Pulse Polio Programme 2025: भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिनमें पल्स पोलियो कार्यक्रम (Pulse Polio Programme) सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में से एक है। वर्ष 2025 में यह कार्यक्रम एक बार फिर पूरे देश में पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू किया गया है, ताकि पोलियो जैसी गंभीर और अपंगता पैदा करने वाली बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सके।

पल्स पोलियो कार्यक्रम क्या है?
पल्स पोलियो कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान है, जिसका उद्देश्य 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक देना है। इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) की दो बूंदें पिलाई जाती हैं, चाहे उन्हें पहले टीके लगे हों या नहीं। यह कार्यक्रम आमतौर पर राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय टीकाकरण दिवसों पर चलाया जाता है।
Administered polio drops to children today as part of the Greater Bengaluru Authority (GBA) – Pulse Polio Campaign 2025.
From 21–24 December, booth-based and door-to-door vaccination will cover transit sites and high-risk areas across Bengaluru.
I urge every parent to ensure… pic.twitter.com/vV2cH6WYrH
— DK Shivakumar (@DKShivakumar) December 21, 2025
भारत में पल्स पोलियो अभियान का इतिहास:
भारत में पल्स पोलियो कार्यक्रम की शुरुआत 1995 में हुई थी। उस समय देश में हर साल हजारों बच्चे पोलियो से प्रभावित हो रहे थे। लगातार चलाए गए इस अभियान, जागरूकता, स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत और जनता के सहयोग से भारत ने एक बड़ी सफलता हासिल की। वर्ष 2014 में भारत को आधिकारिक रूप से पोलियो मुक्त देश घोषित किया गया। हालांकि, पड़ोसी देशों में पोलियो के मामले सामने आने के कारण सतर्कता बनाए रखना आज भी बेहद जरूरी है।
Pulse Polio Programme 2025 का उद्देश्य:
2025 के पल्स पोलियो कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
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देश में पोलियो वायरस की पुनः एंट्री को रोकना
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सभी बच्चों तक पोलियो वैक्सीन की 100% पहुंच सुनिश्चित करना
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दूर-दराज़, प्रवासी और वंचित वर्ग के बच्चों को भी कवर करना
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अभिभावकों में टीकाकरण के प्रति जागरूकता और विश्वास बढ़ाना
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भारत की पोलियो मुक्त स्थिति को बनाए रखना
2025 में कार्यक्रम की विशेषताएं:
Pulse Polio Programme 2025 को और प्रभावी बनाने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं:
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डोर-टू-डोर अभियान: स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिला रहे हैं।
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ट्रांजिट पॉइंट टीकाकरण: रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, हवाई अड्डों और मेलों में भी टीकाकरण की व्यवस्था की गई है।
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डिजिटल मॉनिटरिंग: टीकाकरण डेटा को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड किया जा रहा है, जिससे निगरानी और पारदर्शिता बढ़ी है।
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स्वयंसेवकों की भागीदारी: आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एनजीओ और छात्र स्वयंसेवक इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पोलियो: एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी
पोलियो एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। यह वायरस दूषित पानी और भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। कई मामलों में यह स्थायी अपंगता या मृत्यु का कारण भी बन सकता है। दुख की बात यह है कि पोलियो का कोई इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
अभिभावकों की भूमिका क्यों जरूरी है?
Pulse Polio Programme 2025 की सफलता में अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कई बार गलतफहमियों, अफवाहों या लापरवाही के कारण बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं। यह समझना जरूरी है कि:
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पोलियो की खुराक सुरक्षित और प्रभावी है
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बार-बार खुराक देने से बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता
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टीकाकरण सभी बच्चों के लिए जरूरी है, चाहे वे स्वस्थ दिखें या पहले से टीकाकृत हों
सरकार और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी:
पल्स पोलियो कार्यक्रम केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का सामूहिक प्रयास है। मीडिया, धार्मिक नेता, शिक्षक और स्थानीय समुदाय इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब समाज मिलकर स्वास्थ्य अभियानों का समर्थन करता है, तभी उनका वास्तविक असर दिखाई देता है।
भविष्य की दिशा:
Pulse Polio Programme 2025 यह याद दिलाता है कि सफलता मिलने के बाद भी सतर्क रहना जरूरी है। जब तक दुनिया से पोलियो पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक भारत को भी लगातार प्रयास करते रहना होगा। यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करता है, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती का भी प्रतीक है।
पल्स पोलियो कार्यक्रम 2025 भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह अभियान हमें सिखाता है कि सही रणनीति, निरंतर प्रयास और जनभागीदारी से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। आइए, हम सभी मिलकर यह सुनिश्चित करें कि भारत का हर बच्चा पोलियो से सुरक्षित रहे और हमारा देश हमेशा पोलियो मुक्त बना रहे।
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