सलमान खान ने सिकंदर विवाद पर तोड़ी चुप्पी: ईद 2025 पर रिलीज़ हुई सलमान खान की फिल्म “सिकंदर” को लेकर शुरुआत में ही जबरदस्त चर्चा थी। बड़े बजट, दमदार एक्शन और ए. आर. मुरुगदॉस जैसे साउथ इंडस्ट्री के नामी निर्देशक की मौजूदगी से दर्शकों की उम्मीदें आसमान पर थीं।
मगर फिल्म के रिलीज़ के कुछ हफ्तों के भीतर ही, यह फिल्म सुर्खियों में अपने कंटेंट या कलेक्शन से ज़्यादा विवादों की वजह से रहने लगी। निर्देशक मुरुगदॉस के बयान और सलमान खान की तीखी प्रतिक्रिया ने इस विवाद को और हवा दी।

निर्देशक मुरुगदॉस का बयान: “मैं शूटिंग के दौरान हैंडीकैप्ड महसूस कर रहा था”
फिल्म की असफलता के बाद, निर्देशक ए. आर. मुरुगदॉस ने मीडिया से कहा कि उन्हें “सिकंदर” बनाते वक्त कई सीमाओं का सामना करना पड़ा।
उनका कहना था कि हिंदी भाषा में काम करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था —
“मैंने कहानी दिल से कही थी, लेकिन भाषा और सांस्कृतिक अंतर के कारण अपनी भावनाएँ ठीक से उतार नहीं पाया। कभी-कभी लगा कि मैं सीमित हो गया हूँ, जैसे हैंडीकैप्ड महसूस कर रहा हूँ।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई सीन्स में बदलाव हुए, कुछ संवादों को “स्थानीय टोन” में ढाला गया, जिससे कहानी की आत्मा कमजोर पड़ गई।
मुरुगदॉस के मुताबिक, स्क्रिप्ट की एडिटिंग, राजनीतिक संदर्भों को हटाना, और कुछ भावनात्मक दृश्यों का कट जाना फिल्म के नैरेटिव पर असर डाल गया।
सलमान खान का पलटवार: “काम मिला क्या भाई?”
फिल्म की आलोचना और मुरुगदॉस के बयान के बाद सलमान खान ने चुप्पी तोड़ते हुए सोशल मीडिया पर कहा —
“काम मिला क्या भाई? जब फिल्म चलती है तो सब कहते हैं टीमवर्क, और जब नहीं चलती तो सबको किसी एक पर डालना होता है।”
उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें विवादों की कोई जरूरत नहीं —
“हमें विवाद नहीं चाहिए। फिल्म चली तो बढ़िया, नहीं चली तो सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन दोषारोपण करना प्रोफेशनलिज़्म नहीं है।”
सलमान ने यह भी कहा कि “सिकंदर” की कहानी और एडिटिंग पर सबकी सहमति थी, और अगर कोई क्रिएटिव मतभेद था भी, तो उसे चर्चा में सुलझाया जा सकता था, न कि पब्लिक प्लेटफ़ॉर्म पर।
अबिनव कश्यप पर पुराना तंज भी याद आया:
सलमान के बयान में एक और दिलचस्प बात थी। उन्होंने बिना नाम लिए, पुराने विवाद यानी “दबंग” के निर्देशक अभिनव कश्यप पर भी कटाक्ष किया।
याद दिला दें कि अभिनव कश्यप ने सालों पहले सलमान खान और उनके परिवार पर करियर “साबोटेज” करने के आरोप लगाए थे।
सलमान ने कहा —
“कुछ लोग काम खत्म होने के बाद बातें करते हैं ताकि उन्हें अगली फिल्म या हेडलाइन मिल सके। अबिनव कश्यप हों या कोई और, सबको आखिर में ‘काम मिला क्या भाई?’ यही सवाल रह जाता है।”
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर सलमान के फैंस एक्टिव हो गए और #KaamMilaKyaBhai ट्रेंड करने लगा।
सोशल मीडिया और दर्शकों की प्रतिक्रिया:
इंटरनेट पर इस पूरे विवाद पर दर्शकों की राय बंटी हुई है —
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कुछ का कहना है कि मुरुगदॉस का दर्द जायज़ है, क्योंकि हिंदी बेल्ट में साउथ डायरेक्टरों को भावनात्मक संवादों में कठिनाई आती है।
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वहीं सलमान के समर्थक कहते हैं कि विफलता का दोष किसी एक व्यक्ति पर डालना गलत है, क्योंकि फिल्म बनाना सामूहिक प्रयास होता है।
कई यूज़र्स ने लिखा कि “सिकंदर” में एक्शन तो जबरदस्त था, लेकिन कहानी उतनी मज़बूत नहीं थी।
काजल अग्रवाल और रश्मिका मंदाना के रोल्स को लेकर भी दर्शक विभाजित थे — कुछ का कहना था कि उनके हिस्से के सीन काटे जाने से भावनात्मक असर घटा।
सेंसर बोर्ड और अन्य विवाद:
“सिकंदर” रिलीज़ से पहले भी विवादों में रही थी।
CBFC ने फिल्म के कुछ सीन में राजनीतिक संदर्भों को हटाने की सलाह दी थी।
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“Home Minister” शब्द को म्यूट किया गया।
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कुछ राजनीतिक झंडे और होर्डिंग्स को ब्लर करना पड़ा।
इसके अलावा, सोशल मीडिया पर झूठी अफवाह फैली कि सलमान के “Being Human” स्टोर पर फिल्म के बॉयकॉट को लेकर हमला हुआ, जबकि बाद में यह खबर गलत साबित हुई।
इन सब घटनाओं ने फिल्म के माहौल को और नेगेटिव बना दिया।
फिल्म का प्रदर्शन और बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट:
“सिकंदर” ने शुरुआती दिनों में ₹50 करोड़ से अधिक की कमाई की, लेकिन तीसरे हफ्ते में गिरावट आई।
जहाँ सलमान की ईद रिलीज़ फिल्मों से ₹200 करोड़ तक की उम्मीद रहती है, वहीं “सिकंदर” ₹110 करोड़ के आसपास ही रुक गई।
ट्रेड एनालिस्ट्स का कहना है कि कमज़ोर स्क्रिप्ट, भावनात्मक गहराई की कमी, और नेगेटिव प्रचार ने फिल्म को प्रभावित किया।
विवाद नहीं, आत्ममंथन ज़रूरी:
“सिकंदर” का विवाद यह बताता है कि बॉलीवुड में भाषा, भावना और विज़न के बीच की दूरी कितनी गहरी है।
ए. आर. मुरुगदॉस का अनुभव यह दर्शाता है कि साउथ से हिंदी में आने वाले डायरेक्टरों के लिए भावनात्मक कनेक्शन बनाना मुश्किल होता है।
वहीं सलमान खान की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि स्टारडम के बावजूद उन्हें भी टीमवर्क और सम्मान की अहमियत समझ में आती है।
आख़िरकार, चाहे “काम मिला क्या भाई” का तंज हो या “हैंडीकैप्ड महसूस करने” वाला बयान —
दोनों ही पक्षों को यह याद रखना होगा कि दर्शक सिर्फ एक्शन नहीं, दिल से कही कहानियाँ देखना चाहते हैं।
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