पहाड़ों की गडेरी की सब्ज़ी: इतिहास, स्वाद और बनाने की विधि

पहाड़ों की गडेरी की सब्ज़ी: उत्तराखंड की रसोई अपनी सादगी और पौष्टिकता के लिए जानी जाती है। यहाँ का हर व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीने की सीख भी देता है। इन्हीं व्यंजनों में से एक है गडेरी (जिसे अरबी या कचालू भी कहते हैं) की सब्ज़ी। यह सब्ज़ी पहाड़ों के घर-घर में खास स्थान रखती है और अक्सर त्यौहारों, भोज और पारंपरिक अवसरों पर बनाई जाती है।

पहाड़ों की गडेरी की सब्ज़ी
          पहाड़ों की गडेरी की सब्ज़ी

गडेरी क्या है?

गडेरी एक कंद वाली सब्ज़ी है जो आलू की तरह मिट्टी के नीचे उगती है। स्थानीय भाषा में इसे गडेरी या गडेरू कहा जाता है, जबकि आमतौर पर यह “अरबी” के नाम से जानी जाती है।

  • यह स्वाद में हल्की चिपचिपी लेकिन बेहद पौष्टिक होती है।

  • इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम और विटामिन C भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

  • पहाड़ी इलाकों में आलू के आने से पहले लोग गडेरी को ही मुख्य सब्ज़ी के रूप में इस्तेमाल करते थे।

इतिहास और सांस्कृतिक महत्व:

गडेरी की सब्ज़ी का इतिहास काफी पुराना है।

  • लोककथाओं में कहा जाता है कि जब पहाड़ों में अनाज और आलू कम हुआ करते थे, तब लोग गडेरी, झंगोरा और मडुए जैसे अनाज पर ही निर्भर रहते थे।

  • त्योहारों में, खासकर हरेला, इगास-बग्वाल और शादी-ब्याह के भोज में गडेरी की सब्ज़ी जरूर बनती थी।

  • पहले इसे लोहड़ी के बाद और सर्दियों में ज्यादा खाया जाता था क्योंकि यह शरीर को गर्म रखती है और लंबे समय तक ऊर्जा देती है।

गडेरी की सब्ज़ी बनाने के लिए सामग्री:

गडेरी की सब्ज़ी बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। इसकी खूबी ही इसकी सादगी है।

आवश्यक सामग्री:

  • गडेरी (अरबी) – ½ किलो

  • सरसों का तेल – 3 बड़े चम्मच

  • जीरा – 1 छोटा चम्मच

  • हींग – 1 चुटकी

  • हल्दी – ½ छोटा चम्मच

  • धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच

  • लाल मिर्च पाउडर – स्वाद अनुसार

  • नमक – स्वाद अनुसार

  • हरी मिर्च – 2 (कटी हुई)

  • लहसुन – 4-5 कली (कुचली हुई)

  • पानी – आवश्यकतानुसार

  • हरा धनिया – सजावट के लिए

पहाड़ों की गडेरी की सब्ज़ी, बनाने की विधि:

1. गडेरी उबालना

  • सबसे पहले गडेरी को अच्छी तरह धोकर कुकर में डालें।

  • 2–3 सीटी आने तक उबाल लें।

  • ठंडा होने के बाद इसका छिलका उतारकर मोटे टुकड़ों में काट लें।

2. मसाला तैयार करना

  • कढ़ाही में सरसों का तेल गरम करें।

  • उसमें जीरा और हींग डालकर तड़काएँ।

  • फिर लहसुन और हरी मिर्च डालकर सुनहरा होने तक भूनें।

3. गडेरी मिलाना

  • अब इसमें हल्दी, धनिया पाउडर और लाल मिर्च डालें।

  • तुरंत ही गडेरी के टुकड़े डालकर अच्छे से मिलाएँ।

  • थोड़ा पानी डालें ताकि मसाले गडेरी में अच्छे से घुल जाएँ।

4. पकाना

  • ढककर 8–10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएँ।

  • बीच-बीच में चलाते रहें ताकि सब्ज़ी तली न लगे।

5. सजावट

  • गैस बंद करने से पहले ऊपर से हरा धनिया डाल दें।

  • गरमा-गरम गडेरी की सब्ज़ी तैयार है।

परोसने का तरीका:

गडेरी की सब्ज़ी को परंपरागत रूप से मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर, या गेहूं की रोटी के साथ खाया जाता है। कुछ लोग इसे चावल के साथ भी खाते हैं। इसका स्वाद खट्टे रायते या भांग की चटनी के साथ और भी बढ़ जाता है।

गडेरी की सब्ज़ी के फायदे:

  1. पाचन के लिए लाभदायक – इसमें मौजूद फाइबर कब्ज और एसिडिटी से बचाता है।

  2. हड्डियों को मजबूत बनाती है – कैल्शियम और मैग्नीशियम की वजह से।

  3. ऊर्जा का स्रोत – पहाड़ों में पैदल चलने और खेतों में काम करने वालों को यह लंबे समय तक ताकत देती है।

  4. लो कैलोरी – ज्यादा तली-भुनी न बनाकर यह वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है।

आज के समय में गडेरी की सब्ज़ी:

हालांकि अब आलू और दूसरी सब्जियाँ हर जगह आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन गडेरी की सब्ज़ी का महत्व कम नहीं हुआ है।

  • पहाड़ी घरों में यह आज भी त्योहारों का खास हिस्सा है।

  • देहरादून, नैनीताल और टिहरी जैसे इलाकों के ढाबों और होटलों में भी इसे पारंपरिक थाली में परोसा जाता है।

  • प्रवासी उत्तराखंडी जब अपने गांव लौटते हैं, तो सबसे पहले घर की बनी गडेरी की सब्ज़ी ही मांगते हैं।

गडेरी की सब्ज़ी सिर्फ एक पकवान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। इसकी सादगी, पौष्टिकता और स्वाद हर किसी को आकर्षित करता है। यह हमें याद दिलाती है कि साधारण चीज़ें भी जीवन में कितनी खास हो सकती हैं। अगली बार जब आप पहाड़ जाएँ, तो वहां की रसोई से बनी गडेरी की सब्ज़ी जरूर चखें और उसकी परंपरा को महसूस करें।

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