Republic Day 2026: 26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है और इस बार का आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रवाद और एकता का जीवंत उत्सव बनेगी। इस बार परेड का मुख्य आकर्षण करीब 2500 कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति होगी, जो देश के अलग-अलग हिस्सों से आकर भारतीय संस्कृति की विविधता को मंच पर उतारेंगे।
इस वर्ष की परेड खास इसलिए भी है क्योंकि यह राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की जा रही है। इसी ऐतिहासिक अवसर को ध्यान में रखते हुए परेड की पूरी थीम, संगीत, नृत्य और दृश्य प्रस्तुति को विशेष रूप से तैयार किया गया है।
‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर आधारित ऐतिहासिक थीम | Republic Day 2026

गणतंत्र दिवस परेड 2026 का केंद्रीय विषय ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि का मंत्र – विकसित भारत’ रखा गया है। यह थीम भारत के स्वतंत्रता संग्राम की भावना और भविष्य के भारत के सपनों को एक साथ जोड़ती है। ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा रहा है। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था और इस गीत ने आज़ादी की लड़ाई के दौरान करोड़ों भारतीयों में जोश और साहस भरा।
150 साल पूरे होने के इस ऐतिहासिक मौके पर गणतंत्र दिवस परेड के माध्यम से देश उस गीत को श्रद्धांजलि देगा, जिसने भारत को एक सूत्र में बांधा।
2500 कलाकार करेंगे सामूहिक सांस्कृतिक प्रस्तुति
इस बार की परेड का सबसे भव्य हिस्सा होगा करीब 2500 कलाकारों का एक साथ प्रदर्शन। ये कलाकार भारत के विभिन्न राज्यों से आए होंगे और देश के पारंपरिक नृत्य रूपों का प्रतिनिधित्व करेंगे। भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी जैसे शास्त्रीय और लोक नृत्यों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर जीवंत किया जाएगा।
इतने बड़े स्तर पर एक साथ कलाकारों का प्रदर्शन गणतंत्र दिवस परेड के इतिहास में बेहद खास माना जा रहा है। यह प्रस्तुति न सिर्फ देखने में भव्य होगी, बल्कि यह भारत की “एकता में विविधता” की भावना को भी मजबूती से दर्शाएगी।
फिल्म और कला जगत की बड़ी हस्तियों की रचनात्मक टीम
गणतंत्र दिवस 2026 की इस विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए एक बेहद अनुभवी और प्रतिष्ठित रचनात्मक टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। संगीत निर्देशन की कमान संभाल रहे हैं ऑस्कर विजेता संगीतकार एम.एम. कीरावनी। उन्हें वैश्विक पहचान तब मिली जब फिल्म ‘आरआरआर’ के गीत ‘नाटु नाटु’ ने 2023 में ऑस्कर पुरस्कार जीता।
गीत लेखन की जिम्मेदारी मशहूर गीतकार सुभाष सहगल निभा रहे हैं, जबकि पूरी प्रस्तुति को आवाज़ और भावनात्मक गहराई देने का काम अभिनेता अनुपम खेर करेंगे। नृत्य की कोरियोग्राफी प्रसिद्ध कोरियोग्राफर संतोष नायर द्वारा की जा रही है। इस पूरे सांस्कृतिक कार्यक्रम का संपूर्ण पर्यवेक्षण और निर्देशन संध्या पुरेचा के अधीन है।
परिधान और दृश्य डिजाइन की खास जिम्मेदारी
इस भव्य प्रस्तुति में कलाकारों के परिधान और मंच की दृश्य रचना भी बेहद अहम भूमिका निभाएगी। रचनात्मक डिजाइन और परिधान की जिम्मेदारी संध्या रमन को सौंपी गई है। परिधानों में भारत की पारंपरिक कलाओं, रंगों और सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिलेगी।
हर नृत्य रूप के अनुसार परिधान को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह उस क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा को सही मायने में दर्शा सके। इससे पूरी परेड एक चलते-फिरते सांस्कृतिक कैनवास की तरह नजर आएगी।
कर्तव्य पथ पर दिखेगी इतिहास और राष्ट्रवाद की झलक

परेड के दौरान कर्तव्य पथ के किनारे लगाए गए आवरणों में राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती छंदों को दर्शाने वाले पुराने और दुर्लभ चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। ये चित्र भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौर की याद दिलाएंगे और दर्शकों को उस समय की भावना से जोड़ेंगे।
मुख्य मंच पर ‘वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि देने के लिए पुष्पों से बनी विशेष कलाकृतियां सजाई जाएंगी। यह दृश्य न सिर्फ ऐतिहासिक होगा, बल्कि भावनात्मक रूप से भी दर्शकों को गहराई से छूएगा।
परंपरा से हटकर स्थानों के नाम भारतीय नदियों पर
गणतंत्र दिवस 2026 में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। परंपरागत रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले ‘वीवीआईपी’ जैसे शब्दों का इस बार उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय परेड स्थल पर सभी बैठने के स्थानों के नाम भारत की प्रसिद्ध नदियों के नाम पर रखे गए हैं।
इन नामों में गंगा, यमुना, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, कावेरी, गोदावरी, कृष्णा, सतलुज, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, कोसी, महानदी, ताप्ती, तीस्ता, पेरियार, वैगई और अन्य नदियां शामिल हैं। यह पहल भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बीटिंग द रिट्रीट समारोह में भी दिखेगी सांस्कृतिक झलक
गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 29 जनवरी को होने वाले ‘बीटिंग द रिट्रीट’ समारोह के साथ होगा। इस अवसर पर भी परंपरा से हटकर एक नई पहल की गई है। बैठने के स्थानों के नाम इस बार भारतीय वाद्ययंत्रों के नाम पर रखे गए हैं।
बांसुरी, तबला, सितार, वीणा, शहनाई, मृदंगम, पखावज, संतूर, सरोद, सारंगी और नगाड़ा जैसे वाद्ययंत्रों के नाम दर्शाते हैं कि भारतीय संगीत और कला को इस वर्ष विशेष सम्मान दिया जा रहा है।
मुख्य अतिथि और अंतरराष्ट्रीय संदेश
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनकी उपस्थिति भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है।
यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक नेतृत्व को भी दर्शाता है।
‘वंदे मातरम’ थीम के साथ होगा समापन
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, गणतंत्र दिवस समारोह के निमंत्रण पत्र पर भी ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का विशेष लोगो छापा गया है। परेड के अंत में ‘वंदे मातरम’ थीम वाले बैनरों के साथ गुब्बारों का एक बड़ा गुच्छा आसमान में छोड़ा जाएगा।
यह दृश्य देशभक्ति, गर्व और एकता की भावना से ओतप्रोत होगा और लाखों लोगों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ेगा।
77वां गणतंत्र दिवस सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का उत्सव बनने जा रहा है। 2500 कलाकारों की प्रस्तुति, ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक थीम, सांस्कृतिक विविधता और नए प्रयोग इस परेड को अब तक की सबसे खास परेडों में शामिल करेंगे।
26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर होने वाला यह आयोजन आने वाले वर्षों तक लोगों की यादों में जीवित रहेगा और देश को एक बार फिर अपनी जड़ों और भविष्य दोनों से जोड़ने का काम करेगा।
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