निराश चेहरे के साथ मैदान से बाहर जाती नजर आईं। उनके चेहरे की झलक बता रही थी कि यह फैसला उनके लिए कितना अप्रत्याशित था।
टीम इंडिया के लिए शुरुआती झटका
भारत ने पावरप्ले तक अच्छी रन गति बनाए रखी थी। मंधाना के आउट होने के बाद टीम की लय थोड़ी टूट गई। यह विकेट ऑस्ट्रेलिया के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ क्योंकि मंधाना अगर कुछ और देर क्रीज पर टिक जातीं तो मैच की दिशा बदल सकती थीं।
टीम इंडिया को उम्मीद थी कि उनकी सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज एक बड़ी पारी खेलेंगी और मैच को मजबूत स्थिति में ले जाएँगी। लेकिन इस आउट ने भारत को शुरुआत में ही झटका दे दिया।
मंधाना का टूर्नामेंट प्रदर्शन निरंतरता की मिसाल
भले ही सेमीफाइनल में उनका आउट होना निराशाजनक था लेकिन स्मृति मंधाना का पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने आठ मैचों में कुल 389 रन बनाए। उनका औसत 55.57 और स्ट्राइक रेट 102.36 रहा। यह आंकड़े बताते हैं कि वह भारत की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज क्यों हैं।
लीग स्टेज में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विशाखापत्तनम में 80 रन की बेहतरीन पारी खेली थी। उस मैच में उन्होंने साथी खिलाड़ी प्रतिका रावल के साथ मिलकर शतकीय साझेदारी भी की थी। यही नहीं उन्होंने महिला वनडे क्रिकेट में सबसे तेज़ 5000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
न्यूजीलैंड के खिलाफ नवी मुंबई में उन्होंने अपना 14वां वनडे शतक जड़ा। अब वे सिर्फ एक शतक दूर हैं मेग लैन्निंग के 15 वनडे शतकों के रिकॉर्ड से। यह उपलब्धि बताती है कि मंधाना भारतीय क्रिकेट इतिहास में कितनी बड़ी जगह रखती हैं।
एक आउट, कई सीख मंधाना की दृढ़ता की कहानी
Smriti Mandhana का यह आउट जितना दुर्भाग्यपूर्ण था उतना ही यह क्रिकेट की अनिश्चितता का सबक भी देता है। वह आत्मविश्वास के साथ खेल रही थीं लेकिन तकनीक और भाग्य के मेल ने मैच का रुख बदल दिया।
हालांकि ऐसे ही क्षण एक खिलाड़ी को मजबूत बनाते हैं। मंधाना मैदान से लौटते वक्त भले ही निराश थीं लेकिन उनकी आंखों में दृढ़ता साफ दिख रही थी। वह जानती हैं कि असली जवाब अगले मैच में मिलेगा। यही जज़्बा उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
टीम इंडिया के लिए मंधाना का महत्व

Smriti Mandhana सिर्फ एक ओपनर नहीं बल्कि भारतीय महिला टीम की आत्मा हैं। जब वे आत्मविश्वास के साथ खेलती हैं तो पूरी टीम में ऊर्जा भर जाती है। उनका खेल लय देता है और उनका रवैया आत्मविश्वास बढ़ाता है।
उनकी तकनीक, शॉट सिलेक्शन और टाइमिंग महिला क्रिकेट में बेमिसाल हैं। स्विंग लेती गेंदों पर ड्राइव खेलना हो या स्पिनर के खिलाफ स्वीप लगाना, मंधाना हर परिस्थिति में सहज दिखाई देती हैं। यही वजह है कि उन्हें भारत की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज कहा जाता है।
फैंस की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर गुस्सा और सहानुभूति
Smriti Mandhana के आउट होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। भारतीय फैंस ने इसे बदकिस्मत आउट बताया और तकनीकी फैसले पर सवाल उठाए। वहीं ऑस्ट्रेलियाई फैंस ने कहा कि तकनीक ने सही निर्णय दिया।
फिर भी सभी फैंस एक बात पर सहमत थे कि मंधाना इस टूर्नामेंट में भारत की सबसे स्थिर और भरोसेमंद बल्लेबाज रही हैं। प्रशंसकों ने उन्हें “फाइटर” कहा और लिखा कि एक आउट से फर्क नहीं पड़ता क्योंकि असली खिलाड़ी हमेशा वापसी करते हैं।
नए मुकाम की ओर कदम
स्मृति मंधाना के लिए यह वर्ल्ड कप अब भी गर्व की यात्रा रहा है। उनकी निरंतरता, आत्मविश्वास और प्रदर्शन आने वाले वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट को नई दिशा देंगे।
भारत को भले ही फाइनल में जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़े लेकिन मंधाना जैसी खिलाड़ी टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनका यह आउट शायद एक झटका था लेकिन यही अनुभव उन्हें और मजबूत बनाएगा।
एक पल का झटका लेकिन कहानी जारी है
क्रिकेट का असली आकर्षण उसकी अनिश्चितता में है। Smriti Mandhana का आउट इस सच्चाई की याद दिलाता है कि कभी-कभी तकनीक, भाग्य और भावना तीनों एक साथ खेल में उतर आते हैं।
वह आउट भले ही विवादित रहा हो लेकिन मंधाना का आत्मविश्वास और प्रदर्शन यह बताने के लिए काफी है कि वह सिर्फ खिलाड़ी नहीं बल्कि प्रेरणा हैं। वह गिरती हैं लेकिन हर बार और ऊंचा उठना जानती हैं।
उनकी यह कहानी हर युवा खिलाड़ी के लिए एक सबक है कि हार को रुकावट नहीं बल्कि शुरुआत बनाओ। स्मृति मंधाना ने यह दिखा दिया है कि असली चैंपियन वो नहीं जो हमेशा जीतते हैं, बल्कि वो हैं जो हर बार गिरकर भी मुस्कुराते हुए फिर से मैदान पर लौटते हैं।
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