S Jaishankar UNGA Speech: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का भाषण दुनिया के लिए सख्त चेतावनी साबित हुआ। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ करार देते हुए कहा कि दशकों से बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी हमलों के निशान एक ही देश की ओर जाते हैं। इस मौके पर जयशंकर ने न सिर्फ पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र किया, बल्कि भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति और ऑपरेशन सिंदूर को भी दुनिया के सामने रखा। उनका यह संबोधन भारत की कूटनीतिक मजबूती और आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति का स्पष्ट प्रमाण था।
पाकिस्तान पर सीधा निशाना | S Jaishankar UNGA Speech

जयशंकर ने महासभा के मंच से कहा कि भारत आजादी के बाद से ही आतंकवाद का शिकार रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण उसका पड़ोसी देश पाकिस्तान है, जो दशकों से “वैश्विक आतंकवाद का केंद्र” बना हुआ है। उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि दुनिया में होने वाले कई बड़े आतंकी हमलों की जड़ें पाकिस्तान से जुड़ी हुई हैं।
भारत ने बार-बार सबूत दिए हैं कि पाकिस्तान की जमीन पर आतंकवादी संगठन न केवल पलते-बढ़ते हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक और राजनीतिक संरक्षण भी मिलता है। संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में शामिल कई नाम सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं।
पहलगाम हमला: आतंकी बर्बरता का ताजा उदाहरण
जयशंकर ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का विशेष उल्लेख किया। अप्रैल 2025 में हुआ यह हमला भारत के लिए एक दर्दनाक घटना थी। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी।
यह हमला केवल एक आतंकी वारदात नहीं था, बल्कि पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवाद का ताजा उदाहरण था। आतंकियों ने निहत्थे और मासूम लोगों को निशाना बनाया, जिससे स्पष्ट हुआ कि आतंकवाद का उद्देश्य केवल खून-खराबा और डर फैलाना है।
इस घटना ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को हिला दिया। भारत ने इसके तुरंत बाद आतंकियों की पहचान और उनके नेटवर्क को उजागर किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने सच्चाई रखी।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’: भारत का सख्त जवाब
पहलगाम हमले के बाद भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस अभियान का लक्ष्य था आतंकवादियों के ठिकानों को ध्वस्त करना और उनके नेटवर्क को तोड़ना।
इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई बेहद नियंत्रित और सटीक थी। भारत ने साफ किया कि उसका निशाना आतंकवादी ढांचे और उनके आकाओं पर है, न कि किसी आम नागरिक या पाकिस्तानी सेना पर।
विदेश मंत्री जयशंकर ने महासभा में बताया कि भारत ने इस ऑपरेशन के पहले और बाद में पूरी दुनिया को जानकारी दी। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद को पालने वाले देशों को इसका खामियाजा खुद भी भुगतना पड़ेगा।
आतंकवाद पर भारत का सख्त रुख
जयशंकर ने अपने संबोधन में दोहराया कि भारत हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाता आया है। उन्होंने कहा,
“भारत ने आतंकवाद के आकाओं और अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया है और ऐसा आगे भी करता रहेगा।”
भारत का मानना है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। आतंकवाद को रोकने के लिए कठोर कदम उठाना और आतंकियों को दंडित करना ही एकमात्र रास्ता है। यही कारण है कि भारत ने हमेशा इस मुद्दे पर समझौते से इनकार किया है।
#WATCH | EAM Dr S Jaishankar begins his address at the 80th session of the United Nations General Assembly (UNGA)
“Namaskar from the people of Bharat. We are gathered here, eight decades since the founding of this unique body. The UN Charter calls on us not just to prevent war,… pic.twitter.com/uA4jX2Q7Rd
— ANI (@ANI) September 27, 2025
पाकिस्तान की दोहरी नीति और वैश्विक खतरा
जयशंकर ने पाकिस्तान की दोहरी नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान दुनिया के सामने शांति की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ उसकी जमीन पर आतंकियों को ट्रेनिंग कैंप और हथियार मिलते हैं।
पाकिस्तान की यही नीति न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है। अफगानिस्तान से लेकर पश्चिमी देशों तक, हर जगह आतंकवादी नेटवर्क के तार पाकिस्तान से जुड़ते पाए गए हैं।
दुनिया के सामने भारत का संदेश
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद पर दोहरे मानक नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को महिमामंडित करना, उन्हें पनाह देना और उनके अपराधों पर आंख मूंद लेना, ये सब कार्य उतने ही खतरनाक हैं जितना खुद आतंकवाद।
उन्होंने दुनिया से अपील की कि सभी देश एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े हों और उसे बढ़ावा देने वाले देशों को अलग-थलग करें।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और कूटनीति
भारत ने पहलगाम हमले के बाद न केवल सैन्य कार्रवाई की, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी बड़ा अभियान चलाया। जयशंकर ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने से पहले भारत ने 193 देशों से संपर्क किया और उन्हें आतंकवाद के सबूत दिए।
परिणाम यह हुआ कि केवल गिने-चुने देशों को छोड़कर अधिकांश विश्व समुदाय ने भारत के कदम का समर्थन किया। कई देशों ने खुले तौर पर आतंकवाद की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता दिखाई।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी बयान जारी कर आतंकवाद की निंदा की और आतंकियों को सजा दिलाने की बात कही।
भारत का भविष्य का रास्ता
भारत का रुख साफ है — आतंकवाद के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। आने वाले समय में भारत आतंकियों के नेटवर्क को और कमजोर करने की रणनीति पर काम करेगा।
भारत यह भी सुनिश्चित करेगा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बने। आतंकवाद अब सिर्फ भारत की समस्या नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिया गया भाषण भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। इस भाषण ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
पाकिस्तान को सीधे तौर पर आतंकवाद का गढ़ बताकर जयशंकर ने न केवल भारत का पक्ष मजबूती से रखा, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की दिशा भी तय की।
भारत का संदेश साफ है — आतंकवाद को पालने वालों को अब छिपने की जगह नहीं मिलेगी।
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