सबसे अलग और अनोखी रेसिपी पनीर मद्रा: भारत के हर राज्य की अपनी अलग खान-पान संस्कृति है। जिस तरह राजस्थान अपने दाल-बाटी-चूरमा और उत्तराखंड अपने भट्ट की दाल व झोल से पहचाना जाता है, उसी तरह हिमाचल प्रदेश अपनी धाम परंपरा और खास व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। इनमें से एक विशेष व्यंजन है – पनीर मद्रा (Paneer Madra)। यह व्यंजन न केवल स्वाद में लाजवाब होता है बल्कि हिमाचली संस्कृति और धार्मिक आयोजनों का अहम हिस्सा भी है।

पनीर मद्रा का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व:
“मद्रा” शब्द मूल रूप से कांगड़ा और चंबा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पहले समय में यह व्यंजन केवल राजसी भोज और मंदिरों में विशेष पर्वों पर बनाया जाता था। धीरे-धीरे यह इतना लोकप्रिय हो गया कि हर हिमाचली शादी-ब्याह और त्योहार में “धाम” के मेन्यू का अनिवार्य हिस्सा बन गया।
धाम में जो व्यंजन परोसे जाते हैं, उनमें चना मद्रा, राजमा मद्रा और पनीर मद्रा को सबसे खास माना जाता है। दही और देशी मसालों से बना यह व्यंजन पचने में आसान होने के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूर होता है। पारंपरिक रूप से इसे ब्राह्मण बावची (खवास) लोग बड़े-बड़े पीतल के बर्तनों (कड़ाही) में बनाते थे।
पनीर मद्रा को “सात्विक भोजन” की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि इसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता। यही कारण है कि यह मंदिर प्रसाद और धार्मिक भोज में भी बनाया जाता है।
सबसे अलग और अनोखी रेसिपी पनीर मद्रा की विशेषताएँ:
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यह पूरी तरह दही (Curd) पर आधारित करी है।
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इसमें प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे यह सात्विक और पवित्र माना जाता है।
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पनीर को हल्के मसालों में पकाया जाता है जिससे इसका स्वाद और भी निखर जाता है।
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इसका स्वाद खट्टा, हल्का मसालेदार और मलाईदार होता है।
पनीर मद्रा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री:
(4–5 लोगों के लिए)
मुख्य सामग्री:
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पनीर – 250 ग्राम (क्यूब्स में कटा हुआ)
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दही – 2 कप (अच्छी तरह फेंटा हुआ)
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बेसन – 2 बड़े चम्मच (दही को फटने से बचाने के लिए)
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घी – 3 बड़े चम्मच
मसाले:
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तेज पत्ता – 2
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दालचीनी – 1 टुकड़ा
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बड़ी इलायची – 2
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हरी इलायची – 3
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लौंग – 4–5
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जीरा – 1 छोटा चम्मच
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हींग – 1 चुटकी
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हल्दी – ½ छोटा चम्मच
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लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटा चम्मच
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धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच
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नमक – स्वादानुसार
सजावट के लिए:
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काजू – 10–12 (हल्के भूने हुए)
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किशमिश – 8–10
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हरा धनिया – बारीक कटा हुआ
पनीर मद्रा बनाने की विधि
1. दही तैयार करना
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दही को अच्छे से फेंट लें।
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उसमें बेसन डालकर अच्छी तरह मिला लें ताकि पकाते समय दही फटे नहीं।
2. पनीर की तैयारी
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पनीर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
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चाहें तो हल्का सा घी लगाकर तवे पर हल्का सुनहरा भून सकते हैं। इससे पनीर का स्वाद और भी बढ़ जाएगा।
3. मसालों का तड़का
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कड़ाही में घी गर्म करें।
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उसमें तेज पत्ता, दालचीनी, बड़ी इलायची, हरी इलायची और लौंग डालकर भूनें।
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अब जीरा और हींग डालें और कुछ सेकंड तक चलाएँ।
4. दही का मिश्रण डालना
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आँच धीमी कर दें और फेंटा हुआ दही डालें।
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लगातार चलाते रहें ताकि दही फटे नहीं।
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अब इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डालें।
5. पनीर मिलाना
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जब मसाले उबलने लगें और घी अलग दिखने लगे, तब पनीर के टुकड़े डालें।
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10–12 मिनट तक धीमी आँच पर पकने दें ताकि मसाले पनीर में अच्छे से समा जाएँ।
6. गार्निश करना
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ऊपर से काजू और किशमिश डाल दें।
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बारीक कटा हरा धनिया छिड़ककर गैस बंद कर दें।
परोसने का तरीका:
हिमाचल में पनीर मद्रा को अक्सर भात (सादा चावल) या तुदकिया भात (मसालेदार चावल) के साथ परोसा जाता है। यह धाम थाली का मुख्य आकर्षण होता है और शादी या त्योहारों पर लोग इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं।
पोषण और स्वास्थ्य लाभ:
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प्रोटीन से भरपूर: पनीर और दही दोनों ही शरीर को भरपूर प्रोटीन प्रदान करते हैं।
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हड्डियों के लिए अच्छा: कैल्शियम और फॉस्फोरस की अधिकता हड्डियों को मजबूत बनाती है।
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पचने में आसान: इसमें ज्यादा तेल और तीखे मसाले नहीं होते, इसलिए यह हल्का और सुपाच्य होता है।
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सात्विक भोजन: इसमें प्याज-लहसुन नहीं होने के कारण यह धार्मिक दृष्टि से भी शुद्ध माना जाता है।
पनीर मद्रा सिर्फ एक डिश नहीं बल्कि हिमाचल की परंपरा, संस्कृति और आस्था से जुड़ी एक कहानी है। यह व्यंजन हमें यह भी सिखाता है कि स्वाद हमेशा ज्यादा मसालों से नहीं बल्कि सरलता और संतुलन से आता है। आज जब लोग बाहर के फास्ट-फूड की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं, ऐसे में हिमाचल की यह पारंपरिक डिश हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है।
अगर कभी आपको हिमाचल जाने का अवसर मिले, तो वहाँ की धाम थाली में पनीर मद्रा का स्वाद लेना न भूलें, क्योंकि यह स्वाद आपके दिल में हमेशा के लिए बस जाएगा।
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