Putrada Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। प्रत्येक माह में आने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इन्हीं एकादशियों में पुत्रदा एकादशी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति के लिए किया जाता है। मान्यता है कि जो दंपत्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करते हैं, उन्हें योग्य और संस्कारी संतान का वरदान प्राप्त होता है।
🌺 Pausha Putrada Ekadashi / Vaikuntha Ekadashi 🌺
Today marks Pausha Putrada Ekadashi 🙏
In South India and many Vishnu temples, this sacred day is celebrated as Vaikuntha Ekadashi (Mukkoti Ekadashi) — the day when the Vaikuntha Dwara (Gate of Vaikuntha) is believed to open… pic.twitter.com/VhCsyDEewC
— RR (@RR_Explorer) December 30, 2025
पुत्रदा एकादशी कब मनाई जाती है?
पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है-
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पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (जनवरी माह में)
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श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी
इन दोनों एकादशियों को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इनमें पौष मास की पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है।
पुत्रदा एकादशी (पौष पुत्रदा एकादशी) की तिथि:
पौष पुत्रदा एकादशी इस वर्ष 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को शुरू होकर 31 दिसंबर 2025 (बुधवार) तक रहेगी। इसे वैदिक पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि माना जाता है, इसलिए कई लोग 30 दिसंबर को व्रत रखते हैं और 31 दिसंबर को पारण करते हैं।
अगर आप 30 दिसंबर को व्रत रखते हैं, तो पारण 31 दिसंबर 2025 को दोपहर के समय करना शुभ माना जाता है।
इसके अलावा, 2026 में दूसरी ‘श्रावण पुत्रदा एकादशी’ भी होगी, जो 23 अगस्त 2026 (रविवार) को पड़ेगी।
पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व:
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, संतान प्राप्ति में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। निःसंतान दंपत्ति यदि पूर्ण श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ इस व्रत को करते हैं, तो भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें संतान सुख प्राप्त होता है।
यह व्रत न केवल संतान प्राप्ति के लिए, बल्कि-
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पापों के नाश के लिए
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जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए
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मोक्ष की प्राप्ति के लिए
भी किया जाता है।

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा:
प्राचीन समय की बात है। भद्रावती नगरी में राजा सुकृत्मा नामक एक धर्मात्मा और न्यायप्रिय राजा राज्य करता था। उसकी पत्नी का नाम रानी शैव्या था। राजा और रानी दोनों ही धार्मिक, दयालु और प्रजा के हितैषी थे। उनके राज्य में किसी को कोई कष्ट नहीं था, किंतु उनके जीवन में एक बड़ा दुख था- उनकी कोई संतान नहीं थी।
राजा और रानी संतान न होने के कारण अत्यंत दुखी रहते थे। राजा को यह चिंता सताने लगी कि उनके बाद राज्य का उत्तराधिकारी कौन होगा और पितरों का श्राद्ध कौन करेगा। उन्होंने अनेक यज्ञ, दान और तप किए, लेकिन कोई फल नहीं मिला।
एक दिन राजा अपने दुख से व्याकुल होकर वन की ओर निकल पड़े। वन में भ्रमण करते हुए उन्होंने कई ऋषि-मुनियों के आश्रम देखे। अंततः वे महर्षि लोमश के आश्रम पहुँचे। राजा ने महर्षि को अपनी सारी व्यथा सुनाई और संतान प्राप्ति का उपाय पूछा।
महर्षि लोमश ने राजा से कहा-
“हे राजन! तुम पूर्व जन्म के एक पाप के कारण संतान सुख से वंचित हो। किंतु यदि तुम पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करो और उसका फल अपनी पत्नी के साथ साझा करो, तो तुम्हें निश्चित ही पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी।”
राजा सुकृत्मा ने प्रसन्न होकर महर्षि को प्रणाम किया और उनके बताए अनुसार व्रत करने का निश्चय किया।
व्रत का पालन और फल:
एकादशी के दिन राजा और रानी ने पूर्ण उपवास रखा। उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा की, रात्रि जागरण किया और द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराया तथा दान-दक्षिणा दी। उन्होंने इस व्रत को पूरे श्रद्धा भाव से संपन्न किया।
भगवान विष्णु की कृपा से कुछ समय बाद रानी शैव्या गर्भवती हुईं और उन्होंने एक तेजस्वी, धर्मात्मा पुत्र को जन्म दिया। राजा और रानी का जीवन आनंद से भर गया। इस प्रकार पुत्रदा एकादशी व्रत के प्रभाव से उन्हें संतान सुख प्राप्त हुआ।
पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजा विधि (संक्षेप में):
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एकादशी से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें
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एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें
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भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र की पूजा करें
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“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
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रात्रि जागरण करें और भजन-कीर्तन करें
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द्वादशी के दिन व्रत का पारण करें
पुत्रदा एकादशी व्रत श्रद्धा, विश्वास और संयम का प्रतीक है। यह व्रत केवल संतान प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को धर्म, भक्ति और आत्मिक शांति की ओर भी प्रेरित करता है। जो भी श्रद्धालु इस व्रत को सच्चे मन से करता है, उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा अवश्य होती है।
यदि आप संतान सुख की कामना करते हैं या अपने जीवन में सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो पुत्रदा एकादशी व्रत अवश्य करें और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहें।
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