रविवार तड़के, भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन Shubhanshu Shukla का दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत हुआ। उनके आगमन पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और बड़ी संख्या में नागरिकों ने उन्हें गर्मजोशी से अभिनंदन किया। यह न केवल उनके व्यक्तिगत साहस और उपलब्धि का प्रतीक था, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का पल था। चार दशक बाद भारत ने फिर से मानव अंतरिक्ष मिशन में कदम रखा है, और इस सफलता के केंद्र में शुक्ला थे। स्वागत समारोह में उपस्थित लोगों की आँखों में गर्व और उत्साह साफ देखा जा सकता था, जो देश की नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
#LIVE | India’s space hero Shubhanshu Shukla landed in Delhi after successful completion of his historic ISS mission.
Upon his arrival, Shubhanshu Shukla was received by Union Minister Dr. Jitendra Singh, Delhi Chief Minister Rekha Gupta and ISRO Chairman Dr. V. Narayanan. His… pic.twitter.com/IztlKpMHSI
— DD News (@DDNewslive) August 16, 2025
Axiom-4 मिशन: विज्ञान और साहस का संगम
ग्रुप कैप्टन Shubhanshu Shukla ने जून 2025 में Axiom Mission 4 (Ax-4) के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की। यह मिशन विशेष महत्व का था क्योंकि वह राकेश शर्मा के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले दूसरे भारतीय बने। इस मिशन में उन्होंने सात अलग-अलग वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें ‘Suite Ride’ अध्ययन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह प्रयोग अंतरिक्ष में ग्लूकोज नियंत्रण और मानव शरीर पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव को समझने के लिए किया गया। इसके परिणाम भविष्य में मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में और अंतरिक्ष चिकित्सा के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेंगे। शुभांशु ने इस मिशन के दौरान NASA, Axiom और SpaceX की अत्याधुनिक सुविधाओं का अनुभव किया, जिससे उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी संचालन का गहन ज्ञान मिला। इस अनुभव का लाभ भारत के आगामी गगनयान मिशन और भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन की योजनाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
अंतरिक्ष यात्रा का व्यक्तिगत अनुभव

अंतरिक्ष में बिताए गए समय के दौरान ग्रुप कैप्टन Shubhanshu Shukla ने न केवल वैज्ञानिक प्रयोग किए बल्कि अंतरिक्ष जीवन का भी अनुभव किया। अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने लिखा कि वह अंतरिक्ष में बिताए गए एक साल के दौरान मिले दोस्तों और सहकर्मियों को याद कर भावुक हो रहे थे। उन्होंने अपने देश लौटने की खुशी और बिछड़ने का दुख एक साथ महसूस किया। उन्होंने कहा, “जैसा कि मेरी कमांडर पेगी व्हिटसन कहती हैं, ‘अंतरिक्ष उड़ान में एकमात्र स्थिरता परिवर्तन है’, और मुझे लगता है कि यह जीवन पर भी लागू होता है।” उनके शब्द यह दर्शाते हैं कि अंतरिक्ष यात्रा केवल वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि मानव अनुभव, मानसिक धैर्य और भावनाओं का भी परिचायक है।
गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष भविष्य
Shubhanshu Shukla का मिशन भारत के गगनयान प्रोजेक्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गगनयान, भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन, 2027 में लॉन्च होने की योजना है। इस मिशन के अनुभव से शुक्ला भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दे सकेंगे। इसके अलावा, भारत 2035 तक अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन, ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’, स्थापित करने की योजना बना रहा है। 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन की संभावना भी इस योजना का हिस्सा है। शुभांशु के अनुभव और अंतरिक्ष में किए गए प्रयोगों का अध्ययन भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को आत्मनिर्भर और विश्वस्तरीय बनाने में सहायक होगा।
राजनीतिक और सामाजिक मान्यता
Shubhanshu Shukla के इस ऐतिहासिक मिशन की राजनीतिक और सामाजिक मान्यता भी अत्यधिक रही। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरे देश में युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई देते हुए कहा कि देश के हर नागरिक को इस उपलब्धि पर गर्व है। इसके अलावा, लोकसभा में भारत की अंतरिक्ष यात्रा और उनके मिशन पर विशेष चर्चा आयोजित की गई। चर्चा का विषय था – “अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री – विकसित भारत 2047 के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम की भूमिका।” यह बहस न केवल अंतरिक्ष विज्ञान की प्रगति पर केंद्रित थी बल्कि इसे देश की विकास यात्रा और भविष्य की रणनीति से भी जोड़ा गया।
परिवार की खुशी और भावनाएँ
लखनऊ में रहने वाले शुभांशु शुक्ला के परिवार ने मिशन के दौरान और अब उनके लौटने पर अपार खुशी जताई। उनके पिता, शंभू दयाल शुक्ला, ने कहा कि उनका बेटा सफलतापूर्वक मिशन पूरा कर देश लौटा है, और इसे देखकर परिवार और देशवासी समान रूप से गर्व महसूस कर रहे हैं। मिशन की तैयारी के दौरान और अंतरिक्ष में बिताए गए समय में परिवार ने उन्हें मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान किया। शुभांशु की यह यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे परिवार और भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर प्रधानमंत्री से मुलाकात
23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर ग्रुप कैप्टन Shubhanshu Shukla प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम में वे अपने अंतरिक्ष अनुभव साझा करेंगे और आगामी मानवयुक्त मिशनों के लिए अपनी सलाह और मार्गदर्शन देंगे। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में विशेष रूप से उनका उल्लेख किया था और उनसे भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए दस्तावेजीकरण करने के लिए कहा था। यह दर्शाता है कि उनके मिशन की जानकारी और अनुभव भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
भारत का अंतरिक्ष में भविष्य
Shubhanshu Shukla के इस मिशन ने यह साबित कर दिया कि भारत अब अंतरिक्ष में गंभीर दावेदारी करने के लिए तैयार है। गगनयान मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रमा मिशन जैसी योजनाएं देश को वैश्विक अंतरिक्ष मंच पर नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने की क्षमता रखती हैं। यह मिशन विज्ञान, तकनीकी, और मानव साहस का अद्वितीय उदाहरण है। भारतीय युवाओं के लिए यह संदेश है कि मेहनत, साहस और ज्ञान से सीमाएँ नहीं रहतीं।
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