School Holiday: अगस्त और सितंबर 2025 का महीना उत्तर भारत के लिए बेहद कठिन साबित हो रहा है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात इतने बिगड़ गए कि पंजाब सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 3 सितंबर तक बंद करने का आदेश दिया, वहीं जम्मू में भी 1 सितंबर को सभी स्कूल बंद रहे।
यह निर्णय छात्रों और अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि नदियों का पानी गांवों और कस्बों में घुस चुका है, सड़कें टूटी हैं और जगह-जगह पानी भरा हुआ है।
पंजाब में बाढ़ की विभीषिका
पंजाब में आई बाढ़ को पिछले चार दशकों की सबसे बड़ी आपदा बताया जा रहा है। 1988 के बाद पहली बार इतनी बड़ी तबाही देखने को मिल रही है। राज्य के सात बड़े जिले—गुरदासपुर, कपूरथला, अमृतसर, पठानकोट, फिरोजपुर, फाजिल्का और होशियारपुर—सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
करीब 1,000 से अधिक गांवों में पानी भर गया है। 3 लाख एकड़ से ज्यादा की खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। किसानों की मेहनत पानी में बह गई और अब उनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
स्कूल बंद: बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले | School Holiday
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैन्स ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर सभी सरकारी, मान्यता प्राप्त और प्राइवेट स्कूलों को 3 सितंबर 2025 तक बंद रखा जाएगा।
उन्होंने अभिभावकों और बच्चों से अपील की कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
इससे पहले 27 अगस्त से 30 अगस्त तक भी स्कूलों की छुट्टी की घोषणा की गई थी। मगर बाढ़ की स्थिति सामान्य न होने पर छुट्टियों को आगे बढ़ाना पड़ा।
जम्मू में हालात
जम्मू-कश्मीर में भी लगातार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। किश्तवार, कठुआ, रियासी और रामबन जिलों में सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
14 अगस्त से शुरू हुई इस तबाही में अब तक 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, 120 से अधिक घायल हैं और करीब 33 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
भारी बारिश और भूस्खलन के चलते जम्मू क्षेत्र के सभी स्कूलों को सोमवार, 1 सितंबर को बंद रखा गया। राष्ट्रीय राजमार्ग भी लगातार कई दिनों तक बंद रहा जिससे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
राहत और बचाव कार्य
पंजाब और जम्मू दोनों जगह प्रशासन और सेना राहत व बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं।
भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड ने 47 यूनिट्स को तैनात किया है, जिनमें आर्मी एविएशन टीम, एयरफोर्स हेलीकॉप्टर, इंजीनियरिंग और मेडिकल यूनिट्स शामिल हैं। इनकी मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है और उन्हें भोजन व दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं।
पठानकोट और आसपास के इलाकों में हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। लुधियाना से हजारों राशन किट्स भेजकर प्रभावित परिवारों को राहत दी जा रही है।
किसानों की तबाही और मुआवजा
सबसे बड़ी चिंता किसानों की है। धान और मक्के की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन बाढ़ ने सब चौपट कर दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से ₹60,000 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पैसा पंजाब का है जो केंद्र के पास अटका हुआ है और इससे राज्य में राहत कार्यों को तेज़ी से चलाया जा सकेगा।
इसके अलावा उन्होंने स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) के नियमों में बदलाव की मांग की है। पंजाब सरकार चाहती है कि किसानों को कम से कम ₹50,000 प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपनी ओर से 25% हिस्सेदारी देगी, लेकिन केंद्र को भी मदद करनी चाहिए।
विपक्ष का हमला
जहां सरकार राहत कार्यों में जुटी है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल खड़ा कर रहा है।
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शिअरोमानी अकाली दल ने कहा कि अगर तुरंत राहत और मुआवजा नहीं दिया गया तो आंदोलन होगा।
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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ₹230 करोड़ रुपये बाढ़-रोधी उपायों पर खर्च करने का दावा किया गया था, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई तैयारी नहीं दिखी।
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किसानों ने भी शिकायत की है कि बीमा योजनाओं की कमी के कारण उन्हें किसी तरह की सुरक्षा नहीं मिली। पंजाब न तो केंद्र की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल है और न ही अपनी कोई नीति लागू कर पाया है।
बाढ़ प्रभावित गांवों की हालत
पटियाला के घनौर गांव समेत कई इलाकों में फसलें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। किसानों का कहना है कि उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है और अगर मुआवजा नहीं मिला तो वे कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे।
गांवों में रहने वाले लोग राहत कैंपों में शरण लिए हुए हैं। कई जगह लोग छतों पर और ऊंची इमारतों में फंसे रहे, जिन्हें सेना ने हेलीकॉप्टर से बचाया।
जम्मू में बादल फटने का खौफ
जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में 14 अगस्त को चोसोटी गांव में बादल फटने की घटना सबसे भीषण रही। इसमें दर्जनों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए। कई परिवार अब भी लापता हैं।
लगातार बारिश से पहाड़ दरक रहे हैं और गांवों में मलबा घुस रहा है। मकान ढह गए हैं, सड़कें टूट गई हैं और लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
भविष्य की चुनौतियां
पंजाब और जम्मू की इस त्रासदी ने साफ कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन और मानसून की अनियमितता से निपटने के लिए हमें लंबी योजना बनानी होगी।
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नदियों के किनारे मजबूत तटबंध बनाने होंगे।
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जल निकासी की व्यवस्था बेहतर करनी होगी।
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किसानों के लिए मजबूत बीमा योजना लागू करनी होगी ताकि भविष्य में उन्हें इतनी बड़ी आर्थिक चोट न लगे।
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स्कूलों और बच्चों के लिए आपातकालीन ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली तैयार करनी होगी ताकि लंबे समय तक पढ़ाई बाधित न हो।
पंजाब और जम्मू दोनों ही राज्यों में बाढ़ और बारिश ने भारी तबाही मचाई है। स्कूलों का बंद होना बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी था, लेकिन असली चिंता किसानों और आम लोगों के जीवन की है।
सरकार राहत और मुआवजे की बात कर रही है, विपक्ष सवाल उठा रहा है, और लोग अभी भी सुरक्षित जीवन की तलाश में हैं।
यह संकट हमें यह सिखाता है कि प्रकृति के सामने हम कितने असहाय हैं, और हमें पहले से तैयारियों पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
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