राजस्थानी घेवर रेसिपी: राजस्थान की रसोई अपनी विविधता और परंपरा के लिए जानी जाती है। यहाँ की मिठाइयाँ न केवल स्वाद में खास होती हैं बल्कि उनका एक सांस्कृतिक महत्व भी होता है। उन्हीं में से एक है घेवर – यह मिठाई विशेष रूप से सावन और तीज-त्योहारों पर बनाई जाती है। इसकी जालीदार बनावट, ऊपर डाली गई मलाई और केसर-पिस्ता से सजी सजावट इसे देखने में भी आकर्षक बनाती है।

घेवर का इतिहास:
घेवर का इतिहास काफी पुराना है और इसकी जड़ें राजस्थान की संस्कृति से गहराई तक जुड़ी हैं।
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कहा जाता है कि घेवर की उत्पत्ति जयपुर और अलवर क्षेत्रों में हुई थी।
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पारंपरिक रूप से इसे सावन के महीने में बनाया जाता है क्योंकि इस समय मानसून की शुरुआत होती है और परिवारजन मिलकर तीज और राखी जैसे त्योहार मनाते हैं।
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विवाह और खास अवसरों पर भी घेवर का विशेष महत्व है। राजस्थान के अलावा अब यह हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक अपनी पहचान बना चुका है।
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घेवर केवल मिठाई ही नहीं बल्कि त्योहार की रौनक और अपनापन का प्रतीक है।
घेवर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री:
घेवर बनाने में सामग्री आम है लेकिन बनाने की तकनीक थोड़ी खास है।
सामग्री (3-4 मध्यम घेवर के लिए):
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मैदा – 2 कप
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घी – ½ कप (ठंडा)
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ठंडा दूध – ½ कप
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ठंडा पानी – लगभग 1 से 1.5 कप
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बर्फ के टुकड़े – 2-3
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घी या तेल – तलने के लिए
चाशनी के लिए:
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चीनी – 2 कप
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पानी – 1 कप
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इलायची पाउडर – ½ चम्मच
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केसर – कुछ धागे
सजावट के लिए:
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मलाई या रबड़ी – 1 कप
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पिस्ता-बादाम – बारीक कटे हुए
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चाँदी का वर्क (इच्छानुसार)
घेवर बनाने की विधि:
1. घोल तैयार करना
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सबसे पहले एक बर्तन में मैदा लें।
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इसमें ठंडा घी और बर्फ डालकर हाथ से अच्छे से मिलाएँ।
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अब इसमें ठंडा दूध और ठंडा पानी डालते हुए पतला घोल तैयार करें। ध्यान रखें कि घोल इतना पतला हो कि बह सके।
2. चाशनी बनाना
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एक पैन में चीनी और पानी डालकर चाशनी पकाएँ।
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एक तार की चाशनी तैयार करें।
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इसमें इलायची पाउडर और केसर डाल दें।
3. घेवर तलना
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एक गहरे पैन या कढ़ाही में घी या तेल गरम करें।
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जब घी गरम हो जाए तो बीच में से थोड़ा घोल ऊँचाई से डालें।
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घोल डालते समय ध्यान दें कि बीच में छेद बने।
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धीरे-धीरे कई बार घोल डालते रहें ताकि घेवर की जालीदार परत बनती जाए।
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सुनहरा होने पर इसे सावधानी से निकाल लें और अतिरिक्त घी टपकने दें।
4. चाशनी में डुबाना
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तले हुए घेवर को हल्की गर्म चाशनी में एक बार डुबोकर तुरंत निकाल लें।
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चाहें तो बिना चाशनी के भी सिर्फ मलाई से सजाकर खा सकते हैं।
5. सजावट
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घेवर को प्लेट में रखें।
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ऊपर से मलाई/रबड़ी डालें।
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पिस्ता-बादाम और चाँदी का वर्क लगाकर परोसें।
घेवर के प्रकार:
समय के साथ घेवर की कई किस्में बन चुकी हैं:
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मलाई घेवर – ऊपर से मलाई और सूखे मेवे डालकर सजाया जाता है।
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रबड़ी घेवर – मोटे घेवर पर रबड़ी डालकर तैयार किया जाता है।
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प्लेन घेवर – बिना चाशनी या सजावट का साधारण घेवर।
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केसरिया घेवर – केसर वाली चाशनी से बना खास स्वादिष्ट घेवर।
पोषण और स्वाद:
घेवर स्वाद में तो लाजवाब है ही, साथ ही इसमें घी और दूध की भरपूर मात्रा होती है। यह शरीर को ऊर्जा देता है। त्योहारों पर इसे खाने से उत्सव का आनंद दोगुना हो जाता है।
घेवर केवल एक मिठाई नहीं बल्कि राजस्थान की परंपरा, संस्कृति और खुशियों का प्रतीक है। तीज, राखी और सावन जैसे त्योहारों की बात ही अधूरी है यदि घेवर न हो। इसकी कुरकुरी बनावट, मीठी चाशनी और मलाईदार सजावट हर किसी के मन को मोह लेती है। आज चाहे यह मिठाई भारत के किसी भी कोने में मिल जाए, लेकिन इसका असली स्वाद और पहचान अब भी राजस्थान से ही जुड़ा हुआ है।
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