Republic Day Parade 2026: जानिए गणतंत्र दिवस की परेड से जुड़े रोचक तथ्य, 21 तोपों की सलामी का क्या है मतलब?

Republic Day Parade 2026: भारत इस बार अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गर्व और उत्साह के साथ मनाने की तैयारी कर रहा है। 26 जनवरी का दिन हर भारतीय के लिए बेहद खास होता है, क्योंकि इसी दिन हमारा देश एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना था। गणतंत्र दिवस के मौके पर होने वाली भव्य परेड न केवल देश की सैन्य ताकत को दर्शाती है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता की भी झलक पेश करती है।

हर साल लाखों लोग टीवी स्क्रीन और कर्तव्य पथ पर मौजूद रहकर इस ऐतिहासिक परेड को देखते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर गणतंत्र दिवस की परेड कितने किलोमीटर लंबी होती है और 21 तोपों की सलामी की परंपरा का क्या महत्व है।

कर्तव्य पथ से जुड़ा है गणतंत्र दिवस की परेड का गौरव | Republic Day Parade 2026:

Republic Day Parade 2026

गणतंत्र दिवस की परेड दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित की जाती है, जिसे पहले राजपथ के नाम से जाना जाता था। यह मार्ग भारत की सत्ता और लोकतंत्र का प्रतीक माना जाता है। कर्तव्य पथ राष्ट्रपति भवन से शुरू होकर विजय चौक, इंडिया गेट होते हुए राष्ट्रीय स्टेडियम के आसपास तक जाता है।

यह वही ऐतिहासिक रास्ता है, जहां देश की सेना, अर्धसैनिक बल, राज्यों की झांकियां और स्कूली बच्चे कदम से कदम मिलाकर चलते हैं और भारत की शक्ति व संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं।

गणतंत्र दिवस की परेड कितने किलोमीटर की होती है

अगर गणतंत्र दिवस की परेड की कुल दूरी की बात करें, तो यह आमतौर पर लगभग 8 से 9 किलोमीटर लंबी होती है। परेड की शुरुआत राष्ट्रपति भवन के पास से होती है और यह इंडिया गेट होते हुए आगे बढ़ती है। हालांकि परेड का मुख्य आकर्षण और औपचारिक कार्यक्रम कर्तव्य पथ पर ही संपन्न होता है, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहते हैं।

इतनी लंबी दूरी तय करने वाली यह परेड कई घंटों तक चलती है, जिसमें सेना की टुकड़ियां, बैंड, एनसीसी कैडेट्स, झांकियां और मोटरसाइकिल स्टंट शामिल होते हैं। यह पूरी प्रक्रिया बेहद अनुशासित और समयबद्ध होती है।

परेड की शुरुआत कैसे होती है

गणतंत्र दिवस की परेड की शुरुआत एक बेहद गरिमामय परंपरा से होती है। सबसे पहले राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर पहुंचते हैं, जहां प्रधानमंत्री उनका स्वागत करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और राष्ट्रगान गाया जाता है।

इसी के साथ 21 तोपों की सलामी दी जाती है, जो भारत की संप्रभुता और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। इसके बाद परेड का औपचारिक शुभारंभ होता है।

21 तोपों की सलामी का क्या है महत्व

गणतंत्र दिवस पर दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य परंपरा है। यह सलामी किसी भी देश के सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। भारत में यह सलामी राष्ट्रपति को दी जाती है, क्योंकि वे सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं।

21 तोपों की सलामी यह दर्शाती है कि देश अपनी स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है।

कौन-सी तोप से दी जाती है सलामी

इस बार गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी देने के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया जाएगा। यह तोप पूरी तरह से स्वदेशी है और भारतीय सेना की ताकत का प्रतीक मानी जाती है।

इस तोप की खासियत यह है कि इसकी फायरिंग रेंज करीब 17.2 किलोमीटर तक है और यह एक मिनट में 6 राउंड फायर करने की क्षमता रखती है। स्वदेशी तोपों का इस्तेमाल ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को भी दर्शाता है।

1950 से चली आ रही है यह ऐतिहासिक परंपरा

गणतंत्र दिवस की परंपरा की शुरुआत 26 जनवरी 1950 को हुई थी। इसी दिन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराया था और 21 तोपों की सलामी के साथ भारत को पूर्ण गणराज्य घोषित किया गया था।

उस दिन से लेकर आज तक हर साल गणतंत्र दिवस इसी गरिमा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। समय के साथ परेड का स्वरूप और भव्यता जरूर बढ़ी है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य आज भी वही है।

गणतंत्र दिवस की परेड क्यों होती है इतनी खास

गणतंत्र दिवस की परेड केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होती, बल्कि यह भारत की ताकत, एकता और विविधता का उत्सव होती है। इस परेड में जहां सेना अपने आधुनिक हथियारों और अनुशासन का प्रदर्शन करती है, वहीं राज्यों की झांकियां भारत की सांस्कृतिक विरासत और विकास की झलक दिखाती हैं।

स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियां देश के भविष्य की तस्वीर पेश करती हैं और मोटरसाइकिल स्टंट भारतीय सेना के साहस और कौशल को दर्शाते हैं।

कर्तव्य पथ पर दिखती है भारत की झलक

कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में भारत के हर कोने की झलक देखने को मिलती है। अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां उनकी संस्कृति, परंपरा और उपलब्धियों को दर्शाती हैं। यही वजह है कि यह परेड न केवल भारतीयों के लिए, बल्कि विदेशी मेहमानों के लिए भी आकर्षण का केंद्र होती है।

गणतंत्र दिवस का असली संदेश

गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की ताकत उसके संविधान और नागरिकों में निहित है। यह दिन हमें हमारे अधिकारों के साथ-साथ हमारे कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। परेड की हर झलक देशवासियों में गर्व और जिम्मेदारी का भाव जगाती है।

गणतंत्र दिवस की परेड सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का उत्सव है। करीब 8 से 9 किलोमीटर लंबी यह परेड और 21 तोपों की सलामी देश की संप्रभुता, सैन्य शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। हर साल 26 जनवरी को यह आयोजन हमें अपने इतिहास पर गर्व करने और भविष्य के प्रति आशान्वित रहने की प्रेरणा देता है।

गणतंत्र दिवस की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों को भी यह संदेश देती रहेगी कि भारत एक मजबूत, एकजुट और आत्मनिर्भर राष्ट्र है।

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