Poland Meets India: भारत-पोलैंड संबंधों का भविष्य तय

Poland Meets India: नई दिल्ली में 19 दिसंबर, 2025 को भारत और पोलैंड के बीच कूटनीतिक बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड को स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद के प्रति कोई सहिष्णुता नहीं होनी चाहिए और पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को बढ़ावा देने में मदद नहीं करनी चाहिए। इस दौरान पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोर्स्की ने भारत की रूस-नेतृत्व वाली सैन्य अभ्यासों में भागीदारी पर अपनी चिंता जताई।

जयशंकर का संदेश: “चयनात्मक निशाना अनुचित है”:

जयशंकर ने वार्ता की शुरुआत में कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यूक्रेन संघर्ष पर अपनी स्थिति लगातार स्पष्ट की है, लेकिन इसे चुनिंदा रूप से निशाना बनाए जाने को भारत अनुचित मानता है। उन्होंने कहा:
“मैं बार-बार कह चुका हूँ कि भारत पर चयनात्मक रूप से निशाना साधना अनुचित और अन्यायपूर्ण है। आज मैं इसे दोहराता हूँ।”

इसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर दिया और सिकोर्स्की से कहा कि पोलैंड को आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता दिखानी चाहिए। जयशंकर ने सिकोर्स्की के अफगानिस्तान में युद्ध संवाददाता के अनुभव का हवाला देते हुए यह आशा जताई कि पोलैंड भारत के पड़ोस में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संदेश सिकोर्स्की की अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान यात्रा के बाद भारत की असहमति को दर्शाता है। उस यात्रा के दौरान पोलैंड और पाकिस्तान ने संयुक्त बयान जारी किया था, जिसमें कश्मीर और यूक्रेन दोनों पर चर्चा की गई थी। भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और किसी तीसरे देश की दखलअंदाजी स्वीकार्य नहीं है।

Poland Meets India

सिकोर्स्की का रुख: आतंकवाद में सहमति, यूक्रेन में मतभेद:

वार्ता के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिकोर्स्की ने कहा कि भारत और पोलैंड आतंकवाद के मामले में एक मत साझा करते हैं। उन्होंने कहा:
“हम दोनों अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने वाले आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हैं। भारत और पोलैंड दोनों ही ट्रांसनेशनल आतंकवाद का शिकार रहे हैं।”

सिकोर्स्की ने पोलैंड में हाल ही में हुए रेलवे बम धमाकों और राज्य-स्तरीय आतंकवाद प्रयासों का हवाला देते हुए कहा कि पोलैंड भी आतंकवाद से प्रभावित रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सौभाग्य से इन घटनाओं में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

हालांकि, सिकोर्स्की ने भारत की यूक्रेन और रूस के साथ सैन्य अभ्यासों में भागीदारी पर चिंता जताई। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने जापद-2025 अभ्यास में 65 कर्मियों को भेजा, जिसे रूस और बेलारूस ने आयोजित किया। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालस ने भी कहा कि भारत की भागीदारी गहरी साझेदारी में बाधा डाल सकती है।

सिकोर्स्की ने यह भी कहा कि कई NATO सदस्य देशों, जिनमें अमेरिका शामिल है, ने इन अभ्यासों में प्रेक्षक के रूप में भाग लिया। उन्होंने स्वीकार किया कि यह विषय बातचीत का हिस्सा था और दोनों पक्षों ने इसे ईमानदारी से साझा किया।

आर्थिक दबाव और चयनात्मक टैरिफ:

जयशंकर ने भारत पर चयनात्मक आर्थिक दबाव की भी आलोचना की। उन्होंने अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ का उदाहरण दिया, जो ऊर्जा के लिए रूस से भारत की खरीद के कारण बढ़कर 50% हो गया। भारत ने तर्क दिया कि यह असमान और अनुचित है, खासकर जब कई यूरोपीय देश रूस से ऊर्जा खरीदते हैं।

सिकोर्स्की ने भी इस बात से सहमति जताई और कहा कि चयनात्मक टैरिफ वैश्विक व्यापार में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन करते हैं, क्योंकि रूस ने बुडापेस्ट समझौते, सीमा संधियों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया।

रूस से तेल की खरीद पर टिप्पणी:

इससे पहले, सिकोर्स्की ने भारत की रूस से तेल की खरीद को लेकर भी कड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि यह “पुतिन की युद्ध मशीन को वित्तपोषित करने” जैसा है। यह टिप्पणी भारत की विदेश नीति और रूस के साथ आर्थिक संबंधों पर यूरोप की चिंता को दर्शाती है।

रणनीतिक संतुलन और वैश्विक भूमिका:

इस संवाद से यह स्पष्ट हुआ कि भारत अब आतंकवाद और संप्रभुता के मुद्दों पर किसी समझौते के लिए समझौता नहीं करेगा, और वैश्विक मंच पर समान दृष्टिकोण और नैतिकता की अपेक्षा करता है। वहीं, पोलैंड और यूरोप के लिए भारत की रूस के साथ संबंध और सैन्य अभ्यास में भागीदारी चिंता का विषय बनी हुई है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में भारत और पोलैंड के संबंध दोस्ताना और सहकारी रहेंगे, लेकिन उनमें स्पष्ट रुख, आपसी सम्मान और राष्ट्रीय हित की प्राथमिकता तय करने वाले होंगे।

भारत की यह नीति यह संकेत देती है कि वह वैश्विक मंच पर मजबूत और स्पष्ट रुख अपनाते हुए अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा करेगा, जबकि आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर किसी भी समझौते से समझौता नहीं करेगा।

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