पल्स पोलियो अभियान 2025: भारत ने 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पोलियो मुक्त देश घोषित होकर इतिहास रच दिया था। लेकिन यह उपलब्धि केवल एक मील का पत्थर है, मंज़िल नहीं। पोलियो वायरस अभी भी पड़ोसी देशों में मौजूद है, और किसी भी लापरवाही से यह फिर लौट सकता है। इसी खतरे को रोकने के लिए भारत सरकार हर साल पल्स पोलियो अभियान चलाती है — और पल्स पोलियो 2025 इस मिशन को और मज़बूत बनाने का संकल्प लेकर आया है।

पल्स पोलियो अभियान क्या है?
पल्स पोलियो अभियान भारत सरकार का एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक देना है। इस अभियान के तहत बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) के दो बूंद दिए जाते हैं।
इसकी शुरुआत 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री नरसिंह राव के नेतृत्व में हुई थी, और इसे बाद में “दो बूंद ज़िंदगी की” स्लोगन के ज़रिए देशभर में लोकप्रिय बनाया गया।
2025 में पल्स पोलियो अभियान की खास बातें:
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अभियान की तारीखें:
वर्ष 2025 में पल्स पोलियो अभियान जनवरी और मार्च में दो चरणों में चलाया जाएगा। केंद्र सरकार ने राज्यों को पहले से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। -
डोर-टू-डोर कवरेज:
इस बार स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक देंगी, ताकि कोई भी बच्चा छूट न जाए। -
डिजिटल निगरानी प्रणाली:
2025 में पोलियो अभियान को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा। मोबाइल ऐप के ज़रिए वैक्सीनेशन की वास्तविक समय में रिपोर्टिंग होगी। -
सामुदायिक भागीदारी:
आशा वर्कर, आंगनवाड़ी कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि और स्कूल शिक्षक मिलकर इस अभियान को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएंगे।
पोलियो क्या है और कितना खतरनाक है?
पोलियो (Poliomyelitis) एक संक्रामक वायरस है जो बच्चों को प्रभावित करता है और स्थायी लकवा (paralysis) तक का कारण बन सकता है। यह वायरस दूषित पानी, भोजन या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है।
पोलियो के तीन मुख्य प्रकार हैं —
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पोलियो वायरस टाइप 1
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पोलियो वायरस टाइप 2
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पोलियो वायरस टाइप 3
हालांकि भारत में ये वायरस खत्म हो चुके हैं, लेकिन दुनिया के कुछ देशों में अब भी इनके मामले मिल रहे हैं। इसलिए सतर्कता जरूरी है।
सरकार और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका:
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ (UNICEF) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) इस कार्यक्रम के प्रमुख सहयोगी हैं।
पल्स पोलियो बूथों पर हर वर्ष लाखों स्वास्थ्यकर्मी और स्वयंसेवक तैनात रहते हैं। वे न केवल बच्चों को वैक्सीन देते हैं, बल्कि लोगों को जागरूक भी करते हैं कि हर बच्चा इन दो बूंदों से कितना सुरक्षित हो सकता है।
लोगों की जिम्मेदारी क्या है?
पल्स पोलियो अभियान की सफलता केवल सरकार पर नहीं, बल्कि हर नागरिक पर निर्भर करती है।
आपकी जिम्मेदारी है:
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अपने घर और आस-पास के हर बच्चे को पोलियो बूथ पर लेकर जाएं।
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सुनिश्चित करें कि 5 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा बिना वैक्सीन के न रहे।
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जागरूकता फैलाएं — “दो बूंद ज़िंदगी की” का संदेश हर गली, हर मोहल्ले तक पहुंचाएं।
पल्स पोलियो अभियान की उपलब्धियाँ:
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भारत ने 2011 में अपना अंतिम पोलियो केस दर्ज किया था।
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2014 में WHO ने भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया।
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इस अभियान के कारण लाखों बच्चों को स्थायी अपंगता से बचाया गया।
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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
2025 में नई चुनौतियाँ:
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कुछ क्षेत्रों में अभी भी अफवाहें और गलत धारणाएँ हैं कि वैक्सीन नुकसानदायक है।
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दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण कुछ बच्चे छूट जाते हैं।
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कोविड-19 महामारी के बाद टीकाकरण दर में थोड़ी गिरावट देखी गई थी, जिसे अब सुधारना जरूरी है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने नई जागरूकता रणनीतियाँ, सामाजिक अभियानों और स्थानीय नेताओं की भागीदारी पर ज़ोर दिया है।
“दो बूंद ज़िंदगी की” – एक राष्ट्रीय संकल्प
पल्स पोलियो अभियान 2025 सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की एकजुटता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह इस मुहिम का हिस्सा बने और अपने आस-पास के हर बच्चे को पोलियो की खुराक दिलाए।
याद रखें:
👉 हर बूंद मायने रखती है।
👉 हर बच्चा सुरक्षित होगा, तभी भारत सशक्त होगा।
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