Papankusha ekadashi 2025 पापांकुशा एकादशी 2025: महत्व, व्रत कथा, विधि और फायदे

Papankusha ekadashi 2025: हिंदू धर्म में वर्ष भर में कुल 24 एकादशियाँ आती हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशेष महत्व है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं। यह तिथि पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से व्रत करने वाला हर प्रकार के पाप बंधन से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त करता है। वर्ष 2025 में पापांकुशा एकादशी का व्रत 5 अक्टूबर 2025, रविवार को मनाया जाएगा।

Papankusha ekadashi 2025
            Papankusha ekadashi 2025

पापांकुशा एकादशी का महत्व:

पापांकुशा एकादशी का व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस एकादशी के व्रत का फल सहस्त्र गोदान, अश्वमेध यज्ञ और गंगा स्नान के समान बताया गया है।

धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति पापांकुशा एकादशी का व्रत करता है, उसे मृत्यु के समय यमदूतों का भय नहीं होता और भगवान विष्णु अपने धाम में उसे स्थान प्रदान करते हैं। साथ ही यह व्रत भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

पापांकुशा एकादशी की कथा:

एक पौराणिक कथा के अनुसार, विन्ध्य पर्वत पर ‘कुशध्वज’ नाम का एक निर्दयी और पापी शिकारी रहता था। उसने जीवनभर हिंसा, शिकार और अधर्म के कार्य किए। बुढ़ापे में जब उसका मृत्यु समय निकट आया तो उसे अपने पापों का बोध हुआ और भयभीत होकर वह एक महर्षि के पास पहुँचा। महर्षि ने उससे कहा कि यदि वह अपने जीवन के पापों से मुक्त होना चाहता है, तो पापांकुशा एकादशी का व्रत करे।

शिकारी ने विधिपूर्वक इस व्रत को किया। उसके सभी पाप नष्ट हो गए और मृत्यु के पश्चात उसे परम धाम की प्राप्ति हुई। इस कथा से स्पष्ट होता है कि यह व्रत व्यक्ति को सबसे कठिन परिस्थितियों में भी पापमुक्त कर सकता है।

व्रत विधि:

पापांकुशा एकादशी के दिन व्रत करने वाले को प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेते समय भगवान विष्णु का स्मरण अवश्य करना चाहिए।

  1. स्नान और पूजा – सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

  2. संकल्प – धूप, दीप, पुष्प और जल अर्पित करते हुए व्रत का संकल्प लें।

  3. उपासना – दिनभर विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करें।

  4. भोजन नियम – व्रतधारी को इस दिन अनाज और तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिए। केवल फलाहार या निर्जल व्रत रखा जा सकता है।

  5. आरती और भजन – संध्या समय दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु की आरती करें और भजन-कीर्तन करें।

  6. द्वादशी पारण – अगले दिन द्वादशी तिथि को दान-पुण्य करके व्रत का पारण करना चाहिए।

इस दिन दान-पुण्य का महत्व:

शास्त्रों में कहा गया है कि पापांकुशा एकादशी पर व्रत के साथ-साथ दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी होता है। अन्न, वस्त्र, गौ, स्वर्ण, भूमि अथवा जरूरतमंदों को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना गया है। इस दिन किया गया दान मनुष्य को अक्षय फल देता है और पितरों की आत्मा को भी शांति प्रदान करता है।

पापांकुशा एकादशी से जुड़े विशेष लाभ:

  1. जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं।

  2. मृत्यु के समय यमदूतों का भय नहीं रहता।

  3. भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

  4. जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

  5. पितृ तृप्त होते हैं और वंश में कल्याण होता है।

पापांकुशा एकादशी का व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान का एक साधन है। यह दिन हमें यह संदेश देता है कि चाहे जीवन में कितने भी पाप या गलतियां क्यों न हो गई हों, सच्चे मन से की गई भक्ति और व्रत से मनुष्य पुनः धर्ममार्ग पर आ सकता है। वर्ष 2025 में 5 अक्टूबर को आने वाली पापांकुशा एकादशी का व्रत हर श्रद्धालु के लिए पापों से मुक्त होकर विष्णुधाम की प्राप्ति का द्वार खोलने वाला होगा।

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